बजट सत्र के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की चर्चा ने संसद की राजनीति को गरमा दिया है. इस मुद्दे पर संवैधानिक मामलों के जानकार और पूर्व लोकसभा महासचिव जीसी मल्होत्रा ने कहा कि इतिहास गवाह है कि इससे पहले भी स्पीकर के खिलाफ ऐसे प्रस्ताव लाए गए हैं, लेकिन वे कभी सफल नहीं हो पाए. स्टेट मिरर हिंदी से बात करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 1954 और 1966 में भी लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन दोनों ही बार वह सदन में गिर गया. मल्होत्रा का कहना है कि मौजूदा राजनीतिक गणित को देखते हुए 2026 में भी यह प्रस्ताव पारित होना संभव नहीं दिखता, क्योंकि विपक्ष के पास आवश्यक संख्या बल मौजूद नहीं है.