केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को मंजूरी दी है, जिसके तहत करीब 570 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. योजना का लक्ष्य तालाबों, झीलों, बांधों और जलाशयों पर फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाकर स्वच्छ बिजली का उत्पादन बढ़ाना है. इसके तहत देश में 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है. साथ ही 10,000 मेगावाट घंटे की बैटरी एनर्जी स्टोरेज क्षमता तैयार करने की योजना है, ताकि बिजली की आपूर्ति ज्यादा भरोसेमंद रहे. इस योजना से खेती की जमीन पर सोलर पैनल लगाने की जरूरत कम होगी और पानी के वाष्पीकरण में भी कमी आने की उम्मीद है. सफल परियोजनाओं के लिए प्रति मेगावाट 1 करोड़ रुपये तक की केंद्रीय सहायता और शुरुआती सर्वे-तकनीकी जांच के लिए 50 लाख रुपये तक की मदद का प्रावधान बताया गया है. इसका सीधा आवेदन आम नागरिकों के लिए नहीं है; राज्य सरकारें, सरकारी एजेंसियां, बिजली कंपनियां और पात्र निजी डेवलपर्स इसमें शामिल हो सकते हैं. सरकार के अनुमान के मुताबिक योजना से हर साल करीब 1 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन कम हो सकता है और 16,000-17,000 रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है.