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बिस्किट-चिप्स पर गुजारा, बाथरोब में अटेंड की क्लास! किस मानसिक दवाब में था 22 साल सकेथ श्रीनिवासैया? छोड़ दी सबकी परवाह

कर्नाटक के मूल निवासी और UC Berkeley में पढ़ रहे 22 वर्षीय सकेथ श्रीनिवासैया का शव कैलिफोर्निया के लेक अंजा में मिला है. भारतीय वाणिज्य दूतावास ने पुष्टि की, मौत के कारणों की जांच अभी जारी है.

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( Image Source:  X: @Cloudwatch199 )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय

Updated on: 15 Feb 2026 11:49 AM IST

एक 22 साल के भारतीय छात्र सकेथ श्रीनिवासैया की बहुत दुखद खबर है. वे कर्नाटक के मूल निवासी थे और अमेरिका के कैलिफोर्निया में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले (UC Berkeley) में मास्टर ऑफ साइंस (एमएससी) की पढ़ाई कर रहे थे. वे केमिकल एंड बायोमॉलिक्यूलर इंजीनियरिंग में पोस्टग्रेजुएट छात्र थे. सकेथ पिछले हफ्ते यानी 9 फरवरी 2026 से लापता हो गए थे. वे आखिरी बार बर्कले हिल्स में लेक अंजा के पास देखे गए थे.

उनकी तलाश में स्थानीय पुलिस, वॉलंटियर्स और उनके दोस्तों ने कई दिनों तक खोजबीन की. उनके बैग में पासपोर्ट और लैपटॉप के साथ एक घर के दरवाजे पर मिला था, जो पार्क हिल्स इलाके में था. दुख की बात यह है कि शनिवार 14 फरवरी 2026 को लेक अंजा से उनका शव बरामद कर लिया गया. सैन फ्रांसिस्को स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने इसकी पुष्टि की है. दूतावास ने बहुत दुख जताया और परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की.

क्या कहना है दोस्त का?

उन्होंने कहा कि वे परिवार को हर संभव मदद देंगे, जैसे स्थानीय पुलिस से बातचीत करना और शव को जल्द से जल्द भारत वापस लाने की व्यवस्था करना. दूतावास के अधिकारी परिवार से सीधे संपर्क में हैं और सभी जरूरी कामों में मदद कर रहे हैं. सकेथ के रूममेट बनेत सिंह (Baneet Singh) ने लिंक्डइन पर एक इमोशनल पोस्ट लिखी. उन्होंने बताया कि सकेथ पिछले कुछ दिनों से बहुत उदास और अलग-थलग रहने लगे थे. वे ठीक से खाना नहीं खा रहे थे सिर्फ चिप्स और बिस्कुट खाकर गुजारा कर रहे थे. पहले दो हफ्तों में कोई खास समस्या नहीं दिखी, लेकिन अचानक उनका व्यवहार बदल गया. वे कम लोगों से मिलने लगे, कम बात करने लगे.

क्यों जीना नहीं चाहता थे सकेथ?

बनेत ने याद किया कि 21 जनवरी को सकेथ ने उन्हें लेक अंजा घूमने के लिए बुलाया था, लेकिन बनेत ने आलस में मना कर दिया. अब उन्हें बहुत अफसोस है कि वही जगह उनकी जान ले लेगी, उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था.' उनकी आखिरी बातचीत तब हुई जब सकेथ लाल रंग का बाथरोब पहनकर क्लास से लौटे. बनेत ने मजाक में पूछा, 'तुम क्लास में गाउन क्यों पहने हो?' तो सकेथ ने कहा, 'मुझे अब किसी बात की परवाह नहीं है. मुझे ठंड लग रही है और मुझे इस बात की कोई परवाह नहीं कि कोई मेरे बारे में क्या सोचेगा. मुझे किसी चीज की परवाह नहीं है.' बनेत ने लिखा कि यह सुनकर उन्हें लगा कि सकेथ का मन बहुत टूट चुका है। उन्होंने कहा कि जीवन का असली दुश्मन मौत नहीं, बल्कि उदासीनता है जब इंसान किसी चीज की परवाह करना ही छोड़ देता है, यहां तक कि अपनी जिंदगी की भी.

खुदकुशी या हत्या?

सकेथ ने भी सब कुछ छोड़ दिया था बनेत का मानना है कि सकेथ ने खुदकुशी की है, लेकिन स्थानीय पुलिस ने अभी मौत के कारण की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है. जांच जारी है।यह खबर बहुत दुखद है. दूर विदेश में पढ़ाई करते हुए कई छात्र मानसिक दबाव, अकेलापन और तनाव का सामना करते हैं. ऐसे में परिवार, दोस्तों और संस्थानों को ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है. सकेथ के परिवार और दोस्तों के लिए यह बहुत बड़ा सदमा है.

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