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Siwan Violence: छात्रों के पत्थर का जवाब AK-47 से, कॉन्स्टेबल सस्पेंड, FIR दर्ज; जानिए अब तक क्या-क्या हुआ

बिहार के सीवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान AK-47 से हवा में फायरिंग का वीडियो वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ गया है. वीडियो में दिख रहे कॉन्स्टेबल अभिषेक कुमार को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है और मामले में एफआईआर भी दर्ज हुई है.

Siwan Violence: छात्रों के पत्थर का जवाब AK-47 से, कॉन्स्टेबल सस्पेंड, FIR दर्ज; जानिए अब तक क्या-क्या हुआ
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सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी5 Mins Read

Published on: 27 July 2026 11:05 PM

दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब बिहार के सीवान तक पहुंचकर नए विवाद में बदल गया है. पहले दिल्ली में प्रदर्शन को लेकर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठे, फिर बिहार बंद के दौरान सीवान में छात्र प्रदर्शन के बीच AK-47 से फायरिंग का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. वीडियो सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार और पुलिस को घेर लिया, जबकि बिहार पुलिस ने पूरे घटनाक्रम पर सफाई देते हुए जांच शुरू कर दी है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर छात्र प्रदर्शन के दौरान AK-47 जैसी असॉल्ट राइफल का इस्तेमाल क्यों हुआ और अब तक इस मामले में क्या-क्या कार्रवाई हुई है?

20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के बाद देशभर में विरोध तेज हो गया. इसी क्रम में 25 जुलाई को कथित NEET पेपर लीक और छात्र आंदोलन के समर्थन में बिहार बंद बुलाया गया. सीवान में प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हो गया. पुलिस का आरोप है कि भीड़ ने पथराव किया, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और सुरक्षाकर्मियों को घेर लिया. इसी दौरान एक वीडियो सामने आया, जिसमें एक पुलिसकर्मी AK-47 से हवा में फायरिंग करता दिखाई देता है. वीडियो वायरल होते ही मामला राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया.

AK-47 की फायरिंग पर क्यों उठा विवाद?

वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले पुलिसकर्मी की पहचान कांस्टेबल अभिषेक कुमार के रूप में हुई. विपक्ष ने आरोप लगाया कि छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग किया. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए सवाल उठाया कि क्या छात्र आंदोलन को नियंत्रित करने के लिए AK-47 जैसी राइफल का इस्तेमाल पुलिस मैनुअल के अनुरूप है.

पुलिस की सफाई क्या है?

बिहार पुलिस का कहना है कि कांस्टेबल ने भीड़ द्वारा घेर लिए जाने के बाद अपनी सुरक्षा, सरकारी संपत्ति और अन्य पुलिसकर्मियों की रक्षा के लिए हवा में चार राउंड फायर किए. पुलिस का दावा है कि इस फायरिंग से कोई व्यक्ति घायल नहीं हुआ. हालांकि प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि कांस्टेबल को इस तरह फायरिंग करने का कोई आदेश नहीं दिया गया था.

अब तक क्या-क्या कार्रवाई हुई?

मामले के तूल पकड़ने के बाद सीवान पुलिस ने संबंधित कांस्टेबल अभिषेक कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है. जिला प्रशासन ने भी माना कि सार्वजनिक स्थान पर AK-47 लेकर जाना और बिना अनुमति फायरिंग करना उचित नहीं था. जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.

तीन लोगों को लगी गोली, तीन FIR दर्ज

पुलिस के अनुसार हिंसा के दौरान तीन नागरिक गोली लगने से घायल हुए. इनमें 17 वर्षीय मोहम्मद आरिफ, 22 वर्षीय आकाश कुमार और 20 वर्षीय बुलेट कुमार गोंड शामिल हैं. पुलिस का कहना है कि ये तीनों उस स्थान से कुछ दूरी पर घायल मिले जहां कांस्टेबल ने फायरिंग की थी. तीनों घायलों के बयान के आधार पर अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं और यह जांच की जा रही है कि उन्हें लगी गोलियां किस हथियार से चली थीं. डॉक्टरों के अनुसार तीनों की हालत अब खतरे से बाहर है.

हिंसा में कितना नुकसान हुआ?

बिहार पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक राज्यभर में हुई हिंसा में दर्जनों पुलिसकर्मी घायल हुए. सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचा और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया. बाद में बिहार सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और गिरफ्तार छात्रों को रिहा करने की घोषणा भी की.

सबसे बड़ा सवाल अभी भी बाकी

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि यदि फायरिंग केवल हवा में की गई थी तो तीन लोगों को गोली कैसे लगी? क्या सभी गोलियां पुलिस की थीं या किसी अन्य स्रोत से चलीं? क्या भीड़ में किसी और ने भी फायरिंग की? इन सवालों के जवाब फिलहाल जांच पर निर्भर हैं. पुलिस का कहना है कि बैलिस्टिक जांच, एफआईआर, वीडियो फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा.

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