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क्या भारतीयों के लिए बंद हो जाएगा अमेरिका का रास्ता, ट्रंप का H-1B फीस बढ़ाने का क्या है पूरा प्लान, कितना लगेगा पैसा?- 8 पॉइंट्स

अमेरिका में नौकरी करने का सपना देख रहे भारतीयों को बड़ा झटका लग सकता है, अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने H-1B वीजा आवेदनों पर 103,265 अमेरिकी डॉलर का अतिरिक्त शुल्क प्रस्तावित किया है.

H-1B Fee Increase
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H-1B Fee Increase

( Image Source:  ANI )

अमेरिका में नौकरी का सपना देख रहे भारतीयों के लिए H-1B वीजा से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने H-1B वीजा आवेदनों पर 103,265 अमेरिकी डॉलर यानी करीब 99 लाख रुपये का अतिरिक्त शुल्क प्रस्तावित किया है. अगर यह प्रस्ताव अंतिम नियम का रूप लेता है, तो अमेरिकी कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करना और उन्हें वीजा स्पॉन्सर करना बेहद महंगा हो सकता है.

H-1B वीजा का इस्तेमाल खास तौर पर टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और दूसरे विशेष व्यवसायों में विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए किया जाता है. इस कार्यक्रम के सबसे बड़े लाभार्थियों में भारतीय शामिल हैं. ऐसे में प्रस्तावित भारी शुल्क का असर भारतीय टेक प्रोफेशनल्स और उन्हें नियुक्त करने वाली अमेरिकी कंपनियों पर खास तौर पर पड़ने की आशंका है.

8 पॉइंट्स में जानें पूरा प्लान और इसका असर

1. DHS ने H-1B याचिका दाखिल करने पर 103,265 अमेरिकी डॉलर का नया शुल्क प्रस्तावित किया है. यह राशि मौजूदा H-1B याचिका शुल्क से अलग होगी और दूसरे लागू शुल्क भी इसके अतिरिक्त देने होंगे. यानी किसी कंपनी को H-1B कर्मचारी को स्पॉन्सर करने के लिए मौजूदा खर्चों के अलावा करीब 99 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है.

2. प्रस्ताव किसी एक देश के नागरिकों के लिए नहीं है. यह पात्र H-1B आवेदनों पर कर्मचारी की राष्ट्रीयता की परवाह किए बिना लागू होगा. हालांकि, H-1B कार्यक्रम में भारतीय पेशेवरों की बड़ी हिस्सेदारी है, खासकर टेक्नोलॉजी क्षेत्र में, इसलिए भारी शुल्क लागू होने की स्थिति में भारतीय सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं.

3. प्रस्तावित शुल्क उन H-1B याचिकाओं पर लागू होगा जो वार्षिक सीमा यानी कैप के अधीन हैं. इसमें उच्च डिग्री छूट के तहत दाखिल होने वाली पात्र याचिकाएं भी शामिल होंगी. हालांकि, कुछ cap-exempt याचिकाओं को इससे बाहर रखा गया है. इनमें कुछ विश्वविद्यालयों, रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन और सरकारी रिसर्च संस्थानों द्वारा दाखिल की जाने वाली याचिकाएं शामिल हैं.

4. मौजूदा कानून के तहत H-1B कार्यक्रम में हर साल 65,000 वीजा की सामान्य सीमा है. इसके अतिरिक्त अमेरिकी संस्थान से मास्टर डिग्री या उससे उच्च डिग्री हासिल करने वाले विदेशी छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा उपलब्ध होते हैं.

5. अगर 100,000 डॉलर से अधिक का अतिरिक्त शुल्क लागू होता है, तो कंपनियों के लिए H-1B कर्मचारी को स्पॉन्सर करना पहले की तुलना में काफी महंगा हो जाएगा. इसका असर खास तौर पर उन मालिकों पर पड़ सकता है जो वार्षिक H-1B सीमा के तहत नए विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करना चाहते हैं. कंपनियां संभावित रूप से महंगे स्पॉन्सरशिप खर्च को देखते हुए विदेशी उम्मीदवारों की भर्ती को लेकर अधिक सतर्क हो सकती हैं.

6. फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित नोटिस के अनुसार, H-1B याचिका दाखिल करते समय 103,265 डॉलर का शुल्क लिया जाना प्रस्तावित है और यह अन्य सभी लागू शुल्कों के अतिरिक्त होगा. DHS का कहना है कि इस राशि का उद्देश्य संघीय सरकार द्वारा लीगल इमिग्रेशन कार्यक्रमों के जजमेंट, जांच और प्रशासन से जुड़े खर्चों की भरपाई करना है. विभाग का अनुमान है कि इस शुल्क से हर साल करीब 8.8 अरब डॉलर की आय हो सकती है.

7. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने प्रस्तावित शुल्क का समर्थन करते हुए कहा, "अगर किसी अमेरिकी निगम को कर्मचारियों की आवश्यकता है, तो उसे अमेरिकियों को काम पर रखना और सीखाना चाहिए."

8. H-1B कार्यक्रम में भारतीय प्रोफेशनल्स की बड़ी भागीदारी को देखते हुए प्रस्तावित शुल्क का असर भारत के कुशल आईटी और टेक कर्मचारियों पर खासा पड़ सकता है. हालांकि, शुल्क सीधे भारतीय आवेदकों पर नहीं बल्कि पात्र H-1B याचिकाओं पर लागू होने का प्रस्ताव है.

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