1989 और 2020 जैसी स्थिति टालने के लिए कितना तैयार ईरान, खामेनेई के अंतिम संस्कार में उमड़े करोड़ों लोग, क्राउड कंट्रोल की कैसी तैयारी?
1989 में खुमैनी और 2020 में कासिम सुलेमानी की अंतिम यात्रा में हुई भगदड़ के बाद ईरान ने क्राउड कंट्रोल में बड़े बदलाव किए. जानिए खामेनेई के अंतिम संस्कार की संभावित सुरक्षा रणनीति.
ईरान के सुप्रीम लीडर रहे अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार में लाखों नहीं बल्कि करोड़ों लोगों के जुटने की संभावना जताई जा रही है. ऐसा पहली बार नहीं होगा. इससे पहले भी ईरान दो ऐसे जनसैलाब देख चुका है. 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के अंतिम संस्कार के दौरान और 2020 में जनरल कासिम सुलेमानी की अंतिम यात्रा के दौरान. दोनों घटनाओं में भीड़ बेकाबू हुई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए और मरे. इन्हीं अनुभवों के आधार पर ईरान ने इस बार भीड़ प्रबंधन की रणनीति में कई बड़े बदलाव किए हैं. सुरक्षा व्यवस्था के चौक चौबंद इंतजाम किए गए है.
1989: खुमैनी के अंतिम संस्कार में क्या हुआ?
3 जून 1989 को ईरानी क्रांति के नेता अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी का निधन हुआ. अगले दिन तेहरान में उनके अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार के लिए अनुमानित 80 लाख से एक करोड़ लोग सड़कों पर उतर आए. इतनी विशाल भीड़ के कारण सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई. लोग ताबूत तक पहुंचने के लिए बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ गए, कई लोग ताबूत को छूने और कपड़ा लेने लगे. स्थिति इतनी बिगड़ गई कि ताबूत जमीन पर गिर गया, कफ़न फट गया और शव को दोबारा हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित स्थान पर ले जाना पड़ा. भीड़ नियंत्रित होने के बाद दोबारा अंतिम संस्कार कराया गया. यह आधुनिक इतिहास के सबसे खराब राजकीय अंतिम संस्कारों में गिना जाता है.
2020: कासिम सुलेमानी की शवयात्रा में क्या हुआ?
ठीक 31 साल बाद यानी 3 जनवरी 2020 को अमेरिकी ड्रोन हमले में जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद पूरे ईरान में कई शहरों में अंतिम यात्रा निकाली गई. 7 जनवरी को उनके गृहनगर केरमान में लाखों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. श्रद्धांजलि देने के दौरान अचानक भगदड़ मच गई. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 56 से अधिक लोगों की मौत हुई जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हुए. इस हादसे के कारण अंतिम संस्कार को कुछ घंटों के लिए टालना पड़ा. घटना ने दिखाया कि भावनात्मक माहौल में अत्यधिक भीड़ सबसे बड़ा सुरक्षा जोखिम बन सकती है.
दोनों घटनाओं से सीख लेते हुए ईरान की सरकार ने खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए बड़े पैमाने शामिल होने वाले लोगों की करोड़ों की संख्या को देखते हुए भीड़ मैनेजमेंट की तैयारी की है. जानें क्या है पूरी तैयारी.
1. मल्टी लेयर सुरक्षा घेरा
खामेनेई देश के सर्वोच्च नेता हैं, इसलिए सुरक्षा केवल भीड़ नियंत्रण तक सीमित नहीं होगी. उनके अंतिम संस्कार में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC), पुलिस, बसीज मिलिशिया, खुफिया एजेंसियां और सेना मिलकर कई स्तर का सुरक्षा घेरा बनाएंगी. VIP, विदेशी प्रतिनिधिमंडल और आम लोगों के लिए अलग-अलग सुरक्षा परतें होंगी.
2. भीड़ को कई जोन में बांटा जाएगा
1989 की सबसे बड़ी गलती यह थी कि पूरी भीड़ एक ही स्थान पर इकट्ठा हो गई थी. अब संभावना है कि लोगों को अलग-अलग जोन, स्क्रीनिंग एरिया और प्रवेश मार्गों में बांटा जाएगा. बड़ी LED स्क्रीन लगाकर लोगों को दूर से अंतिम दर्शन कराए जा सकते हैं ताकि मुख्य स्थल पर दबाव कम रहे.
3. डिजिटल और ड्रोन निगरानी
ईरान अब AI आधारित CCTV कैमरे, ड्रोन सर्विलांस, हेलीकॉप्टर मॉनिटरिंग और रियल-टाइम कमांड सेंटर का उपयोग करता है. भीड़ का घनत्व बढ़ते ही कंट्रोल रूम वैकल्पिक मार्ग खोल सकता है और लोगों के प्रवेश को रोक सकता है.
4. चरणबद्ध अंतिम दर्शन
1989 की तरह एक ही समय में सभी लोगों को प्रवेश देने के बजाय अंतिम दर्शन कई घंटों या कई चरणों में कराए जा सकते हैं. इससे भीड़ का दबाव कम रहेगा.
5. मेडिकल और आपातकालीन व्यवस्था
2020 की भगदड़ के बाद ईरान बड़े धार्मिक आयोजनों में मोबाइल अस्पताल, एम्बुलेंस कॉरिडोर, फायर एवं रेस्क्यू यूनिट और मेडिकल रैपिड रिस्पॉन्स टीम तैनात करता है. खामेनेई के अंतिम संस्कार में यह व्यवस्था और बड़े स्तर पर होने की संभावना है.
6. VIP और आम जनता के रास्ते अलग
विदेशी राष्ट्राध्यक्ष, धार्मिक नेता और वरिष्ठ अधिकारी अलग सुरक्षा मार्ग से समारोह स्थल तक पहुंचेंगे. आम लोगों के प्रवेश और निकास के लिए अलग रूट निर्धारित किए जाएंगे ताकि दोनों समूहों की भीड़ आपस में न मिले.
7. ट्रैफिक और पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर नियंत्रण
तेहरान में कई सड़कें बंद की जा सकती हैं. मेट्रो और बस सेवाओं का विशेष संचालन होगा जबकि निजी वाहनों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है. पार्किंग शहर की बाहरी सीमा पर बनाई जा सकती है और वहां से शटल सेवा चलाई जा सकती है.
8. आतंकवादी और सुरक्षा खतरे पर विशेष नजर
इतने बड़े आयोजन को देखते हुए किसी आतंकी हमले, ड्रोन अटैक या तोड़फोड़ की आशंका को भी सुरक्षा एजेंसियां गंभीरता से लेंगी. इसलिए भीड़ नियंत्रण के साथ-साथ एयर डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और काउंटर-ड्रोन सिस्टम भी सक्रिय रह सकते हैं.
9. क्या 1989 और 2020 जैसी स्थिति दोबारा हो सकती है?
इस बात से पूरी तरह इंकार नहीं किया जा सकता. ऐसा इसलिए कि अंतिम संस्कार में 2 करोड़ से ज्यादा लोगों के एक साथ तेहरान पहुंचने की संभावना है. ऐसा हुआ तो किसी भी देश के लिए भीड़ नियंत्रण चुनौती बन सकता है. हालांकि, 1989 और 2020 के अनुभवों के बाद ईरान के पास अब बेहतर तकनीक, अधिक प्रशिक्षित सुरक्षा बल, डिजिटल निगरानी और आधुनिक क्राउड मैनेजमेंट सिस्टम मौजूद हैं. फिर भी सबसे बड़ा जोखिम भावनात्मक भीड़, अचानक दबाव बढ़ना और लोगों का एक ही स्थान पर जमा होना रहेगा.
1989 में खुमैनी के अंतिम संस्कार और 2020 में कासिम सुलेमानी की शवयात्रा ईरान के लिए भीड़ प्रबंधन की सबसे बड़ी सीख साबित हुईं. अगर भविष्य में अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार होता है, तो ईरान संभवतः इतिहास की सबसे बड़ी सुरक्षा और क्राउड कंट्रोल व्यवस्था लागू करेगा.
इसके बावजूद, आयोजन का आकार इतना विशाल हो सकता है कि जोखिम को पूरी तरह समाप्त करना संभव नहीं होगा; सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि भीड़ को कितने प्रभावी ढंग से चरणबद्ध और नियंत्रित किया जाता है.




