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6 विमान तबाह, पायलट लापता; ईरान के साथ जंग में 'ना घर के ना घाट के' Trump! अमेरिका को कितना नुकसान?

मीडिल ईस्ट में ईरान के साथ संघर्ष के दौरान 6 अमेरिकी विमान तबाह और एक पायलट लापता. ट्रंप की नेतृत्व छवि और अमेरिका की सैन्य रणनीति पर गंभीर सवाल उठे.

6 विमान तबाह, पायलट लापता; ईरान के साथ जंग में ना घर के ना घाट के Trump! अमेरिका को कितना नुकसान?
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( Image Source:  AI SORA )
सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी4 Mins Read

Updated on: 4 April 2026 10:02 PM IST

मीडिल ईस्ट में ईरान के साथ जारी टकराव अब सिर्फ सैन्य संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि यह डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा बनता जा रहा है. TOI की रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के बीच कम से कम छह अमेरिकी विमानों के नुकसान और एक पायलट के लापता होने की घटना ने हालात को बेहद गंभीर बना दिया है. यह मुद्दा अब वैश्विक राजनीति और अमेरिका की सैन्य रणनीति पर सवाल खड़े कर रहा है.

पेंटागन ने पुष्टि की है कि दुश्मन क्षेत्र के भीतर एक हाई-रिस्क रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है. लेकिन यह मिशन सिर्फ एक पायलट को बचाने तक सीमित नहीं है. यह ट्रंप की उस छवि की परीक्षा है, जिसे उन्होंने वर्षों से 'मजबूत और अजेय नेता' के रूप में गढ़ा है.

क्या अमेरिकी एयर लॉसेस ने बढ़ाई चिंता?

ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष में अमेरिका को अपेक्षा से ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है. इस हफ्ते ही एक F-15E फाइटर जेट और A-10 अटैक एयरक्राफ्ट के अलावा एक AWACS विमान और तीन अन्य F-15 विमान 'फ्रेंडली फायर' में तबाह हो गए. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, एक F-15 पायलट को बचा लिया गया, लेकिन दूसरा अब भी लापता है. वहीं A-10 विमान का पायलट क्षतिग्रस्त विमान को कुवैत एयरस्पेस तक ले गया और इजेक्ट करने के बाद उसे सुरक्षित निकाल लिया गया. रेस्क्यू मिशन के दौरान दो अमेरिकी हेलीकॉप्टर भी ईरानी फायरिंग की चपेट में आए, जिससे उनमें सवार सैनिक घायल हुए.

क्या ट्रंप के बयान हालात को और भड़का रहे हैं?

डोनाल्ड ट्रंप ने सीधे तौर पर इस घटना पर टिप्पणी नहीं की, लेकिन उनके सोशल मीडिया पोस्ट ने विवाद जरूर खड़ा किया. उन्होंने एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि 'ईरान का सबसे बड़ा पुल ढह गया है, अब कभी इस्तेमाल नहीं होगा.' इसके अलावा उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि 'मैंने पहले ही ईरान को चेतावनी दी थी. अब सिर्फ 48 घंटे बचे हैं. अगर उन्होंने समझौता नहीं किया या HORMUZ नहीं खोला तो ईरान में नरक कर देंगे. तो वहीं इन बयानों के बीच अमेरिकी की तरफ से लापता पायलट का जिक्र न होना कई सवाल खड़े कर रहे हैं.

क्या ट्रंप की पुरानी आलोचनाएं अब उन्हीं पर भारी पड़ रही हैं?

ट्रंप ने हमेशा अपने पूर्ववर्तियों की विदेश नीति को निशाना बनाया है. उन्होंने जिमी कार्टर को ईरान बंधक संकट के लिए कमजोर बताया था और दावा किया था कि वह ऐसी स्थिति को '24 घंटे में सुलझा देते.' इसी तरह उन्होंने जो बाइडेन के अफगानिस्तान से वापसी को 'अमेरिका का सबसे बड़ा अपमान' कहा था. जॉर्ज डब्ल्यू बुश के इराक युद्ध और बराक ओबामा की ईरान परमाणु डील पर भी उन्होंने कड़ी आलोचना की थी. अब आलोचकों का कहना है कि मौजूदा हालात वही हैं, जिन्हें ट्रंप कहते थे कि उनके कार्यकाल में कभी नहीं होगा.

क्या लापता पायलट बना सबसे बड़ा जोखिम?

लापता अमेरिकी पायलट को लेकर स्थिति बेहद संवेदनशील हो गई है. ईरान ने उसकी तलाश तेज कर दी है और उस पर इनाम तक घोषित कर दिया गया है. अगर पायलट को पकड़ लिया जाता है और उसका इस्तेमाल प्रचार के लिए किया जाता है, तो यह अमेरिका के लिए बड़ा झटका हो सकता है. ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद-बाकर गालिबाफ ने तंज कसते हुए कहा कि 'पहले अमेरिका बड़ी-बड़ी जीत की बातें कर रहा था. लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि वो अपने ही पायलट्स को ढूंढने की गुहार लगा रहा है यानी पूरी रणनीति फेल होती दिख रही है.'

क्या रेस्क्यू मिशन तय करेगा ट्रंप की साख?

अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज, निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर की मदद से पायलट को ढूंढने की कोशिश कर रही हैं. सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि समय बहुत अहम है. यह मिशन अब सिर्फ सैन्य ऑपरेशन नहीं रहा. यह ट्रंप की विश्वसनीयता और नेतृत्व क्षमता की असली परीक्षा बन चुका है. अगर मिशन सफल होता है, तो उनकी 'मजबूत नेता' वाली छवि और मजबूत होगी. लेकिन असफलता उनकी वर्षों की राजनीतिक ब्रांडिंग को बड़ा झटका दे सकती है.

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