Ganesh Chaturthi 2026: गणपति को भोग लगाने के बाद भूलकर भी न करें ये काम, नाराज हो सकते हैं बप्पा
गणपति बप्पा को भोग जरूर चढ़ाना चाहिए. हालांकि, भोग चढ़ाने के तुरंत बाद प्रसाद को इधर-उधर रखना शुभ नहीं माना जाता है. साथ ही, पूजा वाली जगह को खाली न छोड़ें.
गणेश चतुर्थी पर गणपति बप्पा को पूजा के बाद भोग लगाना खास माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि भोग अर्पित करने के बाद कुछ देर पूजा स्थल पर शांति बनाए रखनी चाहिए और भगवान को चढ़ाए गए प्रसाद का सम्मान करना चाहिए. इसी वजह से भोग लगाने के तुरंत बाद कुछ काम करने से बचने की सलाह दी जाती है.
मान्यताओं के अनुसार, भोग लगाते ही प्रसाद को तुरंत हटाना और पूजा की जगह छोड़कर चले जाना सही नहीं माना जाता है. भोग अर्पित करने के बाद कुछ समय श्रद्धा से प्रार्थना या मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है.
भोग लगाते ही प्रसाद न हटाएं
मान्यता है कि गणपति को भोग अर्पित करने के तुरंत बाद प्रसाद की थाली को वहां से हटा देना ठीक नहीं माना जाता. कुछ समय तक भोग बप्पा के सामने रखा रहने दें और श्रद्धा से उनका ध्यान करें. इसके बाद भगवान को चढ़ाए गए भोजन को प्रसाद मानकर परिवार के सदस्यों में बांट सकते हैं. धार्मिक परंपरा में प्रसाद को सम्मान के साथ ग्रहण करने और उसका अनादर न करने की बात कही गई है.
भोग के दौरान पूजा की जगह न छोड़ें
बप्पा को भोग अर्पित करते समय पूजा की जगह अकेली छोड़ने से बचना चाहिए. इस दौरान शांत माहौल में बैठकर बप्पा का ध्यान करना या उनके मंत्र का जाप करना अच्छा माना जाता है. भोग लगाते समय ज्यादा शोर करना, जोर-जोर से बातें करना या मजाक करने से भी बचने की सलाह दी जाती है.
प्रसाद को फेंकना नहीं चाहिए
गणेश को अर्पित किया गया भोजन प्रसाद माना जाता है, इसलिए इसे बेकार में फेंकने से बचना चाहिए. धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रसाद का सम्मान करना जरूरी है. अगर भोग ज्यादा बन गया है तो उसे घरवालों के साथ बांटें या आसपास के लोगों और जरूरतमंदों को दे सकते हैं, ताकि प्रसाद की बर्बादी न हो.
पूजा की चीजें तुरंत इधर-उधर न करें
भोग अर्पित करने के बाद पूजा की चीजों को तुरंत समेटने की जल्दबाजी न करें. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा पूरी होने के बाद ही थाली, फूल, दूर्वा और दीपक को सही जगह रखना चाहिए. गणपति को चढ़ाए गए फूल और दूर्वा को पैरों के नीचे आने या इधर-उधर बिखरने से भी बचाना चाहिए.
नोट: यह जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित है. स्टेट मिरर हिंदी इसकी पूर्ण सत्यता या प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है.




