Budget 2026 और कृषि सेक्टर: PM-KISAN, Seed Law, एग्री-एक्सपोर्ट और Agri Stocks पर क्या होगा असर?
Budget 2026 भारत के कृषि सेक्टर को सब्सिडी-ड्रिवन मॉडल से सस्टेनेबल और टेक-ड्रिवन ग्रोथ की ओर ले जा सकता है. PM-KISAN, Seed Law और एग्री-एक्सपोर्ट से जुड़े फैसलों का असर Agri Stocks पर भी दिख सकता है.
Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 भारत के कृषि क्षेत्र के लिए सिर्फ सालाना खर्च का दस्तावेज नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक दिशा तय करने वाला पड़ाव साबित हो सकता है. बीते एक दशक में सरकार ने खेती और किसानों के लिए बजट आवंटन लगातार बढ़ाया है. जहां FY 2013-14 में कृषि बजट ₹21,933 करोड़ था, वहीं आज यह बढ़कर ₹1.27 लाख करोड़ से ज्यादा हो चुका है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अब फोकस केवल सब्सिडी बढ़ाने का नहीं, बल्कि खेती को ज्यादा टिकाऊ, टेक्नोलॉजी-आधारित और प्रोडक्टिव बनाने का है. द मिंट की रिपोर्ट के अनुसार Budget 2026 में PM-KISAN, फसल बीमा, सिंचाई, बीज कानून, एग्री-एक्सपोर्ट और इससे जुड़े क्षेत्रों जैसे पशुपालन, मत्स्य और बागवानी पर खास ध्यान दिया जा सकता है. इसका सीधा असर कृषि से जुड़े शेयरों (Agri Stocks) पर भी देखने को मिल सकता है.
कृषि बजट: सब्सिडी से सस्टेनेबिलिटी की ओर
भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान करीब 18-20% है और देश की आधी से ज्यादा आबादी की आजीविका इसी पर निर्भर है. विशेषज्ञों के मुताबिक, Union Budget 2026-27 में कृषि बजट को FY 2025-26 के ₹1.37 लाख करोड़ से बढ़ाकर करीब ₹1.5 लाख करोड़ किया जा सकता है. बोनांजा के रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी के अनुसार, सरकार का जोर अब तीन प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा - उत्पादकता (Productivity), सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) और किसानों की आय में स्थायी बढ़ोतरी. इसके लिए PM-KISAN, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और PM कृषि सिंचाई योजना के तहत आवंटन बढ़ने की संभावना है. इससे ग्रामीण मांग को सपोर्ट मिलेगा, जो ऑटो, FMCG और कंज्यूमर गुड्स सेक्टर के लिए भी अहम है.
PM-KISAN: क्या बढ़ेगी किस्त या कवरेज?
PM-KISAN योजना के तहत किसानों को सालाना ₹6,000 की मदद दी जाती है. बजट 2026 में इस रकम को बढ़ाने या योजना के दायरे को विस्तार देने की मांग फिर से उठ सकती है. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर सरकार डायरेक्ट इनकम सपोर्ट को मजबूत करती है, तो इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी बढ़ेगी, जिसका असर ट्रैक्टर, टू-व्हीलर, फर्टिलाइजर और बीज कंपनियों की बिक्री पर पड़ेगा.
Seed Law: नकली बीजों पर लगेगा शिकंजा
Budget Session 2026 में सरकार नया Seed Law Bill पेश कर सकती है. कृषि मंत्री पहले ही संकेत दे चुके हैं कि यह कानून नकली और घटिया बीज बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई के लिए लाया जाएगा. प्रस्तावित कानून के तहत ₹30 लाख तक का जुर्माना, 3 साल तक की जेल और बीज की गुणवत्ता पर कड़ा नियंत्रण रखने का प्रस्ताव है. इससे किसानों को नुकसान से बचाया जा सकेगा और खेती की उत्पादकता बढ़ेगी. बाजार के लिहाज से यह बीज कंपनियों के लिए बड़ा पॉजिटिव माना जा रहा है. Kaveri Seeds, Mangalam Seeds, Bombay Super Hybrid Seeds जैसी कंपनियों को इसका फायदा मिल सकता है.
फर्टिलाइजर और एग्रो-केमिकल सेक्टर पर असर
नई Seed Law और सस्टेनेबल खेती पर जोर का असर फर्टिलाइजर और एग्रो-केमिकल कंपनियों पर भी दिख सकता है. विशेषज्ञों के मुताबिक UPL, PI Industries, Sumitomo Chemical India, Bayer CropScience, Dhanuka Agritech जैसी कंपनियां बेहतर पोजिशन में हैं, क्योंकि इनका फोकस हाई-वैल्यू और स्पेशलिटी प्रोडक्ट्स पर है. सरकार अगर सब्सिडी सिस्टम को ज्यादा टार्गेटेड और एफिशिएंट बनाती है, तो इससे सेक्टर की बैलेंस शीट भी मजबूत हो सकती है.
पशुपालन, मत्स्य और बागवानी पर फोकस
Budget 2026 में सिर्फ फसल उत्पादन ही नहीं, बल्कि allied sectors पर भी खास ध्यान दिया जा सकता है. पशुपालन, डेयरी, फिशरीज और हॉर्टिकल्चर किसानों की आय बढ़ाने के अहम स्रोत बनते जा रहे हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि डेयरी और पोल्ट्री में वैल्यू एडिशन, फिशरीज में इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट और बागवानी के लिए कोल्ड-चेन और प्रोसेसिंग यूनिट - इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से Agri Logistics और Food Processing कंपनियों को भी फायदा होगा.
Agri Exports: 50 अरब डॉलर से आगे की राह
भारत के कृषि और फूड एक्सपोर्ट फिलहाल 50-55 अरब डॉलर के आसपास हैं. हालांकि, वैश्विक व्यापार में टैरिफ, जियोपॉलिटिकल टेंशन और सप्लाई चेन डिसरप्शन चुनौतियां बनी हुई हैं. बजट 2026 में सरकार - एक्सपोर्ट अप्रूवल को तेज कर सकती है, वैल्यू-एडेड एग्री प्रोडक्ट्स को प्रमोट कर सकती है और कोल्ड-चेन और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत कर सकती है. तुषार बडजाते के मुताबिक, लॉजिस्टिक्स लागत GDP के 13-14% तक आ चुकी है, जो पहले से बेहतर है. इससे किसानों और एग्री कंपनियों की मार्जिन सुधर सकती है.
Stock Market का नजरिया: कहां दिखेगा असली फायदा?
INVasset PMS के हर्षल दासानी के अनुसार, निवेशकों का फोकस अब सिर्फ बजट आवंटन पर नहीं, बल्कि - कंपनियों की बैलेंस शीट, अर्निंग्स विजिबिलिटी और लॉन्ग-टर्म ग्रोथ ट्रेंड पर है. फर्टिलाइजर, एग्रो-केमिकल, फार्म मशीनरी, सिंचाई उपकरण और एग्री-लॉजिस्टिक्स से जुड़ी कंपनियां स्ट्रक्चरल ग्रोथ की वजह से निवेशकों को आकर्षित कर सकती हैं. अच्छी मानसून स्थिति और ग्रामीण क्रेडिट में सुधार इस सेक्टर के लिए अतिरिक्त सपोर्ट का काम कर रहे हैं.
Budget 2026 क्यों अहम है कृषि शेयरों के लिए
विशेषज्ञों का मानना है कि Budget 2026 - सब्सिडी से प्रोडक्टिविटी की ओर बदलाव, टेक्नोलॉजी और डिजिटल एग्री पर जोर, एक्सपोर्ट और वैल्यू-एडिशन को बढ़ावा के जरिए खेती को एक मल्टी-ईयर ग्रोथ पाथ पर डाल सकता है. अगर ऐसा होता है, तो कृषि सेक्टर और उससे जुड़े स्टॉक्स सिर्फ बजट के आसपास नहीं, बल्कि लंबे समय तक निवेशकों के रडार पर बने रहेंगे.





