जंतर-मंतर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों और युवाओं ने जश्न मनाया. कई प्रदर्शनकारियों ने इसे छात्र आंदोलन और युवाओं की एक बड़ी लोकतांत्रिक जीत बताया. गाजियाबाद से आए एक पिता-पुत्र ने कहा कि वे आंदोलन में शामिल होने के लिए खुद खिंचे चले आए और अब उन्हें लाठीचार्ज या आंसू गैस का डर नहीं है. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इस फैसले से सरकार में जवाबदेही तय होने का संदेश गया है. हालांकि, कई छात्रों ने कहा कि उनकी सभी मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं और मृतक छात्रों के परिवारों को मुआवजा तथा अन्य मुद्दों पर कार्रवाई अभी बाकी है. मणिपुर से आए छात्रों ने भी सरकार से वहां की स्थिति पर ध्यान देने और शिक्षा प्रभावित छात्रों को न्याय देने की मांग की. कई युवाओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की शुरुआत है. प्रदर्शन में शामिल कानून की तैयारी कर रही छात्राओं और अन्य युवाओं ने इसे Gen Z की जागरूकता और लोकतांत्रिक भागीदारी का उदाहरण बताया. जंतर-मंतर पर देर तक नारेबाजी, जश्न और चर्चाओं का माहौल बना रहा. कुल मिलाकर प्रदर्शनकारियों ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया.