Iran War: एक मौत से नहीं रुकी जंग, दूसरी ने बढ़ा दी आग; लारेजानी के मारे जाने से क्यों गहरा सकता है संकट?
खामेनेई की मौत के बाद भी ईरान की सत्ता संरचना कायम रही, लेकिन लारीजानी की हत्या ने सिस्टम के संचालन को झटका दिया है. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह घटना युद्ध को और लंबा और जटिल बना सकती है.
ईरान-इजरायल तनाव के बीच अली लारीजानी की हत्या को कई विश्लेषक गेम-चेंजर मान रहे हैं. पहली नजर में यह अजीब लग सकता है क्योंकि अली खामेनेई दशकों तक सत्ता का चेहरा रहे. लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, लारीजानी की भूमिका सिस्टम को चलाने वाले शख्स थे. यानी वे सिर्फ नेता नहीं, बल्कि पूरी रणनीतिक मशीनरी के संचालक थे.
खामेनेई की मौत के बाद ईरान क्यों नहीं टूटा?
28 फरवरी को हुए हमले में खामेनेई की मौत को “डिकैपिटेशन स्ट्राइक” माना गया था. इसके बावजूद ईरान की सत्ता संरचना बिखरी नहीं. संस्थागत ढांचे की मजबूती के कारण तुरंत वैकल्पिक नेतृत्व सामने आ गया और सैन्य अभियान जारी रहे. इससे यह साफ हुआ कि ईरान की ताकत किसी एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि कई स्तरों वाली सत्ता व्यवस्था पर टिकी है.
अली लारीजानी की भूमिका इतनी अलग और अहम क्यों थी?
अली लारीजानी को पर्दे के पीछे की असली ताकत माना जाता था. वे सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख के तौर पर राजनीतिक नेतृत्व, सेना और खुफिया एजेंसियों के बीच सेतु थे. उनकी भूमिका रणनीति बनाने से लेकर उसे जमीन पर लागू कराने तक फैली हुई थी. यही कारण है कि उनकी गैर-मौजूदगी सीधे सिस्टम की कार्यक्षमता पर असर डालती है.
क्या लारीजानी की मौत से ईरान के अंदर तालमेल टूट सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि लारीजानी की हत्या से सत्ता के अलग-अलग केंद्रों के बीच तालमेल कमजोर पड़ सकता है. युद्ध के समय तेजी से फैसले लेने की जरूरत होती है, और ऐसे में समन्वय की कमी गलत फैसलों का जोखिम बढ़ा देती है. यही वह जगह है जहां लारीजानी की कमी सबसे ज्यादा महसूस होगी.
क्या यह घटना युद्ध को और लंबा खींच सकती है?
संभावना यही जताई जा रही है कि यह हत्या युद्ध को और जटिल और लंबा बना सकती है. एक मजबूत समन्वयक के बिना अलग-अलग सैन्य और राजनीतिक इकाइयाँ अपने-अपने तरीके से प्रतिक्रिया दे सकती हैं, जिससे टकराव लगातार बढ़ता रहेगा और उसे नियंत्रित करना मुश्किल हो जाएगा.
क्या कट्टरपंथी ताकतें अब और मजबूत होंगी?
लारीजानी को एक संतुलन बनाने वाले नेता के रूप में देखा जाता था. उनकी अनुपस्थिति में सत्ता का झुकाव कट्टरपंथी गुटों की ओर बढ़ सकता है. इससे बातचीत और समझौते की संभावनाएं कमजोर पड़ेंगी और संघर्ष का रास्ता और कठोर हो सकता है.
क्या बातचीत और कूटनीति की राह अब और मुश्किल हो जाएगी?
पर्दे के पीछे होने वाली कूटनीति में लारीजानी जैसे नेताओं की अहम भूमिका होती है. उनके न रहने से बैक-चैनल बातचीत की संभावनाएं घट सकती हैं. इससे युद्ध को शांतिपूर्ण तरीके से खत्म करने के विकल्प सीमित हो जाते हैं.
क्या ईरान की संस्थाएं इस झटके को संभाल पाएंगी?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि देश की राजनीतिक संरचना मजबूत है और किसी एक व्यक्ति की अनुपस्थिति से सिस्टम नहीं टूटेगा. लेकिन चुनौती यह है कि बिना केंद्रीय समन्वय के यह सिस्टम कितनी प्रभावी तरीके से काम कर पाएगा.
क्या यह मिडिल ईस्ट में “अनकंट्रोल्ड वॉर” का संकेत है?
लारीजानी की हत्या के बाद हालात ज्यादा अप्रत्याशित हो सकते हैं. अगर खामेनेई की मौत प्रतीकात्मक झटका थी, तो लारीजानी की हत्या ऑपरेशनल झटका है. ऐसे में यह संघर्ष और ज्यादा बिखरा हुआ, अराजक और लंबा हो सकता है.
हत्या को क्यों कहा जा रहा ‘तंत्रिका तंत्र पर हमला?
सीधे शब्दों में समझें तो खामेनेई सत्ता का चेहरा थे, जबकि लारीजानी उस सत्ता को चलाने वाला तंत्र. उनकी हत्या का मतलब सिर्फ नेतृत्व को नहीं, बल्कि फैसले लेने और उन्हें लागू करने की पूरी प्रक्रिया को बाधित करना है और यही इस युद्ध को लंबा और जटिल बना सकता है.




