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कौन हैं 3 भारतीय जिनकी ओमान में US नेवी हमले में हुई मौत, कहां और कब बनाया निशाना, भारत ने अब तक क्या किया? Explainer

होर्मुज के पास अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत ने अमेरिका के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है. जानिए अमेरिकी हमले, मृत भारतीय नाविकों, भारत के एक्शन से जुड़ी पूरी डिटेल.

कौन हैं 3 भारतीय जिनकी ओमान में US नेवी हमले में हुई मौत, कहां और कब बनाया निशाना, भारत ने अब तक क्या किया? Explainer
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होर्मुज के पास अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत सरकार ने अमेरिका के सामने "कड़ा विरोध" दर्ज कराया है. यह घटना ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और क्षेत्र में हालात पहले से ही बेहद संवेदनशील बने हुए हैं.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि उसकी सेना ने बुधवार को ओमान की खाड़ी से गुजर रहे तेल टैंकर एमटी सेटेबेलो (MT Settebello) के इंजन रूम को निशाना बनाते हुए दो हेलफायर मिसाइलें दागी थीं.

अमेरिका ने क्या कहा?

अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई "सटीक सैन्य हमला" थी. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह जहाज प्रशांत महासागर के द्वीपीय देश पलाऊ के झंडे के तहत संचालित हो रहा था और उसके चालक दल ने बार-बार दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया था.

वॉशिंगटन ने आरोप लगाया कि यह जहाज ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए अमेरिकी सैन्य प्रतिबंध का उल्लंघन कर रहा था. अमेरिका ने अप्रैल से इस नाकेबंदी को लागू करना शुरू किया था, ताकि ईरान की आय के स्रोतों को सीमित किया जा सके और तेहरान पर दबाव बढ़ाया जा सके. उस समय अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ताएं भी ठप पड़ती नजर आ रही थीं.

हमले के बाद जहाज पर मौजूद 21 भारतीय चालक दल के सदस्यों को बचा लिया गया था, लेकिन तीन भारतीय नाविक लापता हो गए थे. गुरुवार को भारत सरकार ने पुष्टि की कि तीनों के शव जहाज पर ही मिले हैं. अमेरिकी नाकेबंदी लागू होने के बाद यह पहली घटना है जिसमें किसी की जान गई है.

मरने वाले भारतीय कौन थे?

मृतक भारतीय नाविकों की पहचान मुख्य इंजीनियर पतनाला सुरेश, डेक कैडेट आदित्य शर्मा और फिटर शिवानंद चौरसिया के रूप में हुई है. भारत के जहाजरानी और बंदरगाह मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस घटना को "हमारे समुद्री परिवार के लिए गहरा नुकसान" बताया.

आदित्य शर्मा कौन थे?

आदित्य शर्मा हिमाचल प्रदेश के रहने वाले एक युवा डेक कैडेट थे. उनकी मौत उस समय हो गई जब अमेरिकी सेना ने ओमान की खाड़ी में मौजूद तेल टैंकर एमटी सेटेबेलो पर हमला किया. इस हमले के बाद आदित्य शर्मा, इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया और मुख्य अभियंता पतनाला सुरेश लापता हो गए थे. बाद में भारतीय अधिकारियों ने तीनों की मौत की पुष्टि की.

आदित्य जहाज पर डेक कैडेट के रूप में काम कर रहे थे. डेक कैडेट वह प्रशिक्षु होता है जो भविष्य में जहाज का लाइसेंस प्राप्त अधिकारी बनने की तैयारी करता है. एमटी सेटेबेलो पर कुल 24 भारतीय चालक दल के सदस्य मौजूद थे. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ओमान तट से लगभग 20 समुद्री मील दूर इस जहाज को रोका था. अमेरिका का आरोप था कि टैंकर ईरानी तेल की ढुलाई कर रहा था और अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था. इसके बाद अमेरिकी विमान ने जहाज के इंजन रूम को निशाना बनाया.

शिवानंद चौरसिया कौन थे?

शिवानंद चौरसिया उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के सुरौली गांव के रहने वाले थे. 35 वर्षीय शिवानंद एमटी सेटेबेलो पर इंजन फिटर के पद पर कार्यरत थे और एक विदेशी शिपिंग कंपनी में नौकरी करते थे.

उनके पिता रामजी चौरसिया ने बताया कि शिवानंद करीब आठ महीने पहले मुंबई गए थे. वहीं से उन्होंने विदेशी शिपिंग कंपनी जॉइन की थी और समुद्री जहाजों पर काम कर रहे थे. अमेरिकी हमले में उनकी भी मौत हो गई.

पतनाला सुरेश कौन थे?

पतनाला सुरेश आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम के रहने वाले थे और एमटी सेटेबेलो पर मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) के पद पर तैनात थे. जहाज के तकनीकी संचालन और इंजन से जुड़ी जिम्मेदारियां उनके पास थीं.

सुरेश की पत्नी भार्गवी ने एएनआई से बातचीत में बताया कि शुरुआत में उन्हें सूचना मिली थी कि उनके पति समेत तीन चालक दल के सदस्य लापता हैं. बाद में उनकी मौत की पुष्टि हुई. भार्गवी ने कहा कि उन्होंने अधिकारियों से उनके पति के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द घर लाने की अपील की है. उन्होंने कहा, "वह जहाज पर लंबे समय तक बिना किसी मदद के फंसे रहे और इस घटना का शिकार हो गए. मैं सिर्फ यही चाहती हूं कि उनका पार्थिव शरीर जल्द से जल्द घर पहुंचाया जाए."

भारत ने अभी तक क्या किया?

भारत सरकार ने इस हमले की निंदा करते हुए एक वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक को तलब किया. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा, "इस तरह के हमले बंद होने चाहिए. हम संवाद और कूटनीति के जरिए जल्द से जल्द क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने की अपील करते हैं."

भारतीय नाविक संगठन के महासचिव मनोज यादव ने भी घटना पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि अमेरिकी नौसेना को पता था कि जहाज पर कितने भारतीय और अन्य विदेशी नागरिक मौजूद थे. यदि जहाज ने निर्देशों का पालन नहीं किया था, तो उसे जब्त किया जा सकता था, लेकिन मिसाइल हमला जरूरी नहीं था." भारत सरकार ने गुरुवार को कहा कि वह खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय झंडा लगे जहाजों और भारतीय चालक दल की गतिविधियों पर करीबी नजर रख रही है.

एमटी सेटेबेलो उन तीन टैंकरों में से एक है, जिन पर इस सप्ताह अमेरिकी मिसाइलों से हमला हुआ है और जिनमें भारतीय चालक दल के सदस्य मौजूद थे. इस घटनाक्रम ने नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है.

भारत दुनिया में समुद्री श्रमिकों की सबसे बड़ी आपूर्ति करने वाले देशों में से एक है. वैश्विक समुद्री कार्यबल में भारतीय नाविकों की हिस्सेदारी लगभग 15 प्रतिशत है. दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा होर्मुज से होकर गुजरता है, इसलिए खाड़ी देशों और तेल टैंकरों पर बड़ी संख्या में भारतीय नाविक काम करते हैं.

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