कैसा होता है नरक या जहन्नुम, जिसे ईरान को बनाने की बोल रहे हैं ट्रंप, Hell की कैसी-कैसी परिभाषा?
मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच ट्रंप ने ईरान को 'नरक बना देने' की चेतावनी देकर वैश्विक तनाव और बढ़ा दिया है. यह बयान सिर्फ एक धमकी नहीं, बल्कि उस भयावह स्थिति का संकेत है, जिसमें युद्ध, तबाही और अराजकता चरम पर पहुंच सकती है. ‘नरक’ या ‘जहन्नुम’ को अलग-अलग धर्मों में पापियों की सजा की जगह माना गया है. जहां आग, दर्द और असहनीय यातनाएं होती हैं.
मिडिल ईस्ट में जारी जंग को 38 दिन पूरे होने को हैं, लेकिन हालात थमने के बजाय और खतरनाक होते जा रहे हैं. इस युद्ध में Donald Trump अपने तीखे और विवादित बयानों को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं. शुरुआत में जहां उन्होंने दावा किया था कि 7 दिन में यह जंग खत्म हो जाएगी. वहीं अब हालात उलट नजर आ रहे हैं और तनाव खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़ता जा रहा है.
जैसा की आपको मालूम को बीते दिन 5 अप्रैल को अमेरिका के मुखिया ने एक बार फिर ईरान को धमकी देते हुए कहा कि अगर होर्मुज नहीं खोला गया तो 'नरक बना देंगे' और पुलों पर हमले की बात कही. इसके जवाब में ईरान ने भी सख्त प्रतिक्रिया दी, हालांकि भाषा संयमित रखी. ईरान का कहना है कि इस जंग के जरिए अमेरिका खुद को ही 'जहन्नुम' की ओर धकेल रहा है. अब ऐसे में दो शब्द सुर्खियों में आ गए हैं कि नरक और जहन्नुम कैसा होता है जिसके ईरान के राष्ट्रपति बनाने की बात कर रहे या फिर उनके बड़बोले तेवर हैं.
आखिर ‘नरक’ या ‘जहन्नुम’ होता क्या है?
‘नरक’ या ‘जहन्नुम’ को लगभग सभी धर्मों में पापियों के लिए सजा की जगह माना गया है. यह केवल एक भौतिक स्थान नहीं, बल्कि अत्यधिक पीड़ा, अंधकार और कष्ट का प्रतीक भी है. हिंदू धर्म में इसे ‘यमलोक’ कहा जाता है, जबकि इस्लाम में ‘जहन्नुम’ के रूप में जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह वह स्थान है जहां आत्मा को अपने कर्मों के अनुसार दंड मिलता है. चाहे वह शारीरिक पीड़ा हो या मानसिक यातना.
इस्लाम में ‘जहन्नुम’ कैसा बताया गया है?
इस्लामिक मान्यता के अनुसार ‘जहन्नुम’ आग और सजा का सबसे भयावह स्थान है. इसे सात स्तरों में बांटा गया है, जहां हर स्तर पर अलग-अलग तरह की सजा दी जाती है. यह केवल आग की दुनिया नहीं, बल्कि मानसिक पीड़ा का भी केंद्र है, जहां पापियों को उनके कर्मों का पूरा हिसाब चुकाना पड़ता है.
हिंदू धर्म में ‘नरक’ का क्या स्वरूप है?
हिंदू ग्रंथ गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद यमदूत पापियों को नरक में ले जाते हैं. यहां 28 प्रकार के नरक बताए गए हैं, जैसे- तामिस्र और असिपत्रवन. हर नरक अलग-अलग पापों के लिए निर्धारित है और वहां मिलने वाली सजा भी उसी के अनुसार होती है. कहीं आग की लपटें, कहीं उबलता तेल, तो कहीं लोहे के औजारों से यातना.
क्या ‘नरक’ सिर्फ धार्मिक कल्पना है या कुछ और भी?
कुछ आधुनिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण यह मानते हैं कि ‘नरक’ कोई वास्तविक जगह नहीं, बल्कि मन की अवस्था है. जब व्यक्ति अपने कर्मों के कारण भय, अपराधबोध और कष्ट से गुजरता है, तो वही स्थिति उसके लिए ‘नरक’ बन जाती है. यानी 'Hell on Earth' की अवधारणा, जहां इंसान जीवित रहते हुए ही नरकीय अनुभव करता है.
दूसरे धर्मों और पौराणिक कथाओं में Hell कैसा है?
ईसाई धर्म में ‘Hell’ को अनंत आग की झील (Lake of Fire) के रूप में वर्णित किया गया है, जहां पापियों को हमेशा के लिए दंड मिलता है. वहीं ग्रीक पौराणिक कथाओं में ‘टार्टारस’ को वह स्थान माना गया है, जहां दुष्ट आत्माओं को कष्ट दिया जाता है. इसे पाताल लोक का सबसे अंधकारमय हिस्सा बताया गया है.
नरक की सजा कैसी होती है?
धार्मिक ग्रंथों में नरक की सजा बेहद भयावह बताई गई है-
- जलती आग में झोंकना
- उबलते तेल में डालना
- लोहे की छड़ों से मारना
- घृणित पदार्थों का सेवन कराना
यह सब आत्मा को उसके बुरे कर्मों का परिणाम भुगताने के लिए होता है.
ट्रम्प के ‘नरक’ वाले बयान का क्या मतलब है?
जब अमेरिका के राष्ट्रपति कहते हैं कि 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलो, वरना नरक बना देंगे'-तो इसका अर्थ धार्मिक नहीं, बल्कि रूपक (metaphorical) है. यह एक चेतावनी है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो युद्ध इतना विनाशकारी हो सकता है कि वह ‘नरक’ जैसा अनुभव देगा- जहां केवल तबाही, दर्द और अराजकता होगी.
‘नरक’ या ‘जहन्नुम’ केवल मृत्यु के बाद की सजा नहीं, बल्कि एक ऐसी स्थिति भी है जहां इंसान असहनीय कष्ट झेलता है. मिडिल ईस्ट की जंग में जिस तरह के बयान सामने आ रहे हैं, वे इस शब्द को और भी भयावह बना देते हैं. क्योंकि यहां ‘नरक’ का मतलब सिर्फ कल्पना नहीं, बल्कि वास्तविक विनाश से है.




