टाटा समूह में एक बार फिर Tata Sons और Tata Trusts के बीच संबंधों को लेकर चर्चा तेज हो गई है. 17 सितंबर की बोर्ड बैठक में एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर बोर्ड में 4:1 से समर्थन मिलने की बात सामने आई है. वहीं, नोएल टाटा और Tata Trusts की ओर से इससे जुड़े कुछ कानूनी सवाल उठाए जाने की चर्चा है. इस पूरे मामले में कंपनी के Articles of Association (AoA), Affirmative Voting Rights और 2016 के साइरस मिस्त्री विवाद का संदर्भ भी सामने आ रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या टाटा समूह में एक दशक पुराने विवाद जैसी परिस्थितियां फिर बन रही हैं?