9 बहनें बनीं परियां और बस गया परीलोक, उत्तराखंड का वो रहस्यमयी पहाड़, जहां रात होते ही दिखती है सफेद रोशनी, कहानी खैट पर्वत की
उत्तराखंड की देवभूमि अपने रहस्यमयी मंदिरों, लोककथाओं और अद्भुत मान्यताओं के लिए जानी जाती है. इन्हीं रहस्यों में एक नाम है खैट पर्वत का, जिसे स्थानीय लोग "परियों का देश" भी कहते हैं.
उत्तराखंड का वो रहस्यमयी पहाड़ जहां रहती हैं 9 परियां
क्या आपने कभी ऐसे पहाड़ के बारे में सुना है, जिसे लोग आज भी "परियों का देश" कहते हैं? उत्तराखंड के रहस्यमयी खैट पर्वत को लेकर मान्यता है कि यहां नौ परियां रहती हैं. सांझ ढलते ही इस पर्वत के आसपास आसमान में सफेद रोशनी चमकती दिखाई देती है. इतना ही नहीं इस पर्वत से जुड़ी जीतू बगड़वाल की कहानी आज भी लोगों को याद है.
इसके अलावा, कहा जाता है कि अगर आप खैट पर्वत में चटकीले कपड़े पहनकर सेंट लगाकर और साथ में म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट लेकर जाते हैं तो यह परियां ऐसे लोगों को अपने साथ लोक में ले जाती हैं. आखिर कौन थीं वे नौ बहनें, कैसे बना खैट पर्वत परियों का निवास और क्यों आज भी लोग इस जगह को रहस्य और आस्था का संगम मानते हैं? आइए जानते हैं खैट पर्वत की दिलचस्प कहानी.
नौ परियों का रहस्य
गढ़वाल क्षेत्र में प्रचलित मान्यता के अनुसार खैट पर्वत पर नौ परियां रहती हैं. इनके नाम आशा रौतेली, बासा रौतेली, इंगला रौतेली, गर्दवा रौतेली, सते रौतेली, बरदेई रौतेली, कमला रौतेली, देवा रौतेली और बगुला रौतेली बताए जाते हैं. इनमें आशा रौतेली को सबसे प्रमुख माना जाता है. स्थानीय लोककथाओं में इन परियों को पर्वतों, जंगलों और प्राकृतिक शक्तियों की रक्षक बताया गया है. कई ग्रामीण इन्हें वन देवियों के रूप में पूजते हैं.
कैसे बनीं नौ बहनें परियां?
लोककथा के अनुसार बहुत समय पहले एक राजा थे जिनका नाम आशा रावत था. उनकी कई शादियां हुईं, लेकिन उन्हें संतान प्राप्त नहीं हुई. बाद में उनका विवाह देवा नाम की युवती से हुआ. कहा जाता है कि इस विवाह के बाद देवा ने नौ बेटियों को जन्म दिया. कहानी के अनुसार ये नौ बेटियां सामान्य बच्चों से अलग थीं. बचपन से ही उनमें अलौकिक शक्तियां दिखाई देती थीं. जैसे-जैसे वे बड़ी हुईं, उनका आकर्षण पर्वतों और प्रकृति की ओर बढ़ता गया. एक दिन वे ऊंचे पर्वतों की ओर निकल गईं और वहीं दिव्य शक्तियों से युक्त परियों में बदल गईं. तभी से माना जाता है कि वे खैट पर्वत और आसपास के क्षेत्रों में निवास करती हैं.
क्यों कहा जाता है इसे परियों का देश?
स्थानीय लोगों का मानना है कि खैट पर्वत का वातावरण किसी दूसरी दुनिया जैसा महसूस होता है. यहां विशाल घास के मैदान, दुर्लभ वनस्पतियां और चारों ओर फैली प्राकृतिक सुंदरता देखने को मिलती है. कई लोगों का दावा है कि शाम के समय पर्वतों के ऊपर सफेद रोशनी जैसी आकृतियां दिखाई देती हैं. कुछ ग्रामीण इन्हें परियों की उपस्थिति मानते हैं. हालांकि इन दावों का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, लेकिन लोकविश्वास आज भी कायम है.
जीतू बगड़वाल की क्या है कहानी?
इस पर्वत से 'जीतू बगड़वाल' नाम के एक बांसुरी बजाने वाले की दुखद कहानी जुड़ी है. कहते हैं कि उनकी बांसुरी की मधुर धुन सुनकर परियां मोहित हो गई थीं और वे उन्हें अपने साथ परियों के लोक में ले गईं. इसके बाद से उनका कभी पता नहीं चला.
खैट पर्वत से जुड़े रहस्यमयी दावे
खैट पर्वत को लेकर कई रोचक मान्यताएं प्रचलित हैं. कहा जाता है कि यहां जाने वाले लोगों को कभी-कभी अजीब अनुभव होते हैं. पर्वत के रास्ते में कई गुफाएं भी दिखाई देती हैं, जिन्हें परियों का निवास माना जाता है. कुछ ग्रामीणों का विश्वास है कि पर्वत से फूल, अनाज या अन्य वस्तुएं नीचे लाने पर वे जल्दी खराब हो जाती हैं. वहीं कुछ लोग यहां विशेष प्रकार की ऊर्जा महसूस करने का दावा भी करते हैं.




