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'ये बड़े-बड़े बोल हमने...', पाकिस्तानी मौलाना फजलुर रहमान ने आसिम मुनीर निकाली हेकड़ी, क्यों किया 1971 की जंग का जिक्र?

पाकिस्तान के प्रमुख धार्मिक और राजनीतिक नेता मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर के नेतृत्व को लेकर सवाल उठाए हैं. इतना ही नहीम मौलाना ने 1971 जंग की भी याद दिलाई है.

Maulana Fazlur Rehman and Asim Munir
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Maulana Fazlur Rehman and Asim Munir

( Image Source:  X/ @jpsin1, @MOSSADil )

पाकिस्तानी सरकार और सेना प्रमुख आसिम मुनीर अक्सर भारत के खिलाफ अपने भड़काऊ बयानों से जहर उगलते हुए दिखाई देते हैं, लेकिन खुद उनके ही लोग पाकिस्तानी सरकार और आर्मी जनरल को उनकी औकात दिखाते रहते हैं. इस बीच एकबार फिर से पाकिस्तान के प्रमुख धार्मिक और राजनीतिक नेता मौलाना फजलुर रहमान ने आसिम मुनीर की हेकड़ी निकालते हुए उनपर कई सवाल भी उठाए. इतना ही नहीं मौलाना फजलुर ने पाकिस्तान के मौजूदा हालात की तुलना साल 1971 के दौर से कर डाली है.

फजलुर रहमान ने कहा कि वह सेना और उसके नेतृत्व की ताकत को मानते हैं, लेकिन इतिहास के सबक को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उन्होंने दिसंबर 1971 का उदाहरण देते हुए तत्कालीन सैन्य शासन के दावों और उसके बाद सामने आए घटनाक्रम का जिक्र किया. साथ ही बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में जारी तनाव को लेकर भी उन्होंने सरकार और सेना से सवाल पूछे.

मौलाना ने क्यों किया 1971 का जिक्र?

फजलुर रहमान ने दिसंबर 1971 की घटनाओं को याद करते हुए कहा कि भारत के सामने आत्मसमर्पण से एक दिन पहले तत्कालीन सैन्य शासक जनरल याह्या खान ने पाकिस्तान की जनता को संबोधित किया था. उनके मुताबिक उस समय दावा किया गया था कि पाकिस्तानी सेना गली-गली, खेतों और पहाड़ों तक लड़ाई जारी रखेगी. हालांकि, फजलुर रहमान ने कहा कि इसके अगले ही दिन पाकिस्तानी सेना को हथियार डालने पड़े. इसी संदर्भ में उन्होंने मौजूदा सैन्य नेतृत्व के दावों पर टिप्पणी करते हुए कहा "ये बड़े-बड़े बोल तो हमने उस वक्त भी सुने हैं."

क्या उठाया मुद्दा?

मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तान की आम जनता की परेशानियों का भी मुद्दा उठाया. उन्होंने सवाल किया कि जब देश की जनता पहले से ही गंभीर मुश्किलों से गुजर रही है, तो उसे लगातार ऐसी परिस्थितियों में क्यों धकेला जा रहा है. उन्होंने कहा कि देश में राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी संकटों के बीच सरकार को जनता के सामने अपनी नीति और उद्देश्य स्पष्ट करने चाहिए. उनके मुताबिक मौजूदा परिस्थितियों को लंबे समय तक जारी रखना देश के लिए गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है.

बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा पर क्या बोले?

फजलुर रहमान ने बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के हालात का विशेष रूप से जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि दोनों क्षेत्रों में स्थिति सामान्य नहीं है और कई इलाकों में जंग जैसे हालात बने हुए हैं. उन्होंने लगातार हो रही हिंसा और खूनखराबे पर चिंता जताते हुए कहा कि लोग लंबे समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से उनके साथ पर्याप्त बातचीत नहीं की जा रही है. फजलुर रहमान ने चेतावनी दी कि अगर किसी क्षेत्र में लोगों की शिकायतों का राजनीतिक समाधान नहीं निकाला गया और लंबे समय तक तनाव बना रहा, तो अलगाव की मांग करने वाले तत्वों को इसका फायदा मिल सकता है.

मौलाना ने अपने बयान में यह भी सवाल उठाया कि मौजूदा हालात के पीछे आखिर उद्देश्य क्या है. उन्होंने कहा कि जब किसी क्षेत्र में लंबे समय तक हिंसा और खूनखराबा जारी रहता है, तो यह भविष्य में होने वाले भौगोलिक बदलावों की आशंका का संकेत भी हो सकता है.

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