Iran War: अहम मोड़ पर 39 दिन की जंग! क्या होगी Full Scale War या Diplomacy बचाएगी दुनिया?
ईरान युद्ध संकट में बड़ा सवाल - क्या यह स्थिति full-scale war में बदलेगी या diplomacy एक बार फिर दुनिया को बड़े टकराव से बचा लेगी? Middle East में बढ़ता तनाव वैश्विक राजनीति को प्रभावित कर रहा है.
मिडिल ईस्ट वॉर की वजह से एक बार फिर तनाव चरम पर है. जहां ईरान से जुड़ी घटनाओं ने वैश्विक राजनीति को हिला दिया है. सवाल यह है कि क्या यह तनाव धीरे-धीरे एक फुल स्केल वॉर में बदल सकता है या फिर आखिरी समय पर कूटनीति (Diplomacy) एक बार फिर दुनिया को बड़े युद्ध से बचा लेगी. इस मसले पर इंटरनेशनल रिलेशंस के जानकार ब्रह्मदीप अलूने का कहना है कि इस युद्ध में शामिल ईरान, इजरायल और अमेरिका के लिए जंग अस्तित्व का सवाल है. इसलिए, जंग तत्काल समाप्त होने की संभावना कम है.
विदेश मामलों के जानकार ब्रह्मदीप अलूने का कहना है कि अब ईरान, अमेरिका इजरायल युद्ध का फुल स्कूल में तब्दील होने की संभावना ज्यादा है. ऐसा इसलिए कि न तो ईरान, न ही अमेरिका पीछे हटने को तैयार है. फिर इजरायल की मंशा युद्ध को आगे बढ़ाने की है. ताकि ईरान को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाना संभव हो सके.
फिर, इस युद्ध में मिडिलमैन पाकिस्तान है. उस पर न तो इजरायल को, न ही ईरान को भरोसा है. इस बीच ईरान ने बड़ी गलती ये कर दी है कि, उसने संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब पर हमला कर दिया. यही दोनों देश युद्ध खर्च की फंडिंग कर रहे हैं. आने वाले कुछ दिनों में ईरान काफी कमजोर पड़ जाएगा. यूएई और सऊदी अरब को उसी पल का इंतजार है. हालांकि, ईरान अभी आधे एक महीने तक मिसाइल छोड़ने की स्थिति में है. वहीं, 14 और 15 मई को ट्रंप चीन के दौरे पर जाने वाले हैं. उससे पहले ईजरायल और अमेरिका ईरान को पूरी तरह से ध्वस्त कर देना चाहते हैं.
डॉ. अलूने के अनुसार, ईरान, अमेरिका और इजरायल और ईरान के बीच 39 दिनों से चल रहा संघर्ष पहले से ज्यादा नाज़ुक मोड़ पर पहुंच गया है. जंग समाप्त होने के बजाय और ज्यादा बढ़ने का गंभीर खतरा है.
अब तक किसने क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के लिए मंगलवार रात (7 अप्रैल, 2026) की समय सीमा तय की है. इस समय सीमा के भीतर ईरान को 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के समझौते को स्वीकार करना होगा. ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि ऐसा न करने पर ईरान के प्रमुख बुनियादी ढांचे - जिसमें पुल और बिजली संयंत्र शामिल हैं - नष्ट हो सकते हैं.
ईरान का रुख क्या?
ईरान ने 45 दिनों के युद्ध-विराम के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. उसने अस्थायी रोक के बजाय युद्ध को पूरी तरह से समाप्त करने की मांग की है. तेहरान ने अमेरिका की धमकियों को "कन्फ्यूज्ड" करने वाला करार दिया है. साथ ही ये भी कहा है कि अमेरिका-इजराइल के ठिकानों पर "करारा" जवाबी हमला करने की कसम खाई है. इजराइल और अमेरिका ने ईरान की पेट्रोकेमिकल सुविधाओं और सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए जा रहे हैं, तो ईरान ने भी ड्रोन और मिसाइल हमलों के जरिए इसका जवाब दिया है, जिसमें कुवैत, बहरीन और इराकी ठिकाने पर निशाना पर आ गए हैं.
कूटनीति VS जंग: PAK पर किसी को भरोसा नहीं?
पाकिस्तान युद्ध को और बढ़ने से रोकने के लिए एक "बेहद नाज़ुक और संवेदनशील चरण" में मध्यस्थता कर रहा है. दूसरी ओर तेहरान अमेरिका के इरादों को लेकर आशंकित है. तेहरान ने अमेरिका पर पिछले दौर की बातचीत के दौरान भी हमला करने का आरोप लगाया है. 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में पहले ही उथल-पुथल मच चुकी है. यदि संघर्ष और बढ़ता है, तो यह वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक गंभीर खतरा बन सकता है.
आज की तारीख में दोनों पक्ष जंग को खुद की "अस्तित्व की लड़ाई" के रूप में देख रहे हैं. ऐसे में, अमेरिका द्वारा तय की गई समय सीमा जैसे-जैसे नजदीक आ रही है और दोनों पक्षों के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंचता जा रहा है. इसलिए, अंतिम क्षण में किसी कूटनीतिक सफलता की उम्मीद करना बेहद मुश्किल है.




