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सीजफायर के बीच फिर ज़ोरदार टकराव! ईरान ने उड़ाए ड्रोन, तो अमेरिका ने भी कर दिया बड़ा हमला; क्या फिर भड़क उठेगी जंग?

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ईरान के ड्रोन भेजे जाने के बाद यूएस आर्मी ने जोरदार हमला किया.

सीजफायर के बीच फिर ज़ोरदार टकराव! ईरान ने उड़ाए ड्रोन, तो अमेरिका ने भी कर दिया बड़ा हमला; क्या फिर भड़क उठेगी जंग?
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ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है. शनिवार को ईरान की ओर से होर्मुज की दिशा में कई ड्रोन भेजे गए, जिसके बाद अमेरिकी सेना ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कम से कम चार ड्रोन मार गिराए. इस घटना की पुष्टि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने की है.

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ये एकतरफा हमलावर ड्रोन (One-Way Attack Drones) थे, जो या तो समुद्री मार्ग से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने के लिए भेजे गए थे या फिर क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य संसाधनों पर हमला करने के उद्देश्य से लॉन्च किए गए थे.

क्या अमेरिका ने की जवाबी कार्रवाई?

ड्रोन को निष्क्रिय करने के तुरंत बाद अमेरिकी सेना ने जवाबी कार्रवाई भी की. अमेरिका ने ईरान के तटीय निगरानी तंत्र को निशाना बनाते हुए गोरुक और क़ेश्म द्वीप पर मौजूद रडार साइटों पर हमला किया. अमेरिकी सेना का कहना है कि यह कार्रवाई आगे होने वाले संभावित हमलों को रोकने और समुद्री यातायात की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई.

CENTCOM ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि अमेरिकी बलों ने होर्मुज की ओर बढ़ रहे ईरानी ड्रोन को मार गिराया, क्योंकि वे क्षेत्रीय समुद्री यातायात के लिए तत्काल खतरा पैदा कर रहे थे.

बयान में आगे कहा गया कि ड्रोन हमले के बाद अमेरिकी सेना ने आत्मरक्षा और क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से गोरुक और क़ेश्म द्वीप स्थित ईरानी तटीय निगरानी रडार ठिकानों पर कार्रवाई की. CENTCOM ने यह भी कहा कि अमेरिकी बल पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी संभावित आक्रामक कार्रवाई का जवाब देने के लिए तैयार हैं.

दोनों देश एक दूसरे पर लगा रहे आरोप?

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम लागू होने के बावजूद तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. दोनों देश लगातार एक-दूसरे पर संघर्षविराम के उल्लंघन के आरोप लगाते रहे हैं. साथ ही संघर्ष समाप्त करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर बातचीत भी जारी है.

ईरान के अमेरिकी ठिकानों और एयरपोर्ट पर हमले

इस सप्ताह की शुरुआत में भी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया था, जब ईरान ने बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे. अमेरिकी सेना ने दावा किया था कि उन हमलों को सफलतापूर्वक रोक दिया गया और किसी तरह का बड़ा नुकसान नहीं हुआ. हालांकि कुवैत एयरपोर्ट पर हुए एक हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत की खबर सामने आई थी, जिससे इस पूरे संघर्ष की गंभीरता और बढ़ गई.

शनिवार को होर्मुज के आसपास हुई यह घटना वैश्विक स्तर पर भी चिंता का विषय बन गई है. होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है.

ईरान की क्षमता के बारे में क्या बोले ट्रंप?

इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी हमलों के कारण ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि ईरान के पास अभी भी कुछ हद तक जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता मौजूद है. एनबीसी न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान की सैन्य ताकत को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया है.

उन्होंने कहा कि ईरान की अधिकांश ड्रोन फैक्ट्रियां, लॉन्चिंग पैड और मिसाइल निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण ठिकाने नष्ट कर दिए गए हैं. हालांकि उनके अनुसार ईरान के पास अभी भी कुछ मिसाइलें और ड्रोन मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल वह कर सकता है.

ईरान के पास कितनी मिसाइलें बची?

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान के पास अब उसके मूल मिसाइल भंडार का केवल लगभग 21 से 22 प्रतिशत हिस्सा ही बचा है. उन्होंने कहा कि यह संख्या अभी भी काफी है, लेकिन संघर्ष की शुरुआत में ईरान जितना मजबूत था, अब उतना नहीं रहा.

ताजा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देशों के प्रतिनिधि व्यापक समझौते के लिए बातचीत कर रहे हैं. इस समझौते का उद्देश्य क्षेत्र में तनाव कम करना और लंबे समय से चल रहे संघर्ष को समाप्त करना है. हालांकि बातचीत की प्रगति को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल के दिनों में कहा है कि वार्ता सही दिशा में आगे बढ़ रही है और सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है.

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