रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO की विकसित पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की तकनीक भारतीय उद्योग को ट्रांसफर करने की मंजूरी दी है. रिटायर्ड एयर कमोडोर कार्तिकेय काले के मुताबिक यह फैसला भारत की आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन नीति को और मजबूत करेगा. इससे निजी भारतीय कंपनियां आधुनिक मिसाइल प्रणालियों के उत्पादन में बड़ी भूमिका निभा सकेंगी और विदेशी हथियारों पर निर्भरता घटेगी. स्वदेशी उत्पादन बढ़ने से रक्षा खरीद पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा को बचाने और देश में रोजगार व औद्योगिक क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है. काले ने DRDO के इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (IGMDP) और पृथ्वी-अग्नि जैसी मिसाइल प्रणालियों का उदाहरण दिया. उनके मुताबिक भारत अब मिसाइल उत्पादन की क्षमता बढ़ाकर घरेलू जरूरत पूरी करने के साथ मित्र देशों को भी निर्यात का बड़ा केंद्र बन सकता है. ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों के उत्पादन में भारतीय उद्योग की बढ़ती भूमिका को उन्होंने इसी बदलाव का उदाहरण बताया. हालांकि मिसाइल तकनीक का वास्तविक उत्पादन, क्षमता और निर्यात कितना बढ़ेगा, यह कंपनियों को मिलने वाली तकनीक, ऑर्डर और उत्पादन क्षमता पर निर्भर करेगा.