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अमेरिका में ‘Mr Singh’ को लेकर क्यों हो रहा विवाद? DHS के AI पोस्टर पर सिख और हिंदू संगठनों ने जताया विरोध, जानें पूरा मामला

अमेरिका के DHS ने एक AI पोस्टर में ‘Mr Singh’ को खराब ड्राइविंग और अप्रवासियों के खिलाफ अभियान से जोड़ दिया, जिसके बाद सिख और हिंदू संगठनों ने विरोध जताया. विवाद इसलिए बढ़ा क्योंकि ‘Singh’ एक आम भारतीय उपनाम है और इसे किसी एक समुदाय या ड्राइविंग क्षमता से जोड़ना गलत माना जा रहा है.

US DHS ‘Mr Singh’ AI Poster Sparks Backlash From Sikh and Hindu Groups
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( Image Source:  https://x.com/DHSgov )

अमेरिका में अप्रवासियों को लेकर ट्रंप प्रशासन की सख्त नीतियों के बीच अब एक आम भारतीय उपनाम ‘Singh’ विवाद का केंद्र बन गया है. TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी यानी DHS के आधिकारिक X अकाउंट से एक AI-generated पोस्टर साझा किया गया, जिसमें ‘Mr Singh’ को निशाना बनाते हुए इमिग्रेशन और ड्राइविंग से जुड़ा संदेश दिया गया. पोस्ट के बाद सिख, हिंदू, पंजाबी अमेरिकी और अप्रवासी संगठनों ने सरकार के संदेश पर सवाल उठाए हैं.

DHS के पोस्टर में Transformers जैसी शैली में एक भूरे रंग की दाढ़ी वाले व्यक्ति को दिखाया गया है, जिसके सिर पर कपड़ा बंधा हुआ है. उसके सामने DHS की ब्रांडिंग वाला एक विशाल रोबोट नजर आता है. पोस्टर पर लिखा है, “America for Americans. Get off our roads, you don’t know how to drive, Mr Singh.” यानी अमेरिका अमेरिकियों के लिए है और ‘मिस्टर सिंह’ को अमेरिकी सड़कों से हटने की बात कही गई है.

पोस्ट में ‘self-deportation’ यानी अप्रवासियों के खुद अमेरिका छोड़ने की अवधारणा का भी जिक्र किया गया है. यह संदेश ट्रंप प्रशासन के उस व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसमें विदेशी मूल के लोगों और विशेष रूप से कमर्शियल ट्रक ड्राइवरों के खिलाफ इमिग्रेशन और सड़क सुरक्षा से जुड़े नियमों को सख्त करने पर जोर दिया जा रहा है.

‘Singh’ उपनाम को लेकर क्यों मचा विवाद?

  • विवाद की सबसे बड़ी वजह यह है कि ‘Singh’ भारत में बेहद आम उपनाम है और इसका इस्तेमाल खास तौर पर सिख समुदाय में व्यापक रूप से होता है, लेकिन यह केवल सिखों तक सीमित नहीं है. हिंदू समुदाय के लोग भी सिंह उपनाम का इस्तेमाल करते हैं.
  • इसी वजह से सिख और हिंदू संगठनों ने सवाल उठाया है कि अमेरिकी सरकार के आधिकारिक अभियान में किसी खास भारतीय उपनाम को ड्राइविंग और अप्रवासन संबंधी नकारात्मक संदेश के साथ जोड़ना क्या उचित है.
  • Sikh Coalition ने कहा कि इस तरह की तस्वीरें सिखों को उनके पहनावे और शक्ल-सूरत के आधार पर निशाना बनाए जाने की पुरानी समस्या को बढ़ा सकती हैं. संगठन ने अमेरिका में सिख समुदाय के खिलाफ पहले हुई हिंसा की घटनाओं का भी संदर्भ दिया.

9/11 के बाद सिखों को झेलनी पड़ी थी हिंसा

  • अमेरिका में सिख समुदाय के लिए यह विवाद इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों के बाद कई सिखों को उनकी पगड़ी और दाढ़ी की वजह से गलती से मुस्लिम समझ लिया गया था.
  • 9/11 हमलों के सिर्फ चार दिन बाद एरिजोना में गैस स्टेशन चलाने वाले बलबीर सिंह सोढ़ी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हमलावर ने कथित तौर पर उन लोगों को निशाना बनाने की बात कही थी, जिन्हें वह 9/11 हमलों से जोड़ता था.
  • इसके बाद 2012 में विस्कॉन्सिन के ओक क्रीक स्थित एक गुरुद्वारे में गोलीबारी की घटना सामने आई थी, जिसमें छह लोगों को जान गंवानी पड़ी थी.
  • यही वजह है कि सिख संगठनों का कहना है कि सरकारी संचार में किसी सिख पहचान से जुड़े नाम या पहनावे को नकारात्मक संदर्भ में दिखाना सामान्य सोशल मीडिया पोस्ट से कहीं ज्यादा गंभीर असर डाल सकता है.

हिंदू संगठनों ने भी जताई नाराजगी

DHS के पोस्ट पर सिर्फ सिख संगठनों ने ही आपत्ति नहीं जताई. Hindu American Foundation ने भी इस संदेश को लेकर सवाल उठाए. फाउंडेशन ने कहा कि ‘Singh’ केवल सिख पहचान का प्रतीक नहीं है. उसके मुताबिक सिंह उपनाम वाले लोग हिंदू भी हैं, सिख भी हैं और अमेरिकी नागरिक भी हो सकते हैं. संगठन ने DHS के पोस्ट को anti-Indian profiling से जोड़ते हुए सरकारी संदेश की समीक्षा की मांग की है.

ट्रक ड्राइवरों पर ट्रंप प्रशासन की सख्ती क्यों?

यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब ट्रंप प्रशासन विदेशी मूल के और non-domiciled commercial drivers पर सख्ती कर रहा है. इस अभियान के पीछे 2025 में हुए कई हाई-प्रोफाइल सड़क हादसों का हवाला दिया गया है। इनमें सबसे चर्चित मामला अगस्त 2025 में फ्लोरिडा टर्नपाइक पर हुआ हादसा था, जिसमें हरजिंदर सिंह नाम के ड्राइवर से जुड़ी दुर्घटना में तीन लोगों की मौत हुई थी.

इसके बाद संघीय नियामकों ने non-domiciled Commercial Driver’s Licenses यानी CDLs से जुड़े नियमों को और सख्त किया। अधिकारियों ने 2025 में ऐसे CDL धारकों से जुड़े पांच घातक हादसों और राज्यों की ओर से विदेशी ड्राइविंग रिकॉर्ड तथा इमिग्रेशन दस्तावेजों की पुष्टि को लेकर चिंता जताई. हालांकि, यहीं से आंकड़ों और राजनीतिक दावों के बीच अंतर दिखाई देता है.

क्या अप्रवासी ड्राइवर ज्यादा खतरनाक हैं?

  • टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े इस सवाल का सीधा जवाब नहीं देते कि अप्रवासी या अस्थायी कानूनी निवासी ड्राइवर अमेरिकी नागरिक ड्राइवरों से ज्यादा खतरनाक हैं.
  • कैलिफोर्निया DMV के 2022 से 2024 तक के एनालिसिस के मुताबिक, CDL रखने वाले Temporary Legal Residents में प्रति 100 लाइसेंसधारी ड्राइवरों पर 11.9 पुलिस-रिपोर्टेड क्रैश दर्ज हुए. वहीं अमेरिकी नागरिक CDL धारकों में यह आंकड़ा 14.8 था.
  • Fatal-crash involvement यानी घातक हादसों में शामिल होने की दर भी temporary legal residents में 0.09 प्रति 100 रही, जबकि अमेरिकी नागरिक CDL धारकों में यह 0.12 थी.
  • हालांकि, इन आंकड़ों को भी अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता. इनमें यह समायोजन नहीं किया गया है कि किस ड्राइवर ने कितने मील वाहन चलाया. साथ ही आंकड़े हादसे में शामिल होने को मापते हैं, यह नहीं बताते कि गलती किसकी थी.
  • फिर भी ये आंकड़े कम से कम इतना जरूर बताते हैं कि सिर्फ इमिग्रेशन स्टेटस के आधार पर किसी समूह को ज्यादा खतरनाक ड्राइवर बताना सही तस्वीर नहीं देता.
  • फेडरल नियामकों के पास भी ऐसा कोई साफ राष्ट्रीय डेटासेट नहीं है, जिससे अमेरिकी नागरिक और अलग-अलग इमिग्रेशन कैटेगरी के ड्राइवरों के क्रैश रेट की सीधी और निष्पक्ष तुलना की जा सके.
  • ट्रांसपोर्ट लॉजिस्टिक्स से जुड़े संगठन FreightWaves ने भी यह बात उठाई है कि Federal Motor Carrier Safety Administration (FMCSA) हादसों में शामिल ड्राइवरों का डेटा उनकी नागरिकता या CDL की श्रेणी के हिसाब से ट्रैक नहीं करता.
  • वहीं rule-making प्रक्रिया के दौरान Sikh Coalition की ओर से दिए गए एक तर्क में कहा गया था कि non-domiciled CDL धारक बड़े ट्रकों से जुड़े हादसों में 2 फीसदी से भी कम हिस्सेदारी रखते हैं, जबकि 98 फीसदी से ज्यादा हादसे US-domiciled CDL धारकों से जुड़े थे.
  • हालांकि, ये आंकड़े किसी peer-reviewed अध्ययन से नहीं बल्कि नियम बनाने की प्रक्रिया के दौरान जमा की गई टिप्पणियों से आए हैं.

असली मुद्दा सुरक्षा है या पहचान?

ट्रकिंग इंडस्ट्री से जुड़े अनुभवी लोगों का कहना है कि सड़क सुरक्षा को लेकर चिंताएं वास्तविक हो सकती हैं. लाइसेंसिंग में धोखाधड़ी, खराब ट्रेनिंग, भाषा संबंधी दिक्कतें और नियमों की अनदेखी जैसे मुद्दों पर सख्ती जरूरी है... लेकिन उनका तर्क यह है कि किसी ड्राइवर का देश, इमिग्रेशन स्टेटस या उपनाम उसकी ड्राइविंग क्षमता का प्रमाण नहीं हो सकता.

यही बात ‘Mr Singh’ वाले DHS पोस्ट को लेकर उठे विवाद के केंद्र में है. सरकार सड़क सुरक्षा और अवैध इमिग्रेशन पर कार्रवाई कर सकती है, लेकिन आलोचकों का सवाल है कि क्या इस कार्रवाई के संदेश में किसी समुदाय की पहचान को नकारात्मक रूढ़ि के साथ जोड़ना जरूरी है? एक सरकारी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए शुरू हुआ यह विवाद अब अमेरिका में इमिग्रेशन नीति, सड़क सुरक्षा और नस्ली/धार्मिक पहचान के बीच बढ़ते तनाव की बड़ी बहस में बदल गया है.

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