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ट्रंप की लताड़ या फिर कुछ और, आखिर लेबनान के साथ सीजफायर के लिए कैसे मान गया इजराइल?

इजरायल और लेबनान के बीच अमेरिकी मध्यस्थता में युद्धविराम समझौते को आगे बढ़ाने पर सहमति बन गई है. माना जा रहा है कि इसके पीछे वजह हाल ही में ट्रंप के जरिए नेतन्याहू को लगाई लताड़ है.

ट्रंप की लताड़ या फिर कुछ और, आखिर लेबनान के साथ सीजफायर के लिए कैसे मान गया इजराइल?
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Israel-Lebanon Ceasefire: इजरायल और लेबनान ने मंगलवार को युद्धविराम समझौते को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई. दोनों देशों के बीच यह सहमति अमेरिका की मध्यस्थता में हुई वार्ता के चौथे दौर के बाद बनी है. इस समझौते को क्षेत्र में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

ये सीजफायर ऐसे वक्त में भी हुआ है, जब ट्रंप ने कुछ दिनों पहले नेतन्याहू को फोन पर लताड़ लगाई थी और उन्हें कहा था कि उनकी हरकत की वजह से पूरी दुनिया उन से नफरत करती है. ट्रंप का मानना था कि नेतन्याहू की जरिए की जा रही कार्रवाई उसे अलग-थलग कर रही है और ईरान के साथ शांति वार्ता में बाधा बन रही है.

क्या बोले थे ट्रंप?

ट्रंप ने नेतन्याहू से कहा था, "You are fu***** crazy. अगर मैं नहीं होता तो तुम जेल में होते. मैं तुम्हारी जान बचा रहा हूं. अब हर कोई तुमसे नफरत करता है. इसकी वजह से हर कोई इजरायल से भी नफरत करता है." वहीं, एक दूसरे सूत्र के मुताबिक, फोन कॉल के दौरान ट्रंप काफी गुस्से में थे और एक समय उन्होंने चिल्लाते हुए कहा, "आखिर तुम कर क्या रहे हो?" ऐसे में माना जा रहा है, लगातार अमेरिका के जरिए बनते प्रेशर की वजह से नेतन्याहू ने यह कदम उठाया है.

क्या हुआ इजराइल और लेबनान के बीच समझौता?

  • समझौते के तहत लेबनान में कई एक्सपेरीमेंटल सेफ्टी ज़ोन स्थापित किए जाएंगे. इन इलाकों को विशेष सुरक्षा व्यवस्था के तहत रखा जाएगा और यहां हिजबुल्ला के लड़ाकों की मौजूदगी पूरी तरह प्रतिबंधित होगी.
  • समझौते के अनुसार हिजबुल्ला को पूरी तरह से गोलीबारी बंद करनी होगी.
  • इसके साथ ही लिटानी नदी के दक्षिण में स्थित सभी क्षेत्रों से इजरायली कर्मियों और हथियारों की वापसी सुनिश्चित की जाएगी.
  • इन सुरक्षा क्षेत्रों की जिम्मेदारी पूरी तरह लेबनानी सेना के हाथ में होगी.
  • सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सभी फैसले और नियंत्रण सेना के पास रहेगा.
  • साथ ही इन क्षेत्रों में हिजबुल्ला की किसी भी प्रकार की गतिविधि पर सख्त रोक लागू रहेगी.

अमेरिका के विदेश विभाग ने क्या कहा?

अमेरिकी विदेश विभाग में हुई वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों पक्षों ने कहा कि यह समझौता व्यापक शांति और सुरक्षा व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है. बयान में उम्मीद जताई गई कि इससे क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूती मिलेगी.

संयुक्त बयान में यह भी साफ किया गया कि इजरायल और लेबनान के भविष्य के संबंध केवल दोनों देशों की सरकारों के जरिए तय किए जाएंगे. किसी भी बाहरी राज्य या गैर-राज्य संगठन द्वारा लेबनान के भविष्य को प्रभावित करने की कोशिशों को अस्वीकार किया गया है. विश्लेषकों का मानना है कि यह टिप्पणी अप्रत्यक्ष रूप से ईरान की ओर संकेत करती है, जिसे हिजबुल्ला का प्रमुख समर्थक माना जाता है.

क्या इस बातचीत में हिज़बुल्लाह था शामिल?

गौरतलब है कि इस वार्ता प्रक्रिया में हिजबुल्ला शामिल नहीं था. फिलहाल सुरक्षा क्षेत्रों को लागू करने की विस्तृत योजना सार्वजनिक नहीं की गई है. हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि इन इलाकों में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी लेबनानी सेना की होगी.

अमेरिकी मध्यस्थता में हुई यह बातचीत पिछले कई महीनों से जारी तनाव को कम करने की दिशा में एक अहम पहल मानी जा रही है. हालांकि क्षेत्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि इस समझौते की सफलता काफी हद तक हिजबुल्ला की भविष्य की भूमिका और ईरान के रुख पर निर्भर करेगी.

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