मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध अब सिर्फ इजराइल और ईरान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें अमेरिका की एंट्री के बाद हालात और जटिल हो गए हैं. यह पारंपरिक जमीन की लड़ाई नहीं, बल्कि मिसाइल, ड्रोन और इंटेलिजेंस पर आधारित आधुनिक युद्ध बन चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर अमेरिका “बूट्स ऑन ग्राउंड” यानी जमीनी सेना भेजता है, तो कब्जा करना संभव हो सकता है, लेकिन लंबे समय तक टिकना बेहद मुश्किल होगा. वहीं, ईरान भी पूरी तरह पीछे हटने के मूड में नहीं है, जिससे संघर्ष लंबा खिंच सकता है. इस युद्ध का सबसे बड़ा असर पूरी दुनिया, खासकर भारत जैसे देशों पर पड़ेगा, जो ऊर्जा (तेल) के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर हैं.