NEET पेपर लीक के विरोध से शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब आरक्षण (Reservation) जैसे संवेदनशील मुद्दे तक पहुंच गया है. आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों ने जाति आधारित आरक्षण की जगह आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग उठाई, जिसके बाद सोशल मीडिया पर इस विषय पर बहस तेज हो गई. दावा किया जा रहा है कि आंदोलन से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स के फॉलोअर्स में 48 घंटे के भीतर 20 लाख से अधिक की बढ़ोतरी हुई. आरक्षण पर बहस ने युवाओं, राजनीतिक दलों और सोशल मीडिया यूजर्स के बीच अलग-अलग राय पैदा कर दी . समर्थक इसे मेरिट और समान अवसर का सवाल बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे सामाजिक न्याय से जुड़ा मुद्दा मानते हैं. आने वाले दिनों में यह बहस राजनीतिक रूप से भी अहम हो सकती है. फिलहाल यह देखना बाकी है कि यह ऑनलाइन चर्चा तक सीमित रहती है या व्यापक राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनती है.