संजय भाटिया कौन हैं? ABVP से राज्यसभा तक का सफर, करनाल में रिकॉर्ड जीत और BJP में बढ़ता कद
संजय भाटिया कौन हैं? जानिए ABVP से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर, 2019 की रिकॉर्ड करनाल जीत, राज्यसभा तक पहुंच और BJP में बढ़ती जिम्मेदारियों की पूरी कहानी.
भारतीय जनता पार्टी ने गुरुवार को अलग-अलग मोर्चों के लिए प्रभारियों का ऐलान किया, जिसके बाद हरियाणा के राज्यसभा सांसद संजय भाटिया एक बार फिर चर्चा में हैं. पार्टी ने उन्हें अनुसूचित जाति (SC) मोर्चा का प्रभारी बनाया है. संगठन में लगातार बढ़ती जिम्मेदारियों के साथ भाटिया की राजनीतिक यात्रा एक बार फिर सुर्खियों में है.
संजय भाटिया की पहचान सिर्फ 2019 में करनाल लोकसभा सीट पर मिली रिकॉर्ड जीत तक सीमित नहीं है. वह लंबे समय से भाजपा के संगठन में सक्रिय रहे हैं और हरियाणा की राजनीति में पार्टी के मजबूत संगठनात्मक चेहरों में गिने जाते हैं. आइए जानते हैं कौन हैं संजय भाटिया, उनका राजनीतिक सफर कैसे आगे बढ़ा और कैसे संगठन के कार्यकर्ता से संसद तक पहुंचे.
पानीपत से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
संजय भाटिया का जन्म 29 जुलाई 1967 को हरियाणा के पानीपत में हुआ. उन्होंने पानीपत के आईबी कॉलेज से पढ़ाई की और स्नातक की डिग्री हासिल की. छात्र जीवन से ही उनका जुड़ाव भाजपा की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से हो गया था. यहीं से उनके राजनीतिक सफर की नींव पड़ी. शुरुआती दौर में उन्होंने संगठन के छोटे स्तर की जिम्मेदारियां संभालीं और धीरे-धीरे भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में अपनी जगह बनाते चले गए.
ABVP से BJP संगठन तक बढ़ता गया कद
संजय भाटिया ने छात्र राजनीति से निकलकर भाजपा के युवा संगठन में भी सक्रिय भूमिका निभाई. उपलब्ध प्रोफाइल के मुताबिक, वह 1990 के दशक में भाजपा युवा मोर्चा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों तक पहुंचे और बाद में हरियाणा भाजपा के संगठन में भी उनकी भूमिका बढ़ती गई. 2015 से 2021 के बीच वह हरियाणा भाजपा के प्रदेश महासचिव रहे. इस दौरान संगठन से जुड़े कई महत्वपूर्ण कामों में उनकी सक्रिय भूमिका रही. यही संगठनात्मक अनुभव आगे चलकर उनके राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी ताकत बना.
2019 में करनाल से चुनाव और रिकॉर्ड जीत
संजय भाटिया को राष्ट्रीय स्तर पर सबसे बड़ी पहचान 2019 के लोकसभा चुनाव से मिली. भाजपा ने उन्हें करनाल लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था. उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप शर्मा को 6,56,142 वोटों के अंतर से हराया. भाटिया को 9,11,594 वोट मिले, जबकि कुलदीप शर्मा को 2,55,452 वोट मिले. यह जीत उस समय हरियाणा की राजनीति में बेहद बड़ी मानी गई. उनकी जीत का अंतर इतना बड़ा था कि वह देश में भी सबसे चर्चित लोकसभा जीतों में शामिल हो गई.
मनोहर लाल खट्टर के करीबी नेताओं में गिने गए
संजय भाटिया को हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के करीबी नेताओं में भी गिना जाता रहा है. 2019 के चुनाव के दौरान मीडिया रिपोर्टों में उन्हें खट्टर का करीबी और भाजपा संगठन का भरोसेमंद चेहरा बताया गया था. भाटिया की पहचान ऐसे नेता की रही है जो लंबे समय तक चुनावी राजनीति के साथ-साथ संगठन के काम में भी सक्रिय रहे.
2024 में लोकसभा से बाहर, फिर राज्यसभा में वापसी
2019 में करनाल से सांसद बनने के बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इस सीट से मनोहर लाल खट्टर को मैदान में उतारा और उन्होंने जीत दर्ज की. इस तरह संजय भाटिया का लोकसभा कार्यकाल समाप्त हुआ. लेकिन उनकी राजनीतिक यात्रा यहीं नहीं रुकी. 2026 में उन्हें हरियाणा से राज्यसभा के लिए चुना गया, जिसके साथ उन्होंने संसद के उच्च सदन में वापसी की. उपलब्ध प्रोफाइल के मुताबिक, उनका राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल 2026 से शुरू हुआ है.
संगठन में लगातार बढ़ रही जिम्मेदारी
संजय भाटिया की राजनीति की खास बात यह रही है कि उनका सफर सिर्फ चुनाव लड़ने और जीतने तक सीमित नहीं रहा. भाजपा में उनकी पहचान एक संगठनात्मक रणनीतिकार और जमीनी कार्यकर्ता के तौर पर भी बनी. अब भाजपा ने उन्हें SC मोर्चा का प्रभारी बनाया है. यह जिम्मेदारी ऐसे समय में मिली है जब पार्टी अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच संगठन को मजबूत करने पर जोर दे रही है.
संजय भाटिया की राजनीतिक पहचान क्या है?
संजय भाटिया की कहानी को तीन चरणों में समझा जा सकता है- ABVP से संगठन की राजनीति, संगठन से लोकसभा और फिर लोकसभा से राज्यसभा. पानीपत से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर उन्हें करनाल की रिकॉर्ड लोकसभा जीत तक लेकर गया. इसके बाद राज्यसभा में पहुंचने और अब पार्टी के SC मोर्चे की जिम्मेदारी मिलने से साफ है कि भाजपा संगठन में उनकी भूमिका लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है. यही वजह है कि संजय भाटिया को सिर्फ 2019 के रिकॉर्ड जीत वाले सांसद के तौर पर नहीं, बल्कि भाजपा के लंबे समय से सक्रिय संगठनात्मक चेहरों में गिना जाता है.




