बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव ने अचानक राजनीतिक गर्मी बढ़ा दी है. चर्चा है कि जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर इस सीट से खुद चुनाव लड़ सकते हैं. विधानसभा चुनाव में खुद मैदान में नहीं उतरने वाले प्रशांत किशोर अब उपचुनाव के जरिए अपनी राजनीतिक ताकत परखना चाहते हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव उनके लिए "लिटमस टेस्ट" साबित होगा. बांकीपुर सीट पहले लगातार पांच बार बीजेपी के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन के पास रही है, इसलिए मुकाबला आसान नहीं माना जा रहा. प्रशांत किशोर हाल के दिनों में भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर रहे हैं. माना जा रहा है कि वे कानून-व्यवस्था, जवाबदेही और स्थानीय मुद्दों को चुनावी एजेंडा बना सकते हैं. हालांकि राजनीतिक समीकरण फिलहाल बीजेपी के पक्ष में बताए जा रहे हैं और उपचुनाव में सत्ता पक्ष को बढ़त मिलने की संभावना जताई जा रही है. एक्सपर्ट का मानना है कि प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी जीत से ज्यादा राजनीतिक संदेश देने की रणनीति हो सकती है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या प्रशांत किशोर बांकीपुर से अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत कर पाएंगे या बीजेपी अपना गढ़ बचाए रखेगी.