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इन खास पत्तों को मुंह में दबाकर जंग के मैदान में उतरते हैं सऊदी की बखिया उधेड़ने वाले हूती, जीभ से टच होते ही ऐसे करते हैं काम

यमन के हूती लड़ाकों के बीच कैत यानी Khat की पत्तियां काफी फेमस हैं. कई लडाके इन्हें मुंह में दबाकर जंग के मैदान में जाते हैं. जानिए क्या होती हैं ये पत्तियां और इनका शरीर पर प्रभाव क्या होता है.

इन खास पत्तों को मुंह में दबाकर जंग के मैदान में उतरते हैं सऊदी की बखिया उधेड़ने वाले हूती, जीभ से टच होते ही ऐसे करते हैं काम
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सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच जंग जारी है. दोनों तरफ से लगातार हमले किए जा रहे हैं. हूती समूह का दावा है कि पिछले 24 घंटे में सऊदी लड़ाकू विमानों ने यमन के दक्षिण-पश्चिमी ताइज प्रांत में 26 हवाई हमले किए हैं. हूतियों के मुताबिक, इस सप्ताह यमन में किए गए हवाई हमलों की कुल संख्या 300 तक पहुंच गई है. इस दौरान कई मोर्चों पर जमीनी लड़ाई भी जारी है और हवाई हमलों में तेजी देखी गई है.

हालांकि, इन हमलों और जंग के बीच एक और चीज खूब चर्चा में है और वह है ‘कैत’ की पत्तियां. सोशल मीडिया पर सामने आई हूती लड़ाकों की कुछ तस्वीरों में उनके गाल फूले हुए दिखाई दे रहे हैं. बताया गया कि कई लड़ाके मुंह में कैत की पत्तियां दबाकर रखते हैं और उन्हें चबाते हुए युद्ध के मैदान में उतरते हैं.

सोशल मीडिया पर क्या वीडियो हो रहा वायरल?

इससे पहले हूती विद्रोहियों की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं. इन तस्वीरों में कुछ लड़ाके चप्पल पहने और बिना किसी खास सैन्य गियर के हाथों में बंदूक लिए आगे बढ़ते दिखाई दे रहे थे. इन तस्वीरों में कई लड़ाकों के गाल असामान्य रूप से फूले हुए नजर आए. बाद में इसकी वजह कैत की पत्तियां बताई गईं. कई हूती लड़ाके इन पत्तियों को मुंह में रखकर लंबे समय तक चबाते हैं. कैत को चबाने की वजह से पत्तियों में मौजूद सक्रिय रसायन शरीर पर स्टीमुलेटिंग इफेक्ट डालते हैं.

बुधवार को मक्का में भी जारी हुआ अलर्ट?

बुधवार को मक्का में सायरन बजने से भी लोगों में हलचल मच गई. उस समय पवित्र स्थल को भी अलर्ट मोड पर रखा गया, क्योंकि हूती विद्रोहियों का एक ड्रोन वहां दिखाई दिया था. हालांकि, हूती संगठन का कहना था कि उनका निशाना मक्का नहीं था. संगठन के मुताबिक, उन्होंने सऊदी अरब की एक पेट्रोलियम साइट को निशाना बनाने की कोशिश की थी.

आखिर क्या है कैत?

कैत को अंग्रेजी में Qat या Khat कहा जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम Catha edulis है. यह एक पौधा है, जिसकी ताजी पत्तियों और नई कलियों को आमतौर पर कई घंटों तक चबाया जाता है. इन पत्तियों में मुख्य रूप से कैथिनोन (Cathinone) और कैथिन (Cathine) नाम के सक्रिय रसायन पाए जाते हैं.

ये रसायन केंद्रीय नर्वस सिस्टम पर उत्तेजक प्रभाव डालते हैं और इनका असर हल्के एम्फेटामिन जैसा बताया जाता है. यही वजह है कि कैत को एक प्लांट-बेस्ड साइकोस्टिमुलेंट यानी पौधे से मिलने वाला उत्तेजक पदार्थ माना जाता है.

कैत खाने के बाद शरीर पर क्या असर होता है?

कैत की पत्तियां चबाने के बाद व्यक्ति में कुछ समय के लिए उत्साह, ज्यादा सतर्कता और ऊर्जा महसूस हो सकती है. इससे बोलने की इच्छा बढ़ सकती है और एकाग्रता भी बढ़ने का अनुभव हो सकता है. इसके अलावा, व्यक्ति को कुछ समय के लिए उत्साह या अतिरिक्त ऊर्जा महसूस हो सकती है. वह किसी काम को ज्यादा एनर्जी और फोकस के साख करता है. इसे खाने के बाद कई लोगों में एग्रेसिव बिहेवियर भी देखे गए. शायद यही कारण है कि ये पत्तियां हूतियों के बीच इतनी प्रचलित हैं. कैत के सेवन के बाद कुछ समय के लिए व्यक्ति ज्यादा एक्टिव और जागरूक महसूस कर सकता है.

असर खत्म होने के बाद क्या होता है?

कैत का प्रभाव कम होने के बाद इसका उल्टा असर भी देखने को मिल सकता है. शरीर में इसके सक्रिय रसायनों का स्तर कम होने पर बेचैनी, मूड खराब होना और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसके अलावा, लगातार थकान और नींद आने में परेशानी यानी अनिद्रा भी हो सकती है. यानी कैत के सेवन के दौरान महसूस होने वाली ऊर्जा और उत्तेजना के बाद व्यक्ति को थकान और बेचैनी का सामना करना पड़ सकता है.

लंबे समय तक कैत खाने से क्या नुकसान हो सकते हैं?

कैत का लंबे समय तक और ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल कई तरह के मानसिक प्रभावों से जुड़ा है. इससे चिंता, शक की भावना यानी पैरानॉयया और उन्मादी व्यवहार जैसी समस्याएं हो सकती हैं. कुछ मामलों में भ्रम यानी हैलुसिनेशन और गंभीर पैरानॉयड साइकोसिस का खतरा भी बताया गया है. लगातार इस्तेमाल से व्यक्ति में मनोवैज्ञानिक निर्भरता भी विकसित हो सकती है. यानी व्यक्ति मानसिक रूप से कैत के सेवन पर निर्भर होने लग सकता है.

भूख और पाचन पर क्या होता है असर?

कैत भूख को कम कर सकता है. इसके कारण वजन कम होने की समस्या भी हो सकती है. इसके अलावा, यह पाचन तंत्र को धीमा कर सकता है. इसके लगातार इस्तेमाल से क्रॉनिक गैस्ट्राइटिस यानी लंबे समय तक पेट में सूजन और जलन, पेट से भोजन के आगे जाने की प्रक्रिया में देरी और गंभीर कब्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसके साथ ही बवासीर यानी हेमोरॉयड्स की समस्या भी जुड़ी हो सकती है.

लिवर और किडनी पर भी असर?

कैत के रसायनों को लंबे समय तक या ज्यादा मात्रा में शरीर द्वारा प्रोसेस किए जाने से लिवर और किडनी पर दबाव पड़ सकता है. लंबे समय तक कैत के इस्तेमाल को केमिकल हेपेटाइटिस यानी रसायनों से जुड़ी लिवर की सूजन से जोड़ा गया है. इसके अलावा, लिवर के बढ़ने और गंभीर मामलों में लिवर सिरोसिस जैसी समस्या का जोखिम भी बताया गया है. किडनी की कार्यक्षमता से जुड़े कुछ संकेतकों में भी खराबी देखने को मिल सकती है.

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