भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति तेजी से आगे बढ़ रही है, जिसकी वजह से इथेनॉल सेक्टर से जुड़ी कंपनियां निवेशकों की नजर में आ गई हैं. सरकार का लक्ष्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और जैव ईंधन को बढ़ावा देना है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है, इसलिए इथेनॉल जैसे विकल्पों को भविष्य के ईंधन के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि इस सेक्टर का प्रदर्शन सीधे तौर पर चीनी उद्योग, गन्ने की पैदावार और सरकारी नीतियों से जुड़ा है. इसी वजह से इथेनॉल से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी के साथ-साथ उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ चर्चा या तेजी देखकर निवेश करना सही नहीं होगा. किसी भी कंपनी में पैसा लगाने से पहले उसके बिजनेस, वित्तीय स्थिति और लंबे समय की संभावनाओं को समझना जरूरी है.