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प्रोटेस्ट या प्रोफेशन? शाहीन बाग के 6 साल बाद मुस्लिम युवाओं के बीच शिक्षा और करियर को लेकर छिड़ी नई बहस

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From Shaheen Bagh to Silence? Why Many Muslim Youth Are Reconsidering Protest Politics

साल 2020 में दिल्ली का शाहीन बाग सिर्फ एक जगह नहीं था, बल्कि देश और दुनिया में लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शन का एक बड़ा प्रतीक बन गया था. महीनों तक चले आंदोलन ने नागरिकता कानून, लोकतांत्रिक अधिकारों और जनभागीदारी को लेकर राष्ट्रीय बहस को जन्म दिया. उस दौर में बड़ी संख्या में युवाओं ने सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज दर्ज कराई थी, लेकिन छह साल बाद तस्वीर कुछ बदली हुई नजर आ रही है. सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप्स, सामुदायिक बैठकों और परिवारों के भीतर अब एक नई चर्चा चल रही है. कई लोग युवाओं से कह रहे हैं कि विरोध-प्रदर्शनों में समय लगाने के बजाय शिक्षा, रोजगार, कारोबार और आर्थिक मजबूती पर अधिक ध्यान दिया जाए. वहीं दूसरी ओर एक वर्ग अब भी मानता है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराना उतना ही जरूरी है जितना व्यक्तिगत विकास.


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