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चंबल के बीहड़ों में फूलन देवी को मिला पहला प्यार, विक्रम मल्लाह ने कैसे बदली उनकी जिंदगी? जानिए दोनों की लव स्टोरी के बारे में

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चंबल के बीहड़ों की पहचान भले ही कभी डकैतों, हिंसा और बदले की कहानियों से रही हो, लेकिन इसी दुनिया में फूलन देवी की जिंदगी का एक ऐसा अध्याय भी लिखा गया, जिसने उनकी सोच और जीवन को गहराई से प्रभावित किया. फूलन देवी का बचपन बेहद संघर्षपूर्ण रहा और कम उम्र में हुई शादी के बाद उनके जीवन में मुश्किलें कम नहीं हुईं. आगे चलकर हालात उन्हें चंबल के बीहड़ों तक ले गए. बीहड़ में डकैत बाबू गुर्जर के गिरोह के बीच फूलन को फिर हिंसा और अत्याचार का सामना करना पड़ा। इसी दौरान विक्रम मल्लाह उनके लिए सहारा बनकर सामने आए. फूलन के साथ हो रहे व्यवहार का विक्रम ने विरोध किया और दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं. बाद में विक्रम ने गिरोह की कमान संभाली और फूलन को सुरक्षा के साथ बराबरी और सम्मान भी दिया. विक्रम ने फूलन को हथियार चलाना सिखाया, जिससे उनके भीतर आत्मरक्षा और मुकाबले का आत्मविश्वास बढ़ा. यही दौर फूलन की जिंदगी में उनके पहले प्रेम और बदलाव के दौर के तौर पर देखा जाता है. हालांकि यह रिश्ता ज्यादा लंबा नहीं चला। गिरोह के भीतर सत्ता और विरोध की खींचतान के बीच विक्रम मल्लाह की हत्या कर दी गई, जिसके बाद फूलन की जिंदगी ने एक और हिंसक मोड़ लिया. विक्रम की हत्या के बाद की घटनाओं को आगे चलकर चर्चित बेहमई कांड से जोड़कर देखा गया. इसके बाद फूलन लंबे समय तक जेल में रहीं और 1994 में रिहा होने के बाद उनका जीवन एक नए दौर में पहुंचा. जेल से बाहर आने के बाद फूलन देवी ने उमेश सिंह से विवाह किया और राजनीति में कदम रखा. बाद में सांसद बनीं, लेकिन चंबल के बीहड़ों में विक्रम मल्लाह के साथ उनके रिश्ते की कहानी उनकी जिंदगी के सबसे चर्चित अध्यायों में बनी रही.


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