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क्या था वह इमरजेंसी अलार्म जिसने Pentagon को हिला दिया? सामने आई पूरी कहानी

Pentagon Emergency Alarm की वजह से पेंटागन के कुछ हिस्सों में लॉकडाउन लगाया गया. एयर क्वालिटी अलर्ट के बाद हज़मैट टीम सक्रिय हुई, हालांकि कोई खतरा नहीं मिला.

Pentagon Emergency Alarm Pentagon Lockdown
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अमेरिका के डिफेंस हेडक्वार्टर पेंटागन में गुरुवार को अचानक मची हलचल ने कई लोगों को चौंका दिया. दरअसल, दुनिया की सबसे सेफ और सबसे ज्यादा निगरानी वाली इमारतों में शामिल पेंटागन के भीतर एक अलर्ट बजा, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो गईं. कुछ ही मिनटों में इमारत के कई हिस्सों में लॉकडाउन जैसे हालात बन गए, कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर रहने के निर्देश दिए गए और हजमैट (Hazmat) टीमों को जांच के लिए बुला लिया गया.

हालांकि, शुरुआती जांच के बाद अधिकारियों ने संकेत दिया कि यह संभवतः एक फॉल्स अलार्म था, लेकिन जिस तेजी से सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय हुई उसने एक बार फिर पेंटागन की सुरक्षा प्रणाली की ताकत दिखा दी.

पेंटागन में अचानक क्या हुआ था?

घटना की शुरुआत तब हुई जब पेंटागन के अत्याधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम ने हवा की गुणवत्ता में संभावित गड़बड़ी का संकेत दिया. यह अलर्ट किसी सामान्य तकनीकी नोटिफिकेशन की तरह नहीं था, बल्कि ऐसा संकेत था जो रासायनिक, जैविक या रेडियोलॉजिकल खतरे की संभावना से जुड़ा हो सकता था. यही से मामला गंभीर हो गया और पेंटागन हेडक्वार्टर में काम करने वाले हजारों लोग भयभीत हो और दफ्तर छोड़कर भागने लगे. पेंटागन में काफी देर के लिए अफरातफरी का माहौल बन गया.

हालांकि अलर्ट अलार्म बजते ही सुरक्षा अधिकारियों ने एहतियाती कदम उठाए. कुछ हिस्सों को तत्काल बंद कर दिया गया. जबकि कर्मचारियों को ‘शेल्टर-इन-प्लेस’ यानी जहां हैं वहीं सुरक्षित बने रहने के निर्देश दिए गए. कई मंजिलों और कॉरिडोर तक किसी की आवाजाही पूरी तरह से रोक दी गई.

मामले को गंभीरता से क्यों लिया?

यहां पर इस बात का जिक्र कर दें कि पेंटागन केवल एक सरकारी इमारत नहीं है बल्कि अमेरिकी सैन्य संचालन का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है. यहां प्रतिदिन हजारों सैन्य अधिकारी, रक्षा विशेषज्ञ और नागरिक कर्मचारी काम करते हैं. दुनियाभर में फैले अमेरिकी सैन्य बेस पर नियुक्त कमांड स्टेशनों से यहीं से जरूरी आदेश दिए जाते हैं. यही वजह है कि किसी भी संभावित खतरे को लेकर यहां ‘जीरो रिस्क’ नीति अपनाई जाती है.

पेंटागन की इमारत में ऐसे सेंसर लगे हैं जो हवा में मौजूद असामान्य रासायनिक, जैविक या रेडियोलॉजिकल तत्वों का पता लगाने में सक्षम हैं. यदि किसी सेंसर को खतरे की आशंका होती है तो पूरा सुरक्षा प्रोटोकॉल खुद ब खुद एक्टिव हो जाता है. इस प्रक्रिया में वेंटिलेशन सिस्टम के हिस्सों को अलग किया जा सकता है. ताकि किसी संभावित दूषित पदार्थ का फैलाव रोका जा सके.

हजमैट टीमों ने जांच में क्या पाया?

इमरजेंसी अलर्ट मिलने के बाद पेंटागन फोर्स प्रोटेक्शन एजेंसी की हजमैट टीम और अर्लिंग्टन काउंटी फायर डिपार्टमेंट के आपातकालीन विशेषज्ञ मौके पर पहुंचे. टीमों ने विभिन्न हिस्सों से एयर सैंपल लिए और कई स्तरों पर जांच की.

शुरुआती जांच में किसी भी तरह के खतरनाक केमिकल, बायोलॉजिकल या रेडियोलॉजिकल पदार्थ के सबूत नहीं मिले. फायर डिपार्टमेंट के अफसरों ने बताया कि उन्हें ऐसा कोई संकेत नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि कर्मचारियों या इमारत को तत्काल कोई खतरा था. यही कारण है कि कुछ घंटों बाद सुरक्षा प्रतिबंधों में धीरे-धीरे ढील दी जाने लगी.

क्या यह रियल में फॉल्स अलार्म था?

अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार यह घटना संभवतः एक गलत अलार्म थी. हालांकि, अधिकारियों ने अंतिम निष्कर्ष जारी नहीं किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक संवेदनशील सुरक्षा प्रणालियां कई बार हवा में मौजूद असामान्य लेकिन गैर-खतरनाक बदलावों को भी संभावित खतरे के रूप में दर्ज कर सकती हैं.

इसी वजह से जांच एजेंसियां मॉनिटरिंग सिस्टम से प्राप्त डेटा का विश्लेषण कर रही हैं. यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर किस वजह से सेंसर सक्रिय हुए और सुरक्षा अलर्ट जारी हुआ.

घटना ने पेंटागन की सुरक्षा व्यवस्था की खोल दी पोल?

भले ही यह घटना किसी रियल हमले या रासायनिक खतरे में नहीं बदली, लेकिन इसने पेंटागन की सुरक्षा प्रणाली की कार्यक्षमता को उजागर कर दिया. अलर्ट जारी होते ही कुछ ही मिनटों में इमरजेंसी प्रोटोकॉल लागू हो गए, हजमैट टीमें पहुंच गईं और प्रभावित क्षेत्रों को सभी को अलग कर दिया.

मीडिया रिपोर्ट में अमेरिकी डिफेंस एक्सपर्ट के हवाले से कहा गया है कि ऐसे मामलों में सबसे महत्वपूर्ण बात प्रतिक्रिया की गति होती है. यदि कभी वास्तविक खतरा सामने आता है तो इसी तरह की त्वरित कार्रवाई नुकसान को सीमित करने में मदद कर सकती है. यही वजह है कि अमेरिकी रक्षा विभाग किसी भी चेतावनी को हल्के में लेने के बजाय पूरी गंभीरता से लेती हे और जांच करती है.

फिलहाल, जिस अलार्म ने कई घंटों के लिए पेंटागन में डर का माहौल बना रहा. अब उसकी वजह जानने के लिए जांच अभी जारी है. पूरी दुनिया की नजर अब इस बात पर है कि आखिर वह कौन-सा संकेत था जिसने अमेरिका के सबसे सुरक्षित सैन्य मुख्यालय में अचानक सुरक्षा तंत्र को हाई अलर्ट पर पहुंचा दिया.

पेंटागन में अविश्वास का माहौल क्यों?

टीओआई और द हिंदू समेत अन्य मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पेंटागन में डर और शक का माहौल तब बना, जब सेना और इंटेलिजेंस के बड़े अधिकारियों को बड़े पैमाने पर हटाया गया. इससे पेंटागन में पाबंदियों और अविश्वास का माहौल पैदा हो गया. तनाव का यह माहौल सीधे तौर पर डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ के कार्यकाल की कुछ घटनाओं और नीतियों का नतीजा माना जा रहा है. जैसे:

बड़े पैमाने पर बर्खास्तगी और छंटनी: हाल के कुछ महीनों में एक दर्जन से ज्यादा सीनियर मिलिट्री लीडर्स, इंटेलिजेंस अधिकारियों और आलोचकों को नौकरी से हटा दिया गया या समय से पहले रिटायर होने के लिए मजबूर किया गया. इनमें ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन और नेवी व एयर फोर्स के दूसरे बड़े अधिकारी भी शामिल थे.

ईरान इंटेलिजेंस विवाद: ईरान के खिलाफ अमेरिकी हवाई हमलों के एक गोपनीय रिपोर्ट लीक होने के बाद से पेंटागन के सुरक्षा अधिकारियों के बीच अविश्वास का माहौल है. रिपोर्ट लीक होने से पता चला था कि अमेरिकी हमलों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सिर्फ कुछ महीने ही पीछे धकेला था, जो प्रशासन के दावों के बिल्कुल उलट था.

सुरक्षा और वफादारी से जुड़ी चिंताएं: बड़े अधिकारियों को मिलिट्री प्लानिंग से दूर रखा गया, आलोचक माने जाने वाले लोगों के सिक्योरिटी क्लीयरेंस रद्द कर दिए गए और जानकारी को अलग-अलग हिस्सों में बांटने की सख्त नीति लागू की गई.

डोनाल्ड ट्रंप
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