सोने-चांदी की कीमतों में फिलहाल उतार-चढ़ाव बना रहेगा, जिस पर अमेरिका की नीतियों, महंगाई और ब्याज दरों का सीधा असर पड़ रहा है. शॉर्ट टर्म में ये बाजार निवेशकों को भ्रमित कर सकता है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि बार-बार खरीद-फरोख्त से बचना चाहिए. लंबी अवधि यानी 2 से 5 साल के निवेश में ही सोना-चांदी बेहतर रिटर्न दे सकते हैं, इसलिए धैर्य रखना और रोज-रोज के भाव देखने से बचना ही समझदारी है.