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कॉम्बैट गियर, टैक्टिकल गियर और बुलेट प्रूफ जैकेट सब जाए भाड़ में, चप्पल और धोती पहन कुछ इस तरह लड़ रहे हूती, सऊदी की नाक में किया दम

यमन के हूती लड़ाकों की अलग तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा में है. चप्पल, पारंपरिक कपड़े और बंदूक के साथ नजर आने वाले लड़ाकों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं.

कॉम्बैट गियर, टैक्टिकल गियर और बुलेट प्रूफ जैकेट सब जाए भाड़ में, चप्पल और धोती पहन कुछ इस तरह लड़ रहे हूती, सऊदी की नाक में किया दम
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समी सिद्दीकी
समी सिद्दीकी8 Mins Read

Updated on: 17 Sept 2026 12:10 PM IST

जब किसी सेना की तस्वीर हमारे दिमाग में आती है, तो आमतौर पर यूनिफॉर्म, हेलमेट, बुलेटप्रूफ जैकेट और आधुनिक टैक्टिकल गियर पहने सैनिक नजर आते हैं. लेकिन यमन के हूती लड़ाकों की तस्वीर इससे काफी अलग दिखाई देती है. सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो में हूती लड़ाके चप्पल पहने, पारंपरिक कपड़ों में और कंधे पर बंदूक लटकाए मार्च करते नजर आते हैं.

इन वीडियो में ज्यादातर लड़ाकों के पास न तो बुलेटप्रूफ जैकेट दिखाई देती है और न ही सामान्य तौर पर इस्तेमाल होने वाला आधुनिक टैक्टिकल गियर. उनकी पोशाक देखकर पहली नजर में ऐसा लगता है जैसे वे किसी सैन्य अभियान के बजाय रोजमर्रा के कपड़ों में ही मैदान में उतर आए हों.

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में क्या दिखाई दे रहा है?

वायरल वीडियो में हूती लड़ाके कंधे पर बंदूक टांगे हुए नजर आते हैं. उनके शरीर पर यमन के पारंपरिक कपड़े हैं और पैरों में चप्पल दिखाई देती है. कई लड़ाकों के पास ऐसा कोई कॉम्बैट गियर नजर नहीं आता, जिसे आमतौर पर आधुनिक सैनिकों के साथ जोड़ा जाता है. इन तस्वीरों और वीडियो की वजह से हूती लड़ाकों की युद्ध शैली को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है.

जंग के मैदान में जाने से पहले सैनिक अपने साथ क्या-क्या रखते हैं?

जब सैनिक किसी सैन्य अभियान या युद्ध के लिए निकलते हैं, तो उनकी पोशाक से लेकर सुरक्षा उपकरण और जरूरी सामान तक, हर चीज का अपना महत्व होता है. आमतौर पर सैनिकों के कॉम्बैट गियर में कई तरह के जरूरी सामान शामिल होते हैं.

  • कैमोफ्लाज ड्रेस (Camouflage Dress): इसे जंगल ड्रेस या कॉम्बैट यूनिफॉर्म भी कहा जाता है. इसका रंग और पैटर्न आसपास के वातावरण के हिसाब से सैनिकों को कम दिखाई देने में मदद करता है. जंगल, रेगिस्तान या बर्फीले इलाकों के लिए अलग-अलग पैटर्न इस्तेमाल किए जा सकते हैं.
  • बैटल जैकेट/स्वेटर: ठंडे मौसम या बर्फीले इलाकों में कॉम्बैट ड्रेस के ऊपर गर्म जैकेट, स्वेटर या अन्य सुरक्षात्मक कपड़े पहने जाते हैं.
  • कॉम्बैट बूट्स (Combat Boots): मजबूत जूते पैरों को पथरीले रास्तों, कांटों और कठिन इलाकों से बचाने में मदद करते हैं. कई सैन्य बूट्स जलरोधी भी होते हैं.
  • बैलिस्टिक हेलमेट (Ballistic Helmet): यह सिर को गोलियों के छर्रों, मलबे और अन्य खतरों से सुरक्षा देने के लिए पहना जाता है.
  • बुलेटप्रूफ जैकेट (Bulletproof Vest): इसमें सुरक्षात्मक प्लेटें लगी हो सकती हैं, जो शरीर के महत्वपूर्ण हिस्सों को गोली और अन्य खतरों से बचाने में मदद करती हैं.
  • वेस्ट बेल्ट और पाउच: इनका इस्तेमाल जरूरी सामान को व्यवस्थित तरीके से रखने के लिए किया जाता है. इनमें पानी की बोतल, मेडिकल किट और मिशन के अनुसार अन्य जरूरी उपकरण रखे जा सकते हैं.

सऊदी अरब और हूतियों के बीच विवाद क्या है?

सऊदी अरब और हूती आंदोलन के बीच संघर्ष कई वर्षों पुराना है. यमन के संघर्ष में हूती विद्रोहियों का मुकाबला सऊदी अरब समर्थित यमनी सरकारी बलों से होता रहा है.

हाल के महीनों में दोनों पक्षों के बीच हमले बढ़ने का दावा किया गया है. कुछ दिन पहले हूतियों की ओर से सऊदी अरब की दिशा में ड्रोन भेजे जाने की बात सामने आई थी. बताया गया कि सऊदी डिफेंस सिस्टम ने ड्रोन को मार गिराया. हूतियों का कहना था कि इसका निशाना मक्का नहीं, बल्कि मक्का से दूर स्थित एक ऑयल रिफाइनरी थी.

बाब-अल-मंदब को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?

हूतियों की गतिविधियों में लाल सागर और बाब अल-मंदब क्षेत्र का भी खास महत्व है. बाब अल-मंदब लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है. इस इलाके में किसी भी तरह का सैन्य तनाव समुद्री व्यापार और तेल की आवाजाही को प्रभावित कर सकता है.

दावे के मुताबिक, हूती लड़ाकों ने बाब अल-मंदब क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत की है. यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित सरकारी बलों के बीच जुलाई से लड़ाई जारी रहने की बात कही गई है. हूतियों ने सऊदी जहाजों के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी की घोषणा करने और लाल सागर में सऊदी हितों को निशाना बनाने की कार्रवाई तेज करने का भी दावा किया है.

हाल के दिनों में हूतियों की पश्चिमी यमन की ओर बढ़त की भी बात सामने आई है. उनके मोखा बंदरगाह और मायून द्वीप पर कब्जे के बाद ग्रेटर हनीश और लेसर हनीश द्वीपों पर भी नियंत्रण हासिल करने का दावा किया गया है. ये दोनों द्वीप बाब अल-मंदब से करीब 160 किलोमीटर उत्तर में बताए जाते हैं.

सऊदी अरब के लिए बाब अल-मंदब क्यों अहम?

बाब अल-मंदब लाल सागर के जरिए होने वाली समुद्री आवाजाही का अहम रास्ता है. इस मार्ग से तेल और अन्य सामान की आवाजाही होती है. ऐसे में इस क्षेत्र में हूतियों की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर चिंता जताई जा रही है.

दूसरी ओर, फारस की खाड़ी में स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य भी वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. मौजूदा क्षेत्रीय संघर्ष में होर्मुज के जरिए होने वाली आवाजाही प्रभावित होने की स्थिति में लाल सागर और बाब अल-मंदब जैसे वैकल्पिक समुद्री मार्गों का महत्व और बढ़ जाता है.

यही वजह है कि सऊदी अरब के लिए इन दोनों महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों की सुरक्षा क्षेत्रीय संघर्ष के साथ-साथ व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति से भी जुड़ी हुई है.

हूतियों का सऊदी अरब पर क्या आरोप है?

हूती संगठन का आरोप है कि यमन में उसके ठिकानों पर सऊदी अरब की ओर से लगातार हवाई हमले किए जा रहे हैं. हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने भी सऊदी हमलों के जवाब में मिसाइल और ड्रोन हमले किए जाने की बात कही है.

दूसरी तरफ, सऊदी अरब के समर्थन वाले यमनी सरकारी बल हूती लड़ाकों के खिलाफ सैन्य अभियान चला रहे हैं. इसी टकराव के चलते यमन के दक्षिणी और पश्चिमी इलाकों में संघर्ष जारी रहने की बात कही जा रही है.

इस पूरे घटनाक्रम के बीच चप्पल, पारंपरिक कपड़ों और हाथ में बंदूक लिए दिखाई देने वाले हूती लड़ाकों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं. हालांकि, वायरल वीडियो में दिखाई देने वाली पोशाक से अकेले हूती आंदोलन की पूरी सैन्य क्षमता या उसकी युद्ध रणनीति का आकलन नहीं किया जा सकता.

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