न नौकरी, न बैंक अकाउंट और न सेविंग्स... फिर भी कैसे सालों से जी रही है ये महिला, इसलिए लिया था इतना बड़ा फैसला
ऑस्ट्रेलिया की Jo Nemeth ने करीब 10 साल पहले पैसे और नौकरी वाली जिंदगी से दूरी बना ली. आज वह बिना बैंक अकाउंट, सेविंग्स और अपनी संपत्ति के रह रही हैं. जरूरतें पूरी करने के लिए वह बागवानी, चीजों की अदला-बदली और आसपास के लोगों की मदद का सहारा लेती हैं.
2015 में ऑस्ट्रेलिया की Jo Nemeth ने अपनी नौकरी छोड़कर एक ऐसा फैसला लिया, जिसे सुनकर शायद कई लोग हैरान रह जाएं. उन्होंने अपना बैंक अकाउंट बंद कर दिया और उनके पास जितने पैसे थे, वे अपनी बेटी को दे दिए. इसके बाद उन्होंने बिना नियमित कमाई और बचत के जिंदगी जीने का तरीका अपनाया.
आज करीब 10 साल बाद भी Jo इसी तरह रह रही हैं. न उनके पास अपना घर है, न सेविंग्स और न ही इमरजेंसी के लिए पैसे. रोज की जरूरतों के लिए वह बागवानी, चीजों की अदला-बदली और लोगों की मदद पर निर्भर रहती हैं. खास बात यह है कि Jo का कहना है कि वह अब पहले से ज्यादा सुरक्षित महसूस करती हैं.
कब लिया जिंदगी बदलने वाला फैसला?
न्यू साउथ वेल्स की रहने वाली Jo Nemeth ने 2015 में अपनी कम्युनिटी डेवलपमेंट की नौकरी छोड़ दी. बढ़ते आर्थिक दबाव और लगातार बढ़ती उपभोक्तावादी सोच को लेकर उनके मन में कई सवाल थे. उन्हें लगने लगा था कि ज्यादा कमाने और ज्यादा खर्च करने की दौड़ से बाहर निकलकर भी जिंदगी जीने का कोई रास्ता हो सकता है. इसी सोच के साथ उन्होंने अपने पास मौजूद पैसे अपनी बेटी Amy को दे दिए और अपना बैंक अकाउंट बंद कर दिया. इसके बाद उन्होंने ऐसी जिंदगी शुरू की, जिसमें रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए पैसे पर निर्भरता बेहद कम हो.
कैसे चलती है जिंदगी?
आज 56 साल की Jo के पास अपना घर, जमीन-जायदाद, सेविंग्स या इमरजेंसी कैश नहीं है. वह सरकारी वेलफेयर भुगतान पर भी निर्भर नहीं हैं. इसके बावजूद उन्होंने इस जीवनशैली को एक दशक से ज्यादा समय तक जारी रखा है. उनकी जिंदगी का आधार कम्युनिटी और आपसी सहयोग है. जरूरत की चीजों के लिए वह बार्टर यानी सामान या सेवाओं के बदले सामान या मदद लेने का तरीका अपनाती हैं. खेती-बागवानी के जरिए कुछ जरूरतें पूरी होती हैं, जबकि साझा रहने की व्यवस्था भी उनकी जीवनशैली का हिस्सा रही है.
क्यों कम्युनिटी पर ज्यादा भरोस?
Jo का मानना है कि आर्थिक सुरक्षा सिर्फ बैंक बैलेंस से तय नहीं होती. उनके मुताबिक, इस प्रयोग ने उन्हें लोगों पर भरोसा करना और जरूरत के समय समुदाय से मदद लेना सिखाया है. रिपोर्टों के अनुसार, वह अब खुद को उस समय की तुलना में ज्यादा सुरक्षित महसूस करती हैं, जब उनके पास नौकरी और नियमित वेतन था. उनकी कहानी इस सवाल को सामने रखती है कि क्या आधुनिक जिंदगी में खुशहाल और सुरक्षित रहने के लिए ज्यादा पैसा होना जरूरी है? Jo Nemeth का जीवन इसका कोई एक जवाब नहीं देता, लेकिन यह जरूर दिखाता है कि जरूरतों को कम करके और साझा संसाधनों पर भरोसा करके जीवन का एक अलग मॉडल भी संभव है.




