बिहार में शराबबंदी को लेकर एक बार फिर सियासी घमासान तेज हो गया है. एक शोध रिपोर्ट में शराबबंदी की नीति पर सवाल उठाते हुए दावा किया गया है कि इसे हटाने से राज्य के राजस्व में 14 से 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है. रिपोर्ट में अवैध शराब के कारोबार, जहरीली शराब से होने वाली मौतों और महिलाओं के खिलाफ अपराध पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शराबबंदी कानून में बदलाव या इसे खत्म करने का फैसला ले सकते हैं? एक तरफ राजस्व बढ़ाने का तर्क है तो दूसरी तरफ महिलाओं के वोट बैंक और एनडीए के गठबंधन समीकरण का दबाव. ऐसे में बिहार में शराबबंदी अब सिर्फ सामाजिक मुद्दा नहीं, बल्कि बीजेपी और एनडीए के लिए बड़ा राजनीतिक धर्मसंकट बन गई है.हुई है.