क्या इस देश ने S@# को बना दिया खेल? चैंपियनशिप होस्ट करने के वायरल दावे में कितनी सच्चाई?
क्या सचमुच किसी देश ने S@# को आधिकारिक खेल घोषित कर दिया और उसकी अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप होस्ट करने की तैयारी कर ली? सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस दावे ने लोगों को चौंका दिया. लेकिन इस सनसनीखेज खबर के पीछे की हकीकत क्या है, यही सबसे बड़ा सवाल है.
क्रिकेट, स्विमिंग, फुटबॉल जैसे खेलों की तो दुनिया आदी है. यहां तक कि अजीबोगरीब कॉम्पिटिशन भी सुर्खियां बटोर लेती हैं. लेकिन ज़रा सोचिए, अगर कोई देश अचानक यह ऐलान कर दे कि अब सेक्स भी स्पोर्ट है और उस पर इंटरनेशनल चैंपियनशिप होस्ट की जाएगी, तो क्या होगा? सोशल मीडिया पर यही दावा आग की तरह फैल गया और लोगों के मन में सवालों का तूफान खड़ा हो गया.
बताया गया कि इस खेल में पार्टिसिपेंट अलग-अलग “कैटेगरी” में हिस्सा लेंगे, जज और ऑडियंस नंंबर देंगे और कई दिनों तक मुकाबला चलेगा. चलिए ऐसे में जानते हैं आखिर कौन-सा है ये देश और क्या है इस वायरल दावे की सच्चाई.
क्या है सेक्स चैंपियनशिप?
जून 2023 में अचानक से खबरें आने लगी कि स्वीडन ने सेक्स को ऑफिशियल स्पोर्ट्स का हिस्सा बना दिया है और यूरोप की पहली “सेक्स चैंपियनशिप” होस्ट करने जा रहा है. खबर में दावा किया गया कि गोथेनबर्ग में कई दिनों यह खेल चलेगा.
खेल में क्या-क्या होगा?
खबर में कहा गया था कि गोथेनबर्ग में कई दिनों तक एक प्रतियोगिता होगी. इसमें लोग अलग-अलग कैटेगरी में भाग लेंगे, जैसे सिडक्शन, फोरप्ले, ओरल सेक्स, एंड्योरेंस, आर्टिस्टिक एग्जीक्यूशन शामिल है.
किसने की मांग?
असल में हुआ यह था कि एक प्राइवेट ऑर्गेनाइजेशन ने एप्लीकेशन देकर मांग की कि सेक्स को खेल के रूप में मान्यता दी जाए. लेकिन जब इस एप्लीकेशन की जांच की गई, तो वह तय नियमों और शर्तों पर खरा नहीं उतरा, इसलिए उसे खारिज कर दिया गया. संस्था के प्रवक्ता ने साफ कहा कि सेक्स को आधिकारिक खेल घोषित किए जाने की खबरें पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं. ऐसी कोई मंजूरी नहीं दी गई है.
क्या सरकार ने दी मंजूरी?
दरअसल स्वीडन की स्पोर्ट्स ऑर्गेनाइजेशन जो तय करती है कि कौन-सा खेल आधिकारिक मान्यता पाएगा ने ऐसे किसी भी फैसले से साफ इनकार किया है.
कैसे फैली गलतफहमी?
कई विदेशी मीडिया संस्थानों ने इस प्राइवेट ऑर्गेनाइजेशन की प्रेस रिलीज और प्रमोशन कंटेंट को ही सच मान लिया. बिना ठीक से जांच-पड़ताल किए मीडिया आउटलेट्स ने खबरें पब्लिश की. इसके बाद सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से फैल गया और लोगों ने इसे सच समझ लिया. बाद में अंतरराष्ट्रीय फैक्ट-चेक करने वाली संस्थाओं और स्वीडन के स्थानीय मीडिया ने जांच की. तब साफ हुआ कि सेक्स को खेल का दर्जा दिए जाने का दावा पूरी तरह गलत था.




