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यूरोप की सबसे ऊंची चोटी Elbrus पर लहराया उत्तराखंड का गौरव, Everest भी कर चुके फतह... जानें कौन हैं कर्नल रजनीश जोशी

पिथौरागढ़ के रहने वाले कर्नल रजनीश जोशी ने माउंट एल्ब्रुस की चोटी पर पहुंचकर उत्तराखंड का मान बढ़ाया है. 5,642 मीटर ऊंची इस चोटी फतह की.

Colonel Rajneesh Joshi
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कौन हैं कर्नल रजनीश जोशी

( Image Source:  instagram-@hmidarjeeling )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत4 Mins Read

Updated on: 17 Aug 2026 12:50 PM IST

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से आने वाले कर्नल रजनीश जोशी ने एक बार फिर अपनी उपलब्धि से देवभूमि का नाम रोशन किया है. उन्होंने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस को फतह कर वहां उत्तराखंड का प्रतीक चिह्न प्रदर्शित किया. इससे पहले वह माउंट एवरेस्ट समेत कई मुश्किल चोटियों पर भी तिरंगा लहरा चुके हैं.

कर्नल जोशी की अचीवमेंट्स की लिस्ट काफी लंबी है. वह Mount Nun, Mount Kun, Abi Gamin, Domekhang और Mount Kilimanjaro जैसी ऊंची चोटियां भी फतह कर चुके हैं. साल 2025 में वह Himalayan Mountaineering Institute (HMI) के पहले सेवारत Principal बने, जिन्होंने एवरेस्ट पर चढ़ाई की. सेना में वह Garhwal Rifles के अधिकारी हैं और LoC पर बटालियन की कमान भी संभाल चुके हैं. इतना ही नहीं, वह स्कीइंग, ट्रेकिंग, स्काइडाइविंग, कार रैली, फोटोग्राफी और लेखन में भी सक्रिय हैं.

कौन हैं कर्नल रजनीश जोशी?

कर्नल रजनीश जोशी उत्तराखंड के सीमावर्ती जिले पिथौरागढ़ के बुंगाछीना गांव के रहने वाले हैं. उन्होंने चेन्नई की Officer's Training Academy से ट्रेनिंग ली और मार्च 2005 में 13 गढ़वाल राइफल्स में अधिकारी के तौर पर सेना में शामिल हुए. कर्नल जोशी नियंत्रण रेखा पर एक बटालियन की कमान भी संभाल चुके हैं. इसके अलावा उन्होंने सेना में ट्रेनिंग और दूसरी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर भी काम किया है.

कौन-कौन सी चोटियां की फतह?

पर्वतारोहण कर्नल रजनीश जोशी की सबसे बड़ी पहचान है. वह भारत और विदेशों की कई ऊंची और मुश्किल चोटियों पर चढ़ाई कर चुके हैं. इनमें माउंट एवरेस्ट, माउंट नून, माउंट कुन, अबी गामिन, डोमेखांग और माउंट किलिमंजारो जैसी चोटियां शामिल हैं. साल 2025 में उन्होंने माउंट एवरेस्ट पर सफल चढ़ाई कर एक खास रिकॉर्ड बनाया. वह हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट (HMI) के पहले सेवारत प्रिंसिपल बने, जिन्होंने एवरेस्ट फतह किया. अब माउंट एल्ब्रुस पर पहुंचना भी उनके सफर की एक और बड़ी कामयाबी है. पर्वतारोहण के क्षेत्र में उनके कई कारनामों को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया गया है.

कर्नल जोशी किस इंस्टीट्यूट के हैं प्रिंसिपल

कर्नल रजनीश जोशी इस समय दार्जिलिंग के हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट (HMI) के प्रिंसिपल हैं. वह इस संस्थान के 16वें प्रिंसिपल हैं. यहां उनकी जिम्मेदारी केवल इंस्टीट्यूट का कामकाज संभालने तक सीमित नहीं है. पर्वतारोहण का उनका लंबा एक्सपीरियंस युवाओं को काफी कुछ सीखने का मौका देता है.

सिर्फ पर्वतारोही नहीं, शानदार स्कीयर भी

कर्नल रजनीश जोशी ने भारत, नेपाल और फ्रांस से पर्वतारोहण और स्कीइंग की ट्रेनिंग ली है. वह स्कीइंग में भी काफी रुचि रखते हैं और नेशनल विंटर गेम्स में हिस्सा ले चुके हैं. उन्होंने भारत के साथ-साथ फ्रांस में भी बर्फ पर स्कीइंग का एक्सपीरियंस लिया है. उनका एडवेंचर सिर्फ पहाड़ों पर चढ़ने तक ही सीमित नहीं है. वह ट्रेकिंग, कार रैली और स्काइडाइविंग जैसी रोमांचक गतिविधियों का भी हिस्सा रह चुके हैं. यानी नई चुनौतियां लेना और कुछ अलग करना उनके सफर का अहम हिस्सा रहा है.

कैमरे के पीछे भी दिखता है हुनर

कर्नल रजनीश जोशी की पहचान सिर्फ एक सैनिक और पर्वतारोही के तौर पर नहीं है, बल्कि वह अच्छे फोटोग्राफर और राइटर भी हैं. वह फोटोग्राफिक सोसाइटी ऑफ इंडिया से जुड़े हुए हैं. उनकी खींची तस्वीरें भारत के साथ-साथ विदेशों में भी कई बड़े एग्जीबिशन में दिखाई जा चुकी हैं. साल 2023 में उन्होंने ‘जट्टी वैली: अ यूटोपिया ऑफ ब्लॉसम्स’ नाम की किताब लिखी. इस किताब में पहाड़ों और प्रकृति के प्रति उनका प्यार साफ नजर आता है.

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