2017 में सहारनपुर की जातीय हिंसा ने पूरे उत्तर प्रदेश की सियासत को हिला दिया था. शब्बीरपुर से शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसा, आगजनी और टकराव में बदल गया और इसी उथल-पुथल के बीच एक नया चेहरा तेजी से उभरा- चंद्रशेखर आजाद उर्फ ‘रावण’. उस वक्त भीम आर्मी के जरिए पहचान बना रहे चंद्रशेखर पर हिंसा भड़काने समेत कई आरोप लगे, वह लंबे समय तक पुलिस की नजर से बचते रहे और आखिरकार हिमाचल प्रदेश के डलहौजी से गिरफ्तार किए गए. इसके बाद NSA के तहत करीब 15 महीने जेल में रहे. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. जेल से बाहर निकलने के बाद वही चंद्रशेखर आजाद सियासत के मैदान में उतरे और नगीना से सांसद बनकर संसद पहुंच गए. आखिर सहारनपुर के उस ‘रावण’ का राजनीतिक सफर कैसे बदला और पुलिस की नजरों से बच रहा चंद्रशेखर एक दिन सांसद कैसे बन गया?