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100 साल का रिश्ता, अब विदाई की नौबत: केन्या ने टाटा केमिकल्स से क्यों कहा- समेटिए बोरिया-बिस्तर?

Kenya में Tata Chemicals पर संकट, soda ash mining को लेकर विवाद बढ़ा. जानिए royalties, mining rights, local processing और value addition पर सरकार की आपत्ति.

President William Ruto Tata Chemicals Kenya
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करीब एक सदी से केन्या में सोडा ऐश का खनन कर रही टाटा केमिकल्स के सामने अब अपना कारोबार समेटने का संकट खड़ा हो गया है. केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो ने 3 सितंबर 2026 को भारतीय कंपनी की केन्याई यूनिट को देश से जाने के लिए कहा. उनका आरोप है कि टाटा केमिकल्स ने लंबे समय तक केन्या के नेचुरल रिसोर्स से सोडा ऐश निकाला, लेकिन उसे देश के भीतर प्रोसेस कर तैयार उत्पाद बनाने और स्थानीय स्तर पर वैल्यू एडिशन करने के लिए पर्याप्त काम नहीं किया.

दक्षिणी केन्या के मगाडी इलाके के दौरे के दौरान रुटो ने कहा कि टाटा के पास करीब 100 साल से माइनिंग के अधिकार हैं, लेकिन इसके बावजूद काजियाडो काउंटी में पर्याप्त औद्योगिक गतिविधि विकसित नहीं की गई. उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी केन्या के संसाधन को भारत और दूसरे देशों में ले जाती है.

टाटा कंपनी से क्यों नाराज हैं रुटो?

रुटो ने कहा कि अब केन्या इस काम को संभालने के लिए नए निवेशकों की तलाश करेगा. उन्होंने टाटा केमिकल्स की यूनिट से साफ तौर पर कहा कि वह अपना "बोरिया-बिस्तर समेटकर जाए."

राष्ट्रपति ने कहा, "टाटा के पास 100 साल से माइनिंग के अधिकार हैं, फिर भी उसने काजियाडो में कुछ भी नहीं बनाया है." उनके मुताबिक, कंपनी केन्या के संसाधन को भारत और दूसरी जगहों पर ले जाती है.

रुटो ने कहा कि चाहे कुछ भी हो जाए, क्योंकि कंपनी जरूरी काम करने में नाकाम रही है, इसलिए उन्होंने उसे वहां से जाने के लिए कहा है. इसी दौरान उन्होंने सवाल उठाया, "क्या हम दूसरे लोगों के गुलाम हैं?"

केन्या अब क्या करना चाहता है?

केन्या सरकार का जोर केवल खनन पर नहीं, बल्कि खनिज से देश के भीतर तैयार उत्पाद बनाने पर है. रुटो के मुताबिक, सरकार दो नई कंपनियों को लाने की योजना बना रही है.

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से एक कंपनी खनिज को प्रोसेस करके ग्लास बनाएगी, जबकि दूसरी काजियाडो में केमिकल्स का उत्पादन करेगी.

रुटो ने कहा कि सरकार चाहती है कि काजियाडो में एक बड़ी ग्लास कंपनी स्थापित हो और दूसरी बड़ी कंपनी वहां केमिकल्स बनाए. यानी सरकार की प्राथमिकता कच्चे संसाधन के निर्यात के बजाय उसी संसाधन से देश में ज्यादा मूल्य वाले उत्पाद तैयार करना है.

काजियाडो के गवर्नर जोसेफ ओले लेंकु ने भी इसी रुख को दोहराया. ब्लूमबर्ग के अनुसार, एक रैली में उन्होंने कहा कि जिन्हें संसाधन निकालने का लाइसेंस दिया जाएगा, उन्हें केन्या में ही ग्लास बनाने के लिए बड़ी प्रोसेसिंग फैसिलिटी लगानी होगी. साथ ही, उन्हें देश में केमिकल्स बनाने के लिए भी बड़ी फैक्ट्री स्थापित करनी होगी.

विवाद की जड़ में क्या है?

केन्या और टाटा केमिकल्स के बीच विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा लोकल प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन है. केन्या प्राकृतिक सोडा ऐश का उत्पादन करता है, जिसे सोडियम कार्बोनेट भी कहा जाता है. इसका इस्तेमाल ग्लास और सफाई से जुड़े उत्पादों के निर्माण में बड़े पैमाने पर होता है. इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों में भी सोडा ऐश का इस्तेमाल होता है.

केन्या का आरोप है कि टाटा केमिकल्स ने देश में इस संसाधन को प्रोसेस करके ज्यादा मूल्य वाले उत्पाद बनाने के बजाय मुख्य रूप से सोडा ऐश का एक्सपोर्ट किया. सरकार का कहना है कि इतने लंबे समय से संसाधन निकालने के बावजूद स्थानीय स्तर पर पर्याप्त मैन्युफैक्चरिंग और वैल्यू एडिशन नहीं हुआ.

काजियाडो के गवर्नर जोसेफ ओले लेंकु ने भी कहा कि भविष्य में संसाधन निकालने का लाइसेंस पाने वाली कंपनियों के लिए स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट लगाना जरूरी होना चाहिए.

1911 से चल रहा है केन्या का सोडा ऐश कारोबार

केन्या में सोडा ऐश का उत्पादन 1911 से हो रहा है. देश प्राकृतिक सोडा ऐश के उत्पादन में दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल है. अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे यानी US Geological Survey के अनुसार, केन्या प्राकृतिक सोडा ऐश का दुनिया का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक देश है. हालांकि वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी करीब 1% है.

रॉयटर्स के मुताबिक, काजियाडो काउंटी में स्थित लेक मगाडी केन्या के सोडा ऐश उद्योग का केंद्र है. टाटा केमिकल्स की यूनिट कई दशकों से इसी इलाके में खनिज निकालने का काम कर रही है. टाटा केमिकल्स ने वर्ष 2005 में Brunner Mond Limited से Magadi operation खरीदा था.

हालांकि अब इस ऑपरेशन के अधिकार और कंपनी की कानूनी स्थिति को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है. काजियाडो के गवर्नर जोसेफ ओले लेंकु का कहना है कि माइनिंग के अधिकार 2023 में ही खत्म हो गए थे.

टाटा केमिकल्स ने आरोपों पर क्या कहा?

केन्या सरकार के आरोपों के बीच टाटा केमिकल्स ने नियमों का पालन न करने की बात को खारिज किया है. कंपनी ने कहा कि वह सभी जरूरी नियमों का पूरी तरह पालन कर रही है और नियमों के अनुपालन के सबसे ऊंचे मानकों को बनाए रखने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों के साथ काम करना जारी रखेगी.

टाटा केमिकल्स के मुताबिक, उसकी केन्याई यूनिट Tata Chemicals Magadi Limited (TCML) ने मंत्रालय की ओर से उठाए गए मुद्दों पर विस्तृत जवाब दिया है. कंपनी ने लागू नियमों की जरूरतों को पूरा करने से जुड़ी जानकारी भी सरकार को उपलब्ध कराई है. कंपनी ने कहा कि वह अब मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी की समीक्षा और उसके अगले निर्देशों का इंतजार कर रही है.

टाटा केमिकल्स ने यह भी कहा कि वह बाकी बचे मुद्दों को सुलझाने के लिए उचित कानूनी और नियामकीय तरीकों के तहत सरकार के साथ रचनात्मक बातचीत करने के लिए प्रतिबद्ध है.

कामकाज पहले ही हो चुका है बंद

यह विवाद सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं है. करीब पांच हफ्ते पहले केन्या के माइनिंग मंत्रालय ने टाटा केमिकल्स मगाडी लिमिटेड को अपना कामकाज रोकने का आदेश दिया था. मंत्रालय ने इसके पीछे रॉयल्टी का भुगतान न करने और नियमों से जुड़े दूसरे मुद्दों का हवाला दिया था.

केन्या के माइनिंग कैबिनेट सेक्रेटरी हसन जोहो ने कहा था कि टाटा की केन्याई यूनिट को ऐसे दस्तावेज देने होंगे, जिनसे यह साबित हो सके कि उत्पादन दोबारा शुरू करने से पहले कंपनी ने अपनी कानूनी जिम्मेदारियां पूरी कर दी हैं और बकाया देनदारियों का निपटारा कर दिया है.

सरकार ने टाटा की यूनिट को लेकर कई अन्य चिंताएं भी जताई हैं. इनमें स्थानीय स्तर पर वैल्यू एडिशन और स्किल-ट्रांसफर की योजनाओं को लागू न करना, केन्याई नागरिकों के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध न कराना, एक्सपोर्ट रिपोर्टिंग में समस्याएं, स्थानीय खरीद में कमियां और पर्यावरण से जुड़े नियमों के पालन के मुद्दे शामिल हैं.

विवाद का असर टाटा केमिकल्स के शेयर पर भी

केन्या में बढ़ते विवाद का असर टाटा केमिकल्स के शेयर पर भी दिखाई दिया. रुटो के कंपनी को देश में कामकाज रोकने के निर्देश के बाद शुक्रवार को BSE पर टाटा केमिकल्स के शेयर 2.7% गिरकर ₹624.85 पर आ गए.

मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, शेयर पर पहले से भी दबाव बना हुआ है. पिछले एक महीने में इसमें करीब 6%, तीन महीने में 12.5%, छह महीने में 11% और पिछले एक साल में करीब 33% की गिरावट आ चुकी है.

स्टॉक ने पिछले साल सितंबर में ₹1,026 का 52-हफ्ते का उच्चतम स्तर छुआ था, जबकि मार्च 2026 में ₹581.30 का 52-हफ्ते का निचला स्तर देखा गया.

इस मामले में अब आगे क्या?

फिलहाल विवाद का अगला चरण केन्या सरकार और टाटा केमिकल्स के बीच बातचीत और नियामकीय प्रक्रिया पर निर्भर करेगा. केन्या सरकार स्थानीय प्रोसेसिंग, रोजगार, स्किल ट्रांसफर और वैल्यू एडिशन को लेकर अपनी शर्तों पर जोर दे रही है, जबकि टाटा केमिकल्स का कहना है कि उसने मंत्रालय द्वारा उठाए गए मामलों पर विस्तृत जवाब दे दिया है और वह सरकार की समीक्षा तथा अगले निर्देशों का इंतजार कर रही है.

100 साल पुराने इस कारोबारी रिश्ते में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या टाटा केमिकल्स केन्या में अपनी मौजूदगी को नए नियमों और स्थानीय वैल्यू एडिशन की शर्तों के साथ आगे बढ़ाएगी, या फिर केन्या वाकई इसके लिए नए निवेशकों का रास्ता खोलेगा.

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