इस्लामाबाद में हुई ईरान, अमेरिका और इजराइल से जुड़ी शांति वार्ता पूरी तरह विफल रही, जिसके बाद अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी लौट गए. रक्षा विशेषज्ञ कर्नल शैलेंद्र सिंह के मुताबिक, इस बातचीत की नाकामी की सबसे बड़ी वजह कमजोर और पक्षपाती मध्यस्थता रही. उनका कहना है कि किसी भी शांति प्रक्रिया के लिए निष्पक्ष और भरोसेमंद मध्यस्थ जरूरी होता है, जो यहां नजर नहीं आया. शैलेंद्र सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने इस पहल को गंभीर कूटनीतिक प्रयास की बजाय प्रोपेगेंडा के तौर पर इस्तेमाल किया. अमेरिका और ईरान अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े रहे, जिससे कोई साझा समाधान नहीं निकल सका. हालांकि, 14 दिन के सीजफायर को देखते हुए अब भी उम्मीद जताई जा रही है कि ओमान जैसे देश दोबारा मध्यस्थता कर इस तनाव को कम करने की कोशिश कर सकते हैं.