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कहां गायब है देहरादून में 50 फीसदी से ज्यादा मतदाता? बाहरी राज्यों से आए लोगों ने चुनाव विभाग की बढ़ी टेंशन

उत्तराखंड की प्री-SIR रिपोर्ट में सामने आया कि देहरादून समेत कई जिलों में बड़ी संख्या में मतदाता अपने पते पर नहीं मिले. चुनाव विभाग के लिए तेजी से बढ़ती आबादी और माइग्रेशन के बीच सत्यापन बड़ी चुनौती बन गया है.

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( Image Source:  AI Sora )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय4 Mins Read

Updated on: 22 March 2026 12:00 PM IST

उत्तराखंड में अप्रैल महीने में होने वाले फाइनल स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से पहले की तैयारी में एक प्री-SIR रिपोर्ट ने चुनाव विभाग की चिंता काफी बढ़ा दी है. इस रिपोर्ट से पता चला है कि मैदानी इलाकों में बहुत से मतदाता अपने दिए गए पते पर नहीं मिल रहे हैं, यानी वे 'लापता' पाए गए हैं. खासकर देहरादून, ऊधम सिंह नगर और नैनीताल जैसे जिलों में यह समस्या ज्यादा गंभीर है. सबसे ज्यादा परेशानी राजधानी देहरादून की धर्मपुर विधानसभा सीट पर है. यहां 50 प्रतिशत मतदाता ब्लॉक लेवल ऑफिसर (BLO) को अपने घर या ठिकाने पर नहीं मिले.

इसी तरह रायपुर में लगभग 40 प्रतिशत और डोईवाला में 35 प्रतिशत वोटरों का सही-सही सत्यापन नहीं हो पाया है. यह आंकड़े देखकर विभाग के अधिकारी काफी चिंतित हैं, क्योंकि इन इलाकों में 2003 के बाद दूसरे राज्यों से बहुत बड़ी संख्या में लोग आकर बस गए हैं. इन लोगों का घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) करना विभाग के लिए बहुत बड़ी चुनौती बन गया है.

नए इलाकों में समस्या ज्यादा क्यों?

शहरों में तेजी से नई कॉलोनियां, आवासीय सोसाइटी और फ्लैट्स बन रहे हैं. लेकिन इन नए बने इलाकों में मतदाताओं के नाम और पते को चुनाव पोर्टल पर मैप करने का काम बहुत धीमा चल रहा है. BLO जब इन जगहों पर जाते हैं तो पूरा डेटा अपडेट नहीं मिल पाता.

पहचान और सत्यापन में दिक्कत

बाहरी राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार आदि से आए बहुत से लोगों के दस्तावेजों का मिलान करना मुश्किल हो रहा है. उनके स्थायी पता और अस्थायी निवास दोनों का सही सत्यापन BLO को परेशानी दे रहा है. कई बार लोग अपना पुराना पता देते हैं, लेकिन वास्तव में कहीं और रहते हैं.

शहरी क्षेत्र क्यों पिछड़ रहे हैं?

रिपोर्ट में धर्मपुर (केवल 50%), रायपुर (58.57%) और डोईवाला (65.88%) जैसी महत्वपूर्ण सीटों पर सत्यापन का प्रतिशत कम होने के कई कारण बताए गए हैं. यहां आबादी बहुत तेजी से बढ़ी है. 2003 के बाद पहाड़ी इलाकों से लोग मैदानों में आए हैं, साथ ही यूपी और बिहार से बड़ी संख्या में मजदूर, व्यापारी और परिवार बस गए हैं. इससे घर-घर जाकर जांच करना और हर वोटर को मैप करना बहुत कठिन हो गया है. ध्यान देने वाली बात यह है कि यूपी और बिहार में मैपिंग का काम काफी हद तक पूरा हो चुका है, लेकिन उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में अभी भी बहुत काम बाकी है.

पहाड़ी जिले अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं

दूसरी तरफ पहाड़ी जिलों में स्थिति बहुत अच्छी है. रुद्रप्रयाग और बागेश्वर ने 100% सत्यापन करके टॉप पर जगह बनाई है. चंपावत और उत्तरकाशी में 99%, अल्मोड़ा में 97%, पिथौरागढ़, टिहरी और चमोली में 95%, पौड़ी में 93%, हरिद्वार में 89%, नैनीताल में 88%, ऊधम सिंह नगर में 77% और देहरादून में सिर्फ 71% सत्यापन हुआ है. चुनाव विभाग अब पूरी कोशिश कर रहा है कि अप्रैल तक सभी मतदाता सूचियां पूरी तरह अपडेट हो जाएं. BLO और अन्य अधिकारी लगातार काम कर रहे हैं ताकि कोई भी असली मतदाता वोटर लिस्ट से बाहर न रहे और फर्जी नाम भी न रहें. विभाग का लक्ष्य है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची बिल्कुल साफ-सुथरी और सही हो.

उत्तराखंड न्‍यूज
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