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अब प्लास्टिक के होंगे ₹10 और ₹20 के नोट? जानिए कब आपकी जेब में आएगी नई करेंसी

अगर आपके मन में भी यही सवाल है तो इसका जवाब आ गया है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ₹10 और ₹20 के पॉलिमर (Plastic) बैंक नोटों का फील्ड ट्रायल शुरू करने की तैयारी कर ली है. केंद्र सरकार ने भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.

अब प्लास्टिक के होंगे ₹10 और ₹20 के नोट? जानिए कब आपकी जेब में आएगी नई करेंसी
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सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी4 Mins Read

Published on: 27 July 2026 9:24 PM

क्या भारत में जल्द ही कागज के नोटों की जगह प्लास्टिक के नोट चलेंगे? अगर आपके मन में भी यही सवाल है तो इसका जवाब आ गया है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ₹10 और ₹20 के पॉलिमर (Plastic) बैंक नोटों का फील्ड ट्रायल शुरू करने की तैयारी कर ली है. केंद्र सरकार ने भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि मौजूदा कागज के नोट बंद होने वाले हैं. आइए जानते हैं आखिर प्लास्टिक नोट क्या हैं, इन्हें क्यों लाया जा रहा है और इससे आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

RBI क्यों ला रहा है प्लास्टिक के नोट?

लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने जानकारी दी कि RBI के केंद्रीय निदेशक मंडल की सिफारिश पर केंद्र सरकार को ₹10 और ₹20 के पॉलिमर बैंक नोटों के फील्ड ट्रायल का प्रस्ताव भेजा गया था. सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.

इसके तहत शुरुआती चरण में-

  • ₹10 के 100 करोड़ नोट
  • ₹20 के 100 करोड़ नोट

यानी कुल 200 करोड़ प्लास्टिक नोट छापे जाएंगे. इनकी कुल फेस वैल्यू करीब ₹3,000 करोड़ होगी.

क्या बंद हो जाएंगे कागज के नोट?

इस सवाल का जवाब RBI ने साफ कर दिया है. रिजर्व बैंक के मुताबिक फिलहाल कागज के नोटों को बंद करने की कोई योजना नहीं है. प्लास्टिक के नोट कागज के नोटों के साथ-साथ चलेंगे. यानी दोनों तरह की करेंसी एक साथ प्रचलन में रहेंगी.

आखिर प्लास्टिक नोट होते क्या हैं?

प्लास्टिक नोट सामान्य प्लास्टिक से नहीं, बल्कि पॉलिमर (Polymer Substrate) नामक विशेष सामग्री से बनाए जाते हैं. इनकी खासियत यह है कि-

  • जल्दी फटते नहीं हैं.
  • पानी से खराब नहीं होते.
  • गंदे कम होते हैं.
  • नकली नोट बनाना मुश्किल होता है.
  • इनकी उम्र कागज के नोटों से कई गुना अधिक होती है.

पहले ₹10 और ₹20 के नोट ही क्यों चुने गए?

RBI ने शुरुआत छोटे मूल्य के नोटों से करने का फैसला किया है क्योंकि यही नोट सबसे ज्यादा इस्तेमाल होते हैं. हालांकि इनकी कुल कीमत कम होती है, लेकिन संख्या के हिसाब से ये भारतीय अर्थव्यवस्था में सबसे अधिक घूमने वाले नोटों में शामिल हैं.

आंकड़ों के अनुसार ₹10 और ₹20 के नोट कुल नोटों की संख्या का लगभग 25% हिस्सा हैं. लेकिन इनकी कुल मूल्य हिस्सेदारी सिर्फ करीब 1.3% है. यही वजह है कि ट्रायल के लिए इन्हें सबसे उपयुक्त माना गया. भारत में पहली बार नहीं हो रहा ऐसा प्रयोग. यह पहली बार नहीं है जब RBI प्लास्टिक नोटों का परीक्षण कर रहा है. साल 2009 में भी RBI ने ₹10 के प्लास्टिक नोटों का ट्रायल शुरू करने की योजना बनाई थी. उस समय इनका परीक्षण इन शहरों में होना था-

  • कोच्चि
  • मैसूर
  • शिमला
  • जयपुर
  • भुवनेश्वर

इन शहरों का चयन अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए किया गया था ताकि यह जांचा जा सके कि प्लास्टिक नोट गर्मी, ठंड और नमी में कितना टिकाऊ है. हालांकि तकनीकी और अन्य कारणों से वह प्रयोग आगे नहीं बढ़ पाया. हाल ही में RBI की सहायक कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने करोड़ों पॉलिमर शीट खरीदने के लिए वैश्विक टेंडर जारी किया है.

टेंडर में कहा गया है कि फिलहाल यह तत्काल आवश्यकता के लिए खरीदी जा रही हैं. यदि फील्ड ट्रायल सफल रहता है तो भविष्य में अन्य मूल्यवर्ग के नोटों के लिए भी बड़ी मात्रा में पॉलिमर सामग्री खरीदी जा सकती है. इससे संकेत मिलता है कि भविष्य में ₹50, ₹100 या अन्य नोटों पर भी विचार किया जा सकता है, हालांकि इस बारे में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.

आम लोगों के लिए क्या बदलेगा?

यदि ट्रायल सफल रहता है तो लोगों को ऐसे नोट मिल सकते हैं जो ज्यादा समय तक चलेंगे. जल्दी खराब नहीं होंगे. बारिश और नमी से प्रभावित नहीं होंगे. नकली नोटों की समस्या कम कर सकते हैं. सरकार की नोट छपाई की लागत लंबे समय में घटा सकते हैं. हालांकि शुरुआती दौर में आम लोगों को कागज और प्लास्टिक- दोनों प्रकार के नोट देखने को मिलेंगे.

क्या प्लास्टिक नोट विदेशों में भी चलते हैं?

जी हां. दुनिया के कई देशों में पॉलिमर नोट पहले से इस्तेमाल किए जा रहे हैं. इनमें प्रमुख हैं:

  • ऑस्ट्रेलिया
  • कनाडा
  • न्यूजीलैंड
  • यूनाइटेड किंगडम
  • सिंगापुर
  • वियतनाम
  • रोमानिया

इन देशों में प्लास्टिक नोटों ने नकली करेंसी रोकने और नोटों की उम्र बढ़ाने में बेहतर परिणाम दिए हैं.

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