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नोबेल शांति पुरस्कार 2024 का एलान, जापानी संगठन निहोन हिडांक्यो अपने इन कामों के लिए बना हकदार

Nobel Peace Prize 2024: जापानी संगठन निहोन हिडांक्यो को परमाणु हथियार मुक्त विश्व बनाने के प्रयासों के लिए 2024 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया.

नोबेल शांति पुरस्कार 2024 का एलान, जापानी संगठन निहोन हिडांक्यो अपने इन कामों के लिए बना हकदार
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( Image Source:  X/NobelPrize )
सचिन सिंह
Edited By: सचिन सिंह

Updated on: 27 Dec 2025 8:25 PM IST

Nobel Peace Prize 2024: नोबेल शांति पुरस्कार 2024 का एलान कर दिया गया है. ये पुरस्कार निहोन हिडांक्यो को दिया गया है, जो एक जापानी संगठन है. ये हिरोशिमा और नागासाकी के परमाणु बम विस्फोटों में जीवित बचे लोगों को रिप्रजेंट करता है, जिसे हिबाकुशा के नाम से जाना जाता है. इस जमीनी स्तर के आंदोलन को परमाणु हथियारों से मुक्त दुनिया बनाने के लिए किए गए प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया.

1956 में स्थापित निहोन हिडांक्यो उन बचे हुए लोगों से बना है जिन्होंने लंबे समय से हथियार का विरोध करते हुए परमाणु हथियारों को पूरी तरह से हटाने के लिए अभियान चलाया है. 1945 में बमबारी के दौरान उन्होंने इसका अनुभव किया है. इस भयावहता के अपने प्रत्यक्ष अनुभवों के माध्यम से समूह ने परमाणु हथियारों का मानव पर पड़ने वाले गहरे रभाव को उजागर करने का प्रयास किया है.

नोबेल समिति ने की तारीफ

नोबेल समिति ने परमाणु हथियारों के खिलाफ संगठन के काम की तारीफ की और उसे कायम रखने के लिए निहोन हिडांक्यो के अथक प्रयासों की प्रशंसा की, समिति ने कहा कि संगठन ने ऐसे हथियारों के कारण होने वाले अकल्पनीय दर्द और पीड़ा की एक अनूठी और प्रत्यक्ष अहसास को विश्व भर के सामने रखकर इससे दूर होने का बेहतर संदेश दिया है. समिति ने अपनी घोषणा में कहा, 'हिबाकुशा हमें और दुनिया भर को इस बारे में सोचने में मदद करता है.'

80 साल बाद भी दुनिया पर बना है खतरा

परमाणु बम हमले के लगभग 80 साल बीत जाने के बावजूद परमाणु हथियार वैश्विक खतरा बना हुआ है. यह पुरस्कार वैश्विक शांति के लिए बढ़ते खतरों की भी एक कड़ी याद दिलाता है. समिति ने कहा कि परमाणु हथियारों और भी डेवलप किया जा रहा है. इससे नए खतरों के सामने आने के कारण उनके उपयोग के खिलाफ मानदंड दबाव में हैं.

करीब 1 लाख से अधिक लोग मारे गए थे

अगले साल यानी 2025 में हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए जाने के 80 साल पूरे हो जाएंगे, जिसमें लगभग 120,000 लोग तत्काल मारे गए थे. उसके बाद के सालों में हज़ारों लोग चोटों और विकिरण के कारण दम तोड़ दिया था. इसके बाद इसे बंद करने के लिए कई संगठन सामने आए, लेकिन सबसे सक्रिय निहोन हिडांक्यो ही रहा, जो पिछले कई सालों से काम कर रहा है.

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