भारत में जब भी धर्म और राजनीति आमने-सामने आते हैं, कुछ चेहरे अपने आप सुर्खियों में आ जाते हैं. इन्हीं में एक नाम है शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती. कभी उन्हें सनातन धर्म का मुखर रक्षक कहा जाता है, तो कभी उन पर राजनीतिक एजेंडा चलाने के आरोप लगते हैं. गोहत्या, संविधान, आरक्षण और हिंदू एकता जैसे मुद्दों पर उनके तीखे बयान अक्सर सत्ता और व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर देते हैं.