कौन हैं Jeremy Hansen? चांद के करीब पहुंचने वाले पहले कनाडाई एस्ट्रोनॉट, नील आर्मस्ट्रांग को देख जागा था पैशन
आर्टेमिस मिशन के तहत जेरेमी हैनसेन समेत चार अंतरिक्ष यात्रियों ने अपोलो 13 का रिकॉर्ड तोड़ते हुए पृथ्वी से सबसे ज्यादा दूरी तय की. इस दौरान उन्होंने चंद्रमा के दूर वाले हिस्से और पृथ्वी को एक साथ देखकर ऐतिहासिक और भावनात्मक पल का अनुभव किया.
कनाडा के हीरोइक एस्ट्रोनॉट जेरेमी हैनसेन (Jeremy Hanse) उन चार साहसी लोगों में शामिल हैं, जो पिछले 50 साल से भी ज्यादा समय के बाद चंद्रमा के सबसे करीब जाने वाले इंसान बनने वाले हैं. यह मिशन न सिर्फ रोमांचक है, बल्कि इतिहास में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर रहा है. अमेरिकी मीडिया कंपनी ब्लूमबर्ग की पत्रकार लॉरेन ग्रश ने इस पूरे मिशन की विस्तार से जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि यह मिशन कितना महंगा है (अरबों डॉलर खर्च हो रहे हैं), इसका ऐतिहासिक महत्व क्या है, और इसमें आने वाली छोटी-छोटी समस्याओं का भी जिक्र किया है जैसे शौचालय की समस्या.
आज दोपहर करीब 2 बजे (टोरंटो समय) इस चालक दल ने एक बड़ा रिकॉर्ड तोड़ दिया. उन्होंने 1970 में हुए अपोलो 13 मिशन का वो रिकॉर्ड पार कर लिया, जिसमें पृथ्वी से सबसे ज्यादा दूर जाना शामिल था. मतलब अब ये चारों अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से इंसान द्वारा अब तक की गई सबसे ज्यादा दूरी पर पहुंच चुके हैं. इसके लगभग 45 मिनट बाद, लॉकहीड मार्टिन कंपनी द्वारा बनाए गए ओरियन कैप्सूल ने अपनी खिड़कियों को चंद्रमा की तरफ घुमा लिया. इससे चालक दल को चंद्रमा के उस हिस्से को देखने और तस्वीरें लेने का मौका मिला, जिसे मनुष्य पहले कभी नहीं देख पाए थे यानी चंद्रमा का दूर वाला (far side) हिस्सा.
क्या हुआ जब देखा चंद्रमा और पृथ्वी को साथ में?
मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच ने बताया कि चालक दल चंद्रमा और पृथ्वी को एक साथ आकाश में देखकर हैरान रह गया. दोनों ग्रह एक फ्रेम में दिख रहे थे, जो बेहद खूबसूरत और इमोशनल करने वाला नजारा था. जेरेमी हैनसेन ने रिकॉर्ड तोड़ने के बाद एक बहुत सुंदर बात कही, 'धरती माता हमें वापस अपनी ओर खींचने से पहले हम अंतरिक्ष में और आगे बढ़ेंगे, ताकि हम उन सारी चीजों को हासिल कर सकें जो हमें प्रिय हैं. लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि हम इस पल का इस्तेमाल इस पीढ़ी और आने वाली पीढ़ियों को चुनौती देने के लिए करें कि यह रिकॉर्ड बहुत लंबे समय तक कायम न रह जाए. आज शाम करीब 7 बजे यह मिशन चंद्रमा के सबसे करीब पहुंचेगा. कुछ मिनट बाद ही यह पृथ्वी से अब तक की सबसे ज्यादा दूरी पर भी होगा.'
कौन हैं जेरेमी हैनसेन?
जेरमी हैंसेन (Jeremy Hansen) कनाडा के एक प्रसिद्ध एस्ट्रोनॉट हैं. वे कनाडियन स्पेस एजेंसी (CSA) के एस्ट्रोनॉट हैं और रॉयल कैनेडियन एयर फोर्स के कर्नल (Colonel) भी हैं. 27 जनवरी 1976, लंदन, ओंटारियो, कनाडा में जन्मे हैंसेन 50 साल के हैं. वे एक फार्महाउस पर बड़े हुए. बचपन से ही अंतरिक्ष यात्री बनने का सपना देखते थे. नेल आर्मस्ट्रांग की तस्वीर देखकर उन्हें चंद्रमा पर जाने का शौक जगा. हैंसेन ने रॉयल मिलिट्री कॉलेज ऑफ कनाडा से स्पेस साइंस में बैचलर ऑफ साइंस (फर्स्ट क्लास ऑनर्स) और फिजिक्स में मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री ली. उन्होंने रॉयल कैनेडियन एयर फोर्स में CF-18 फाइटर पायलट के रूप में काम किया. 2009 में कनाडियन स्पेस एजेंसी ने उन्हें एस्ट्रोनॉट के रूप में चुना. वे एक्वानॉट (समुद्र तल पर प्रशिक्षण) भी हैं.
जेरेमी हैनसेन की सबसे बड़ी अचीवमेंट
वे आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन के क्रू मेंबर्स में शामिल हैं. यह मिशन 1 अप्रैल 2026 को लॉन्च हुआ था. यह NASA का पहला क्रूड (मानवयुक्त) टेस्ट फ्लाइट है जो चंद्रमा के चारों ओर जाएगा. जेरमी हैंसेन इस मिशन में पहले कनाडाई एस्ट्रोनॉट हैं जो चंद्रमा के पास गए हैं और पहले गैर-अमेरिकी हैं जो लो अर्थ ऑर्बिट से आगे (डीप स्पेस) गए हैं. मिशन में वे मिशन स्पेशलिस्ट की भूमिका निभा रहे हैं. यह मिशन करीब 10 दिन का है और इसमें ऑरियन स्पेसक्राफ्ट का टेस्ट्स किया जा रहा है. अभी (अप्रैल 2026) वे स्पेस में हैं और चंद्रमा की यात्रा कर रहे हैं.
क्या-क्या हुई समस्याएं?
कुछ छोटी समस्याएं जरूर आईं, लेकिन कुल मिलाकर मिशन बहुत अच्छे से चल रहा है. सबसे ज्यादा चर्चा टॉयलेट की समस्या की हुई. अंतरिक्ष में पेशाब करने वाला सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा था. शौच तो हो रहा था, लेकिन पेशाब करना मुश्किल हो गया था. काफी कोशिश के बाद नासा ने शनिवार देर रात चालक दल को शौचालय के दोनों काम करने की अनुमति दे दी. अब यह समस्या सुलझ गई है.
मिशन का बड़ा लक्ष्य
नासा का सपना है कि भविष्य में चंद्रमा पर एक स्थायी बेस बनाया जाए. जहां अंतरिक्ष यात्री रह सकें, काम कर सकें और लंबे समय तक रह सकें. जेरेमी हैनसेन 18 साल तक कनाडा के लड़ाकू विमान (CF-18) के पायलट रह चुके हैं. अब वे कनाडा के पहले गहरे अंतरिक्ष मिशन का हिस्सा बनकर इतिहास रच रहे हैं. इस मिशन में अंतरिक्ष यात्री हाई रेडिएशन वाले वातावरण में ओरियन कैप्सूल के सुरक्षा तंत्र की जांच कर रहे हैं. साथ ही वे ECLSS नामक महत्वपूर्ण सिस्टम (एनवायर्नमेंटल कंट्रोल और लाइफ सपोर्ट सिस्टम्स) की भी जांच कर रहे हैं. यह पहला मौका है जब इंसान गहरे अंतरिक्ष के खतरनाक रेडिएशन वाले इलाके में इस सिस्टम को चला रहे हैं. पूरे मिशन के दौरान वे कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा, ऑक्सीजन का दबाव और केबिन के अंदर का दबाव लगातार माप रहे हैं. इससे पता चलेगा कि चार लोगों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना कितना संभव है. यह जानकारी आगे चलकर चंद्रमा पर बने लूनर गेटवे स्टेशन पर लंबे मिशनों के लिए बहुत काम आएगी.
रिकॉर्ड तोड़ने का सफर
जैसे-जैसे मिशन आगे बढ़ेगा, चालक दल चंद्रमा के पीछे 10,400 किलोमीटर से भी ज्यादा दूर तक जाएगा और अपोलो 13 का पुराना रिकॉर्ड पूरी तरह तोड़ देगा. पृथ्वी से करीब 4 लाख किलोमीटर दूर पहुंचकर वे इंसानियत के इतिहास में नया अध्याय लिख देंगे.
कम्युनिकेशन्स और नेविगेशन की चुनौती
इस मिशन में ओरियन कैप्सूल के संचार और नेविगेशन सिस्टम की भी परीक्षा हो रही है. इतनी दूर से भी ह्यूस्टन के मिशन कंट्रोल से अच्छा संवाद बनाए रखना और हाई-क्वालिटी डेटा भेजना एक बड़ी चुनौती है.
आर्टेमिस समझौते की खासियत
यह मिशन सिर्फ अमेरिका का नहीं है. आर्टेमिस समझौते की वजह से कई देश साथ मिलकर काम कर रहे हैं. कनाडा ने लूनर गेटवे के लिए अपना नया रोबोटिक आर्म (कैनाडार्म 3) देने का वादा किया है. इसके बदले में नासा ने अगले 10-15 साल तक कनाडाई अंतरिक्ष यात्रियों को अपने मिशनों में जगह देने का फैसला किया है. यह 1960 के दशक के 'एक देश अकेले चंद्रमा पर जाएगा' वाले पुराने मॉडल से बिल्कुल अलग है. अब सहयोग, साझेदारी और लंबे समय तक चंद्रमा पर रहने की योजना है जो आगे मंगल ग्रह के मिशनों के लिए भी आधार बनेगी.




