जान बची लेकिन अरबों डॉलर डुबोए... हमले के डर से तुर्की से ऐसे भागे थे Donald Trump, अमेरिका को इतनी भारी पड़ी ईरान जंग
ईरान के साथ जंग में अमेरिका को अरबों डॉलर का नुकसान हो चुका है, कई सैनिक भी अमेरिका के मारे जा चुके हैं. वहीं ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जान से मारने की धमकी दे चुका है, जिसके डर से ट्रंप तुर्की से भी भागे थे.
donald trump
मिडिल ईस्ट में जंग अभी भी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जंग खत्म करने की पूरी कोशिश की है, कई बार उन्होंने ईरान पर ज्यादा घातक हमले करने की धमकी भी दी है लेकिन हर बार ईरान ने अमेरिका को मुंह तोड़ जवाब दिया है. इसके अलावा ईरान पहले ही ट्रंप को जान से मारने की धमकी दे चुका है और ट्रंप ईरान की 'किल लिस्ट' में पहले नंबर पर भी है. इस बीच द वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में एक बड़ा खुलासा हुआ है.
रिपोर्ट के मुताबिक तुर्की के अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन से लौटते समय ट्रंप को एयर फोर्स वन से बेहद सीक्रेट तरीके से एक छोटे सैन्य विमान सी-32ए में पहुंचा गया था. इसकी वजब ईरान द्वारा ट्रंप को जान से मारने की धमकी थी. रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप पहले कैमरों के सामने कतर की ओर से दिए गए पुराने हल्के नीले रंग के विमान में सवार हुए. इसके बाद उन्हें एक एयरपोर्ट कैटरिंग ट्रक के जरिए सी-32ए सैन्य विमान तक पहुंचाया गया. यही विमान उन्हें ब्रिटेन लेकर गया.
कैसे अचानक बदला था प्लान?
अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के बाद ट्रंप को शुरुआत में उसी विमान में सवार होते देखा गया, जिसका इस्तेमाल वह तुर्की पहुंचने के लिए कर चुके थे. यह कतर द्वारा अमेरिका को दिया गया और अमेरिकी राष्ट्रपति के इस्तेमाल के लिए तैयार किया गया विमान था. हालांकि, विमान में सवार होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था में अचानक बदलाव किया गया.
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप को एयरपोर्ट के कैटरिंग ट्रक के जरिये सी-32ए विमान तक ले जाया गया, ताकि उनकी यात्रा व्यवस्था सार्वजनिक न हो सके. रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप को लेकर जा रहा सी-32ए विमान रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन पहुंच गया. इसके कुछ ही मिनट बाद पुराना एयर फोर्स वन विमान और राष्ट्रपति के साथ यात्रा कर रहे मीडियाकर्मी भी वहां पहुंचे.
ईरान से खतरे की आशंका क्यों बढ़ी?
तुर्की की सीमा ईरान से लगती है और ट्रंप नाटो शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए अंकारा पहुंचे थे. इससे पहले भी ट्रंप ने संकेत दिया था कि उन्हें ईरान की ओर से खतरा हो सकता है. तुर्की से रवाना होते समय पत्रकारों को विमान की खिड़कियों के पर्दे बंद रखने के लिए कहा गया था. ट्रंप ने उस समय कहा था कि "मुझे हर समय खतरा रहता है। मैं उनकी लिस्ट में नंबर 1 पर हूं."
जंग में अमेरिका को कितना हुआ नुकसान?
रिपोर्ट के मुताबिक, ऑपरेशन एपिक फ्यूरी अभियान में अमेरिकी सैन्यकर्मियों के मारे जाने और घायल होने की संख्या को लेकर समय-समय पर आंकड़ों में बदलाव हुआ. जुलाई में पेंटागन के आंकड़ों में बदलाव के बाद रिपोर्टों में 18 अमेरिकी सैनिकों की मौत और 624 के घायल होने का आंकड़ा सामने आया था.
रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान अमेरिका को भारी आर्थिक और सैन्य नुकसान उठाना पड़ा. युद्ध पर अमेरिकी खर्च को 113.3 अरब डॉलर से अधिक बताया गया है. इसके अलावा ईरानी जवाबी हमलों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सैन्य उपकरणों को भी नुकसान पहुंचने का दावा किया गया है. जंग में अमेरिका को एफ-15ई, एफ-35ए और एमक्यू-9 रीपर जैसे विमानों का भी नुकसान झेलना पड़ा है.
किन अमेरिकी ठिकानों को ईरान ने बनाया निशाना?
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी जवाबी हमले किए. इनमें सऊदी अरब का प्रिंस सुल्तान एयर बेस, कतर का अल उदैद एयर बेस और कुवैत का अली अल सलेम एयर बेस शामिल बताए गए हैं. हमलों में रडार सिस्टम, ईंधन भंडारण और एयर डिफेंस से जुड़े ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है.
कब शुरु हुई थी जंग?
अमेरिका-ईरान युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू की. अमेरिकी अभियान को 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' नाम दिया गया. शुरुआती हमलों में ईरान के परमाणु ठिकानों, सैन्य ठिकानों और सरकारी परिसरों को निशाना बनाया गया. जंग के पहले दिन जब अमेरिका और इजरायल में मिलकर ईरान पर एयरस्ट्राइक की थी, तो उसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी.




