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महल जैसा डिजाइन, जहां कभी लगती थीं शाही महफिलें, पाकिस्तान के हिंदू जिमखाने के बारे में कितना जानते हैं आप

कभी पाकिस्तान के कराची के अमीर हिंदू कारोबारियों की शान माना जाने वाला हिंदू जिमखाना आज भी अपनी खूबसूरत वास्तुकला और शाही इतिहास के लिए जाना जाता है.1925 में बना यह ऐतिहासिक इमारत किसी महल से कम नहीं दिखती है.

karachi hindu gymkhana
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कराची के हिंदू जिमखाने के बारे में कितना जानते हैं आप

( Image Source:  instagram-@mad.mughal.memes )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत6 Mins Read

Updated on: 29 May 2026 12:10 PM IST

भारत में हाल ही में दिल्ली जिमखाना क्लब को लेकर विवाद के बाद “जिमखाना” शब्द फिर से चर्चा में आ गया है. जिमखाना का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में पुराने अंग्रेजों के जमाने की बड़ी इमारतें, हरे-भरे लॉन और खास लोगों के क्लब की तस्वीर आती है. ब्रिटिश भारत के समय जिमखाना केवल खेल-कूद की जगह नहीं होते थे, बल्कि ये समाज के अमीर और प्रभावशाली लोगों के मिलने-जुलने के सेंटर माने जाते थे.

मुंबई, मद्रास, लाहौर और कराची जैसे शहरों में इन क्लबों की खास पहचान थी. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पाकिस्तान के कराची में भी एक हिंदू जिमखाना है, जिसे 1925 में बनाया गया था. यह इमारत आज पाकिस्तान में एक ऐतिहासिक धरोहर होने के साथ-साथ कानूनी और सांस्कृतिक विवाद का भी हिस्सा बनी हुई है.

जिमखाना क्या होता है?

“जिमखाना” शब्द की शुरुआत भारत से मानी जाती है. कहा जाता है कि यह हिंदी-उर्दू के शब्द “गेंद-खाना” से निकला है, जिसका मतलब खेल या एंटरटेनमेंट की जगह होता है. 1854 के आसपास अंग्रेजी में इस शब्द का इस्तेमाल शुरू हुआ. अंग्रेजों के दौर में जिमखाना ऐसे क्लब बन गए, जहां अधिकारी, व्यापारी और अमीर लोग खेल, घुड़सवारी, टेनिस, बिलियर्ड्स, खाना-पीना और सोशल इवेंट्स के लिए इकट्ठा होते थे.

कराची में कैसे बना हिंदू जिमखाना?

instagram-@mad.mughal.memes

जब 1925 में हिंदू जिमखाना बना, तब पाकिस्तान नहीं बना था. कराची उस समय ब्रिटिश भारत का हिस्सा था और वहां हिंदू व्यापारियों का बड़ा दबदबा था. हिंदू समुदाय व्यापार, शिपिंग, बैंकिंग और रियल एस्टेट में काफी मजबूत माना जाता था. कराची के हिंदू व्यापारियों ने सोचा कि उनके समुदाय के लिए भी एक बड़ा सोशल और एंटरटेनमेंट सेंटर होना चाहिए. इसी सोच के साथ “सेठ रामगोपाल गोवर्धनदास मोहट्टा हिंदू जिमखाना” बनाया गया.

किसने बनाया जिमखाना?

इस प्रोजेक्ट को फेमस बिजनेस मैन और सोशल वर्कर सेठ रामगोपाल गोवर्धनदास मोहट्टा ने लीड किया. ब्रिटिश सरकार ने 1921 में लगभग 47 हजार वर्ग गज जमीन 100 साल की लीज पर दी थी. इसके बाद निर्माण शुरू हुआ और 1925 में यह शानदार इमारत तैयार हो गई.

कैसा दिखता है कराची का जिमखाना?

instagram-@abdullrafayyyy

कराची का हिंदू जिमखाना अपनी खूबसूरत डिजाइन के लिए दुनिया भर में फेमस है. इसे मशहूर आर्किटेक्ट आगा अहमद हुसैन ने डिजाइन किया था, जिन्हें उपमहाद्वीप के शुरुआती मुस्लिम आर्किटेक्ट में गिना जाता है.

  • यह कराची की पहली सार्वजनिक इमारतों में थी, जिसे मुगल-रिवाइवल या इंडो-सारासेनिक स्टाइल में बनाया गया. इसका डिजाइन आगरा के एतमाद-उद-दौला मकबरे से इंस्पायर्ड था, जिसे ताजमहल का शुरुआती रूप भी कहा जाता है.
  • इमारत में ऑक्टेंगल टावर, झरोखे, छतरियां और मुगल-राजस्थानी स्टाइल की नक्काशी की गई थी. इसकी छत की डिजाइन फतेहपुर सीकरी से इंस्पायर्ड है.
  • इस बिल्डिंग को बनाने में अलग-अलग जगहों के पत्थरों का इस्तेमाल हुआ. नक्काशी के लिए जोधपुर पत्थर, गुंबदों के हिस्सों में गिजरी पत्थर और मोटी दीवारों के लिए दक्षिण भारत का बीजापुर पत्थर इस्तेमाल किया गया.
  • इसी वजह से यह इमारत किसी खेल क्लब से ज्यादा एक महल जैसी दिखाई देती थी. आज भी इसे कराची की सबसे खूबसूरत पुरानी इमारतों में गिना जाता है.

बंटवारे के बाद क्या बदला?

  • 1947 में भारत-पाकिस्तान का विभाजन हुआ और कराची के ज्यादातर हिंदू परिवार भारत चले गए. इसके बाद हिंदू जिमखाना खाली हो गया. पाकिस्तान सरकार ने इसे “इवैक्यूई प्रॉपर्टी” यानी छोड़ी गई संपत्ति घोषित कर दिया.
  • 1960 के दशक में हिंदू समुदाय ने इस इमारत को वापस लेने की कोशिश की, लेकिन 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद यह मामला कमजोर पड़ गया.
  • धीरे-धीरे इमारत की हालत खराब होने लगी. इसकी बड़ी जमीन अलग-अलग सरकारी कामों में इस्तेमाल होने लगी. कुछ हिस्से पुलिस स्टेशन, सरकारी दफ्तर और शिक्षा संस्थानों को दे दिए गए.
  • कहा जाता है कि 47 हजार वर्ग गज में फैली इस संपत्ति का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा खत्म हो चुका है और अब केवल करीब 4500 वर्ग गज जमीन बची है.

कैसे बची यह ऐतिहासिक इमारत?

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  • 1970 और 1980 के दशक तक हिंदू जिमखाना काफी जर्जर हो चुका था और इसे गिराने की नौबत आ गई थी. लेकिन पाकिस्तान की हेरिटेज फाउंडेशन और कई इतिहासकारों ने इसे बचाने की कोशिश की. बाद में इस इमारत को सिंध कल्चरल हेरिटेज एक्ट 1994 के तहत संरक्षित ऐतिहासिक धरोहर घोषित किया गया.
  • कुछ समय तक इसे म्यूजियम और कल्चरल सेंटर बनाने का प्लान भी बना, लेकिन बाद में इसका इस्तेमाल दूसरे तरीके से होने लगा.

कैसे बना कला और थिएटर का केंद्र?

2005 में पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने इस इमारत को नेशनल एकेडमी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स यानी NAPA को 30 साल की लीज पर दे दिया. इसके बाद यह जगह पाकिस्तान में थिएटर, म्यूजिक और कला का बड़ा केंद्र बन गई. मशहूर एक्टर जिया मोहिउद्दीन से जुड़ी NAPA ने यहां कलाकारों को ट्रेनिंद देना शुरू किया. आज यह इमारत पाकिस्तान के सांस्कृतिक जगत की अहम पहचान बन चुकी है.

इमारत को लेकर विवाद क्यों है?

  • कराची का हिंदू समुदाय और कई विरासत संरक्षण समूह चाहते हैं कि इस इमारत को फिर से हिंदू समुदाय को सौंपा जाए, क्योंकि यह उनकी ऐतिहासिक पहचान का हिस्सा है.
  • 2014 से इस मामले में कई कानूनी याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं. पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने भी कई बार इस मामले पर सुनवाई की है.
  • 2021 में अदालत ने परिसर में बने कुछ नए निर्माण हटाने का आदेश भी दिया था. हालांकि NAPA का कहना है कि यह जगह कराची की कला और संस्कृति के लिए बहुत जरूरी है और बिना दूसरी अच्छी जगह मिले वे यहां से नहीं हटेंगे.
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