कनाडा में 20 साल की पंजाबी सुहाना गिल का कमाल, चुनाव जीतकर बनी पार्षद, बना रिकॉर्ड
कनाडा के सरे शहर में 20 साल की सुहाना गिल ने पार्षद बनकर नया रिकॉर्ड बनाया है. पंजाबी परिवार से आने वाली सुहाना ने कम उम्र में पढ़ाई पूरी की और राजनीति में अपनी पहचान बनाई. अब वह शहर के विकास और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर काम करेंगी.
20 साल की उम्र में सुहाना गिल बनीं कनाडा की सबसे युवा पार्षद
कनाडा में पंजाबी मूल की 20 साल की सुहाना गिल ने कम उम्र में बड़ी कामयाबी हासिल की है. वह ब्रिटिश कोलंबिया के सरे शहर की सबसे युवा पार्षद बन गई हैं. जिस उम्र में युवा अपनी पढ़ाई और नौकरी को लेकर सोचते हैं, उस उम्र में सुहाना ने राजनीति में कदम रखकर नया मुकाम हासिल किया है. उन्होंने 2 नवंबर को पद की शपथ ली.
सुहाना की इस सफलता के पीछे पढ़ाई के साथ सामाजिक और राजनीतिक कामों का अनुभव भी है. उन्होंने 15 साल की उम्र में स्कूल की पढ़ाई पूरी कर ली थी और 19 साल में स्नातक की डिग्री हासिल की. चुनाव के दौरान उन्होंने सस्ते घर, बेहतर यातायात और युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाया. उनकी जीत ने कनाडा की स्थानीय राजनीति में युवाओं की भागीदारी को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है.
कितने साल की उम्र में पूरी की स्कूली पढ़ाई?
सुहाना गिल का जन्म और पालन-पोषण कनाडा के सरे शहर में हुआ. उन्होंने महज 15 साल की उम्र में स्कूल की पढ़ाई पूरी कर ली थी. इसके बाद उन्होंने क्वांटलेन पॉलिटेक्निक यूनिवर्सिटी से राजनीति विज्ञान की पढ़ाई शुरू की और 19 साल की उम्र में स्नातक की डिग्री हासिल कर ली. कम उम्र में ही उन्होंने राजनीति और सामाजिक कामों में दिलचस्पी दिखानी शुरू कर दी थी. वह युवाओं से जुड़े मुद्दों और सामुदायिक कामों में भी सक्रिय रहीं.
कहां-कहां किया काम?
सुहाना का अनुभव सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रहा. वह कनाडा के हाउस ऑफ कॉमन्स के साथ काम कर चुकी हैं. इसके अलावा सीबीसी न्यूज के पैनल में भी शामिल हुईं और सामाजिक संस्थाओं से जुड़कर काम किया. उन्होंने रियल एस्टेट क्षेत्र में भी अनुभव हासिल किया. इस दौरान उन्हें घरों की बढ़ती कीमतों और आम परिवारों के सामने आने वाली मुश्किलों को करीब से समझने का मौका मिला.
क्यों बनाया युवाओं के मुद्दों को चुनावी एजेंडा?
सुहाना गिल ने 17 अक्टूबर को हुए स्थानीय चुनाव में डग मैक्कलम के नेतृत्व वाले सेफ सरे गठबंधन से चुनाव लड़ा. उनके चुनाव प्रचार में सस्ते घर, बेहतर सड़कें, सार्वजनिक सुरक्षा, परिवहन और युवाओं के लिए अवसर जैसे मुद्दे प्रमुख रहे. उनका मानना था कि शहर की बढ़ती आबादी के साथ सुविधाओं का विकास भी जरूरी है.सुहाना ने युवाओं की भागीदारी पर जोर देते हुए कहा कि उन्हें सिर्फ भविष्य के मतदाता के तौर पर नहीं देखना चाहिए, बल्कि शहर से जुड़े फैसलों में उनकी भी आवाज होनी चाहिए. उनका कहना है कि आज लिए गए फैसलों का असर आने वाले कई दशकों तक युवाओं और उनके परिवारों पर पड़ेगा.




