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‘दरवाजे खुले रखने चाहिए’, क्या पाकिस्तान पर बदल गया RSS का सुर? मोहन भागवत के बयान से उठे सवाल, जानें क्या बोले एक्सपर्ट

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RSS की Pakistan को लेकर नरम रुख क्यों? ग्लोबल होने की महत्वकांक्षा क्यों आई? | State Mirror Hindi
जीतेंद्र चौहान
By: जीतेंद्र चौहान

Published on: 20 Jun 2026 7:53 PM

आरएसएस लंबे समय से अखंड भारत की विचारधारा और पाकिस्तान को लेकर सख्त रुख के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन हाल के कुछ बयानों से संगठन के रुख में बदलाव की चर्चा शुरू हो गई है. आरएसएस महासचिव Dattatreya Hosabale और सरसंघचालक Mohan Bhagwat के पाकिस्तान को लेकर दिए गए बयानों ने राजनीतिक और रणनीतिक बहस को तेज कर दिया है. मोहन भागवत के बयान कि पाकिस्तान के लिए "दरवाजे खुले रखने चाहिए" को कुछ लोग कूटनीतिक बदलाव के संकेत के तौर पर देख रहे हैं. वहीं भारत सरकार की आधिकारिक नीति साफ रही है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते, यानी पाकिस्तान के साथ रिश्तों में सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है. सवाल उठ रहा है कि क्या आरएसएस पाकिस्तान को लेकर अपनी रणनीति बदल रहा है या ये बदलते वैश्विक हालात को देखते हुए एक नया विचार है. वरिष्ठ पत्रकार अनिल आनंद के अनुसार, आरएसएस और Narendra Modi सरकार के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मूल विचारधारा में दूरी नहीं हो सकती. उनका कहना है कि बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों और भारत की नई विदेश नीति के संदर्भ में आरएसएस के बयानों को समझना होगा. उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान को लेकर आरएसएस की नरमी के पीछे कूटनीतिक सोच हो सकती है, लेकिन भारत की वैश्विक छवि और सुरक्षा हितों को ध्यान में रखना जरूरी है. अब चर्चा इस बात की है कि क्या आरएसएस वास्तव में पाकिस्तान नीति को लेकर नई दिशा चाहता है या ये केवल एक वैचारिक और रणनीतिक संदेश है.