क्या चीन ने चुराया 220 मिलियन अमेरिकी वोटरों का डेटा, 2020 चुनाव का फिर गरमाया माहौल, 5 पॉइंट्स में जानें ट्रंप ने क्या-क्या लगाए आरोप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि साल 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान चीन ने 220 मिलियन अमेरिकी वोटरों का डेटा चुराया है.
Donald Trump China allegation
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर 2020 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर बड़ा दावा किया है. व्हाइट हाउस से प्रसारित अपने प्राइम-टाइम संबोधन में उन्होंने आरोप लगाया कि चीन ने अमेरिकी चुनावी डेटा में अब तक की सबसे बड़ी सेंध लगाई और करोड़ों अमेरिकी मतदाताओं की जानकारी अवैध रूप से हासिल कर ली.
ट्रंप ने कहा कि वह जल्द ही इस मामले से जुड़ी खुफिया जानकारी सार्वजनिक करेंगे, जिससे चुनावी सुरक्षा पर नए सवाल खड़े हो सकते हैं. ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब 2020 के चुनाव को लेकर उनके दावों पर पहले भी व्यापक राजनीतिक और कानूनी बहस हो चुकी है. हालांकि, इस बार उन्होंने चुनावी डेटा सुरक्षा को केंद्र में रखते हुए नए आरोप लगाए हैं.
5 पॉइंट्स में जानें क्या बोले डोनाल्ड ट्रंप
1. व्हाइट हाउस से राष्ट्र को संबोधित करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि चीन ने कई सालों तक अमेरिकी चुनावी प्रणाली को निशाना बनाया. उन्होंने कहा "साल 2020 के चुनाव चक्र से शुरू होकर, कई सालों की अवधि में, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना ने चुनाव डेटा के इतिहास में सबसे बड़े उल्लंघन को अंजाम दिया, जिसके परिणामस्वरूप चीन ने अवैध रूप से 220 मिलियन अमेरिकी मतदाता फाइलों का अधिग्रहण किया."
2. राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि चीन का उद्देश्य केवल डेटा प्राप्त करना नहीं था, बल्कि 2020 के राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करना भी था. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी डेटा में "इतिहास का सबसे बड़ा समझौता" किया गया और इस मामले को छिपाने के लिए गुप्त संगठनों के कुछ सदस्यों ने भी भूमिका निभाई.
3. अपने संबोधन में ट्रंप ने चुनावी डेटा से जुड़ी कथित सेंध को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा "डेटा का यह नुकसान चुनाव सुरक्षा के लिए एक अभूतपूर्व दुःस्वप्न प्रस्तुत करता है." उन्होंने संकेत दिया कि इस मामले से जुड़ी खुफिया जानकारी सार्वजनिक किए जाने के बाद और भी कई तथ्य सामने आ सकते हैं.
4. डोनाल्ड ट्रंप 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद से लगातार चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते रहे हैं. उन्होंने और उनके सहयोगियों ने चुनावी धांधली के आरोपों को लेकर 60 से अधिक मुकदमे भी दायर किए थे.
5. उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड के अनुसार, ट्रंप और उनके सहयोगियों द्वारा दायर 60 से अधिक मामलों में किसी भी अदालत ने ऐसा निर्णय नहीं दिया जिससे 2020 के चुनाव परिणाम को बदलने योग्य व्यापक धोखाधड़ी सिद्ध हुई हो. इसके अलावा कई राज्यों में कराई गई पुनर्गणना, चुनावी ऑडिट और ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिकी न्याय विभाग की जांच में भी ऐसी व्यापक चुनावी धोखाधड़ी के प्रमाण नहीं मिले जो चुनाव परिणाम बदलने के लिए पर्याप्त माने गए हों.




