पश्चिम बंगाल में नगर निगम भर्ती घोटाले को लेकर बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक हड़कंप मचा हुआ है, जहां आरोप है कि नौकरियां योग्यता के बजाय पैसे, राजनीतिक पहुंच और कथित सेटिंग के आधार पर बांटी गईं. ईडी और सीबीआई की जांच में ओएमआर शीट में हेरफेर, मेरिट लिस्ट में बदलाव और नकद व प्रॉपर्टी डील के जरिए भर्ती कराने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं. इसी मामले में पूर्व मंत्री सुजीत बोस को गिरफ्तार किया गया है, जिनके ठिकानों से छापेमारी के दौरान नकदी और दस्तावेज बरामद हुए. जांच का दायरा कई नगर निकायों तक फैला हुआ है और इसमें अयान सील की कंपनी की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है, जो भर्ती प्रक्रिया का तकनीकी काम संभाल रही थी. पूरे मामले ने बंगाल की भर्ती प्रणाली और राजनीतिक संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.